नाज़रीने गिरामी,
मौजूदा हिन्द की हालत किसी अध मरे ढोंडे (गाये, बैल या उसकी नस्ल) से कम नहीं हो रही है। जितना फरेब, झूट, ज़ुल्म, दरिंदगी इन काफ़िर शिद्दत पसंदों ने की थी उससे ज़्यादा इनको और इनकी नस्लों को भोगना पड़ रहा है। जिस शिव के लिंग को यह शिद्दत पसंद हर मस्जिद में तलाश कर रहे थे, कभी फव्वारे को शिव लिंग बोल रहे थे कभी आधे कटे पत्थर को बोलते थे की वोह शिव लिंग है लेकिन आलमगीर औरग़ज़ेब रेहमतुल्लाह की बुज़ुर्गी, जलाल और ख़ौफ़ के चलते उसने अपनी ख़तना करवा ली और मुस्लिम हो गया। बात तो एक दम दुरुस्त है शिव अब मुस्लिम हो कर इस्लाम क़ुबूल कर चूका है।
नाज़रीन
क्या इन शिद्दत पसंद काफ़िरों ने क़सम खाई है की अब यह हेंड पंप की पूजा करवा देंगे।
जो शिव लिंग जून तक बलबला रहा था उसको कहीं भी पार्वती नहीं मिल रही थी तो अब अपने
ही अकीदतमंदों में घूस गया पानी। जी हाँ नाज़रीन
अम्बरनाथ ज़ायरीनों पर क़ेहरे इलाही जम कर टूटा।
जिस शिव लिंग के ऊपर इन शिद्दत पसंदों ने झूट फरेब लाद कर हर मस्जिद को हथियाने
की नाकाम कोशिश की थी उसी शिव लिंग की ज़ियारत को जा रहे अम्बरनाथ ज़ायरीनों को पानी
ने बहा कर तबाह और बर्बाद कर दिया। उनके टेंट,
लंगर, खाने के आशियात सब बहा कर ले गया पानी।
यहाँ तक की ५००० से १०००० या उससे भी ज़ाइद ज़ायरीनों के हलाक होने का खादशा है। सही तादात जब अज़ाबे इलाही और आसमानी केहर ज़ालिमों,
दरिंदों, गुनाहगारों पर थोड़ा कम होगा तब पता पड़ेगी।
नाज़रीन यह सब अज़ाबे इलाही है जब जब बोहोत ही बड़े से शिद्दत पसंद बोलेगें तब तब इनको अपनों की क़ुर्बानी देनी होगी। यह लोग आसमानी किताब बोल कर हसा करते थे। इनको लगता था की महादेव हमारे साथ हैं। हम सियाह करें, गुनाह करें, ज़ुल्म करें, नाइंसाफी करें, किसी के भी जज़बात के साथ खिलवाड़ करें, हम पर सब जाइज़ है।
जब यह लोग मज़ाक़ बनाते थे और हर मस्जिद में झूठा, फरेबी, धोकेबाज़ शिव लिंग निकलता था तब के हमारे मई जून २०२२ में संघी दहशतगर्दों के माउथ पीस खबरनामे "आज तक" पर किये हुए कमेंट देखो। हमने यही बोला था मानसून आने दो सब कुछ बहा कर ले जायेगें। पहले आसाम, उत्तराखंड, केदारनाथ, हिमाचल, अरुणाचल, सिक्किम, अम्बरनाथ, गुजरात महाराष्ट्र। आगे और है, और है।
नाज़रीन जो कश्मीर में कभी नहीं हुआ वोह बीजेपी के आते ही हो गया। बीजपी के इक़्तेदार संभालने से क़ब्ल कभी भी कश्मीर में कोई आफ़त अम्बरनाथ, वैष्णोदेवी या और कोई हिन्दू ज़ायरीनों को ले कर नहीं आई। लेकिन जब से शैतानी उलूम का माहिर मोदी ने अपनी दहशत को कश्मीर के ऊपर मुस्सल्लद किया ख़्वाहा वोह मुफ़्तीस के साथ हुकूमत करने की हिकमते अमली हो या मरकज़ी नुमाइंदगी क़ायम करने की हिकमत हो। हर नए साल के आगाज़ पर कुछ ना कुछ हिन्दू अवाम के साथ ग़लत हो रहा था। तब भी इन ज़ाफ़रानियों को अक़ल नहीं आई और इनकी चर्बी कम नहीं हुई। तो इस साल ऐसा बादल फटा है की सदिओं तक इन काफ़िर शिद्दत पसंदों को उसका ख़ौफ़ और डर रहेगा।
नाज़रीन सूबे शुमाल में योगी ने अपनी हठधर्मी कर ली और बेगुनाह मुसलमानों के बंगले, कोठियां, मकान, दूकान तोड़ डाले लेकिन वोह दरिंदा, क़साई, जल्लाद, ज़ालिम यह भूल गया की वोह एक गंदे पानी गंदे नुत्फे की पैदावार है, और उसके ऊपर भी भी एक हाकिम मौजूद है जो हर नाइंसाफ को सज़ा ऐसी देता था की गुनहगार सिर्फ तड़प कर रह जाता है और ना अपने ज़ख्मों को किसी को दिखा सकता है और ना ही अपनी तकलीफ किसी को बयान कर सकता है। योगी के आने के बाद जितना जानी नुकसान हिन्दू शिद्दत पसंदों, बीजेपी वालों और संघियों का हुआ है शायद वोह तारीख में किसी भी वज़ीरे आला के दौर में नहीं हुआ होगा। हर रोज़ १०-१२ हिन्दू शिद्दत पसंद हादसात का शिकार हो कर मारे जा रहें हैं।
मध्य प्रदेश में भी रमज़ान के पाकीज़ा महीने में रोज़ेदारों के घरों को तोड़ा गया था। हमें मालूम है इन काफ़िर शिद्दत पसंदों को कहाँ ले जा कर बेमौत मारना हैं। एक एक की फेहरिस्त तैयार है। किसी को नहीं बक्शा जाएगा। अभी हाकिमियत के ज़ौम में तुम फटे जा रहे हो लेकिन जितना बिखरोगे उतना तुमको नहीं तो तुम्हारी नस्लों को समेटना होगा। क्योंकि तुम्हारे गुनाह नक्श हो चुके हैं। तहरीर हो चुके हैं अब कफ़्फ़ारे का वक़्त है। या पेनल्टी।
Zuber
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