अज़ीज़ नाज़रीन,
ज़ाफ़रानी लंगूर और लँगूरनियाँ सियासी जमातें गुजिश्ता एक हफ्ते से सकते में हैं। वजह शिद्दत पसंद काफिरों के सर क़लम होने की बढ़ती हुई वारदात। तमाम शिद्दत पसंद काफ़िरों, बीजेपी वालों, संघी दहशतगर्दों के ऊपर एक ख़ौफ़ हावी हो गया है। आज ज़ाफ़रानी लँगूरनियाँ बड़े से बोल रही हैं। भारत में यह हो क्या रहा है। जैसा की कश्मीर का नारा आज़ादी, आज़ादी, आज़ादी एक पैटर्न बना था वैसा ही “गुस्ताख़े नबी की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा।“ यह नारा आम होते चला जा रहा है।
नाज़रीन अब लंगूर-लँगूरनियाँ ख़ौफ़ ज़दा दिख रहें हैं। वीडियो बना कर जो सर क़लम करने की नई रवीश का आग़ाज़ हुआ है उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है। ज़ाफ़रानी मीडिया के किसी लंगूर या आज तक की किसी लँगूरनी ने ऐसा बवाल नहीं मचाया। जैसा एक दो सर क़लम होने पर रूदाली गेंग की membership ले कर पापले पीट रहीं हैं। २०१४ से २०२१ तक हर दुसरे रोज़ एक मुस्लिम को हूजूमी दहशत में हलाक किया जाता था और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल किया जाता था। जब मजलिस का कोई भी नुमाइंदा असदुद्दीन, कांग्रेस, तृणमूल या किसी और सेक्युलर तंज़ीम का नुमाइंदा बीजेपी से सवाल करता तो वोह बीजेपी का नुमाइंदा गाली गलोच अदना दर्जे की बदज़ुबानी करने लगता था। और यह ज़ाफ़रानी मीडिया के सब कायर दरिंदे उस क़त्ल और क़ातिल की हिमायत करते हुए दिखते थे। उल्टा सवाल मुख़ालिफ़ों से ही पूछ बैठते थे। इतना जारिहाना अंदाज़ में तो कभी भी सुबह से शाम तक मुसलमानों की हूजूमी दहशत पर कभी बहस नहीं देखी। जबकी इन ८ सालों में कमो बेश २०० से २५० मुस्लिम बेगुनाह झूठे और फरेबी इलज़ाम लगा कर हूजूमी दहशत का शिकार हुए।
नाज़रीन आज के हालात के लिए और हिन्दुतान को आतिशे नार करने के लिए लंगूर-लँगूरनियाँ और नूपुर शर्मा का वाहियात फ़िरक़ापरस्त कमेंट ज़िम्मेदार है। उसके ऊपर पुलिस की ग़फ़लत के साथ लंगूरों का मुस्लिम नुमाइंदों को उकसाने वाले बयान।
नूपुर शर्मा के बयान के ५ या ६ रोज़ बाद एक टीवी मुबाहिसे में उस मुद्दे पर बेहेस करते हुए मुस्लिम स्कॉलर ने काशी जामी मस्जिद में फव्वारा है ऐसा बोल दिया उसके ऊपर होस्ट ज़हरीला नाग भास्कर टाइम्स नाउ इंडिया न्यूज़ का सुशांत सिन्हा उन मुस्लिम दानिशमंद की आवाज़ को म्यूट कर के बोलता है "अभी में बोलूं क्या तुम्हारे नबी के बारे में, नूपुर शर्मा की तरह, फिर कहते रहना सर तन से जुदा" और जो बोलने का अंदाज़ था बॉडी लैंग्वेज वोह एक दम ही ज़हरीला और अंगारे उगलता हुआ था, ज़ाहिर हो रहा था अगर इसके हाथ में तलवार दे दी जाए तो यह शख्स एक पड़ा लिखा दरिंदा बन कर मुस्लिम अवाम के सर क़लम करना शुरू कर देगा। उसके चेहरे के तास्सुरात और जिस्मानी ज़ुबान बेहद खौफनाक और किसी दरिंदे, क़साई, जल्लाद से कम नहीं लग रही थी।
फिर ऐसे लंगूर और लँगूरनियाँ जब उकसाने वाले काम करेगें तो होगा वही जो उस लंगूर सुशांत सिन्हा ने कहा था। फिर बस कहते फिरना, सर तन से जुदा। दरअसल इन सब हालात के लिए ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ ज़ाफ़रानी मीडिया के ज़हरीले सहाफी ज़िम्मेदार हैं। अगर किसी को पकड़ना है तो ज़ाफ़रानी मीडया के ऐसे ज़हरीले सहाफियों को पकड़ना होगा नहीं तो अवाम के बाद अब अगला नंबर हो सकता है इन जैसे ज़हरीले लँगूर और लँगूरनियों का ही होगा।
पुलिस अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रही है जबी तो अवाम को बहार आना पढ़ रहा है। जो काम पुलिस का है अगर वोह वक़्त पर कर लेती तो काहे को अवाम क़ानून अपने हाथों में लेता। गिरफ्तार भी किया तो किस को मासूम जुबेर को जिन्होंने २०१८ में एक ट्वीट किया था वोह भी किसी फिल्म का एक सीन था उसके ऊपर उनको गिरफ्तार किया गया। और जो असली मुजरिम है जिसकी टीवी मुबाहिसे में यह सारी खुराफात शुरू हुई टाइम्स नाउ की नाविका कुमार उसको क्यों आज़ाद घूमने दिया जा रहा है।
जिस
तरह पुलिस को मुस्लिम अवाम के अंदर एक साजिश नज़र आ गई वैसे ही नूपुर शर्मा को अपनी
बकवास और मुँह से नबी की शान में अदना दर्जे की बकवास करने के लिए खुला मैदान देना
भी साजिश का एक हिस्सा था। बीजेपी की जानिब
से नाविका को ऐसा हुकुम था की जब नूपुर बकवास करे तो उसको खुला मैदान देना। और नूपुर को कहा गया था की तुम नबी की शान में हद
से ज़्यादा ताजाऊस कर लेना।
आज
के क़त्ले आम और भारत में तबाही की ज़िम्मेदार इक़्तेदार वाली तंज़ीम बीजेपी, ज़ाफ़रानी सहाफ़ी
और आखिर में नूपुर शर्मा तीनों हैं। अभी तक
नूपुर शर्मा ही गिरफ्तार नहीं हुई है तो बीजीपी और ज़हरीले सहाफियों पर कारवाही कब होगी। तब तक क्या होते रहेगें, हर गुस्ताख़े नबी के

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