Wednesday, 8 August 2018

आज़ादी या खुद-शासक उससे कम नहीं है।


उत्तर प्रदेश में दो मुस्लिमों का फिर लीचिंग।

मेरठ: मेरठ के शास्त्री नगर इलाके में ७ अगस्त को दो भाइयों शोएब और दानिश की हिंदू शर पसंदों के साथ झगडे में मौत हो गई। इस बार लीचिंग गाय, बच्चा चोरी की झूटी अफवाह की वजह से नहीं हुई, बल्कि मुस्लिमों से अत्यधिक धार्मिक घृणा के कारण हुई है। उत्तर प्रदेश लिचिस्तान के उस हिस्से में इस दोहरे हत्याकांड को आदमखोर हस्शी लोगों झुंड ने अंजाम दिया। ७ अगस्त की रात को जब दोनों भाई बाजार जा रहे थे  तब २० से ३० हिंदू इन्तेहापंसंदो के झुंड ने उन पर हमला कर के उनको हलाक कर दिया ये एक और लीचिंग का मामला है, लेकिन खबरों को तोड़मरोड़ के पेश किया जा रहा है क्योंकि भारत की पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोहोत किरकिरी हो चुकी है और वो अपनी काफी छवि खो चूका है  और अधिक खोना नहीं चाहता है।

जब से आदमखोर बीजेपी ने भारत संघ पे कब्ज़ा किया है, तब से वह लिंचिस्तान, रैपिस्तान और आतंकिस्तान में परिवर्तित हो गया है। बीजेपी और हिंदू आतंकवादियों के आदमखोर दृष्टिकोण के कारण मुस्लिम गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। हर दिन एक-दो मुस्लिमों को लिंचिस्तान के ३० - ४०  आदमखोर हब्शी लोगों के झुंड द्वारा लेच किया जा रहा है। 

पिछले हफ्ते इस पत्रकार को एक समाचार सामग्री के बारे में पता चला. जिसमे लेफ्टिनेंट कर्नल शाहिद मेहमूद महिल, उर्फ ​​"चौधरी साहब" को २०२० में खालिस्तान के जनमत संग्रह के लिए करता धर्ता माना गया है, ख़बरों के अनुसार उनके प्रयासों के चलते कनाडा, अमेरिका और यूरोप में खालिस्तान आंदोलन के लिए अपने प्रयासों को समर्थन प्राप्त हुआ है। इस पत्रकार ने चौधरी साहब की प्रशंसा की और भारत के मुस्लिमों के लिए भी इस तरह की मुहीम को आगे बढ़ने की मांग की।

यह पत्रकार चौधरी साहब के खालिस्तान को मुक्त करने के उनके जनमत संग्रह के प्रयासों लिए सलाम करता है। और मुसलमानों के लिए भी कुछ इसी तरह का करने का अनुरोध करते हुए कहना चाहता है की भारत में मुस्लिम दूसरे दर्जे के नागरिकों के रूप में दयानीय  स्थितियों में रह रहे हैं। उनको इसमें से कोई अधिकार नहीं है: - 

१. जीने का अधिकार
२. अपने बच्चों को शिक्षित करने का अधिकार
३. कमाई का अधिकार
४. अपने धर्म का पालन करने का अधिकार
५. गरिमा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार।

हम भी खुद को भारत (लिंचिस्तान) के चंगुल से मुक्त करना चाहते हैं, जहां आदमखोर हब्शी लोग हर दिन निर्दयतापूर्वक मुसलमानों को मार डालते है। जहाँ मुसलमानों की दाढ़ी हिंदू इन्तेहापसन्दों द्वारा जबरदस्ती मुंडा दी जाती है, जो कि उनके धर्म का प्रतीक है। यहां तक​कि भारतीय न्यायपालिका सर्वोच्च न्यायपालिका जैसे संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट भी मुस्लिमों के खिलाफ और हिन्दू शरपसनदों के पक्ष में फैसले दे रहे हैं।   

भारतीय मुस्लिम संसद सदस्य आज़ादी के बारे में बोलने या मुसलमानों के लिए एक और राष्ट्र लिए आवाज़ बुलंद करने से डरते हैं; मुस्लिमों पर तीव्र अत्याचारों को देखने के बाद भी, वे भारतीय संविधान और कानूनी व्यवस्था पर विश्वास करने के कसीदे कस्ते है और भाषण बाज़ी करते हैं। क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी दुकानों को ताला लग जाए और उनका राजस्व बंद हो जाए। यह पत्रकार मुस्लिम संसद सदस्यों से कुछ चुभते हुए प्रश्न पूछना चाहेगा जो मुसलमानों को भारत के संविधान और कानूनी व्यवस्था पर विश्वास करने के लिए भाषण बाज़ी करते है।  

१. भारतीय संविधान ने अल्पसंख्यकों के अधिकार की गारंटी दी है, लेकिन धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आधार पर मुसलमानों के साथ अन्याय का फिर क्या कारण है।  

२. जब बाबरी मस्जिद को शहीद किया गया तब भारतीय संविधान ने क्या किया, और जब उन अपराधियों को संसद में जगह दी गई,  जिन्होंने उच्चतम न्यायलय में दिए अपने ही हलफनामे को खारिज कर दिया था के मस्जिद की यथा स्थिति को बनाए रखेंगे, तब न्यायपालिका ने किया क्या.

३. न्यायपालिका ने किया क्या यकूब मेमन को जल्दी से फ़ासी दे दी और और बालासाहेब ठाकरे आखिरी सांस तक आज़ाद बने रहे। वह आदमी जो मुंबई में जो शिव सैनिकों को भड़का के सांप्रदायिक हिंसा के लिए ज़िम्मेदार था। न्यायमूर्ति श्री कृष्ण ने सांप्रदायिक हिंसा के लिए ठाकरे के उत्तेजक भाषणों को दोषी ठहराया था और बम विस्फोटों को सांप्रदायिक हिंसा का परिणाम बताया था।

४. मुस्लिमों को कानूनी व्यवस्था ने क्या दिया जब खाकी आतंकवादी डीजी वंजारा  और अन्य फर्जी मुठभेड़ों में सम्मान के साथ बरीं कर दिए गए।

५. आतंकवादियों की महिला कोडनानी, प्रज्ञा को आतंकवाद के कार्य के लिए बरी कर दिया गया तब न्यायपालिका क्या हुई? 

६. जब मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ समेत मुस्लिम वर्चस्व वाले इलाकों में बम विस्फोट के सभी आतंकवादियों को छोड़ दिया गया तब न्यायपालिका क्या हुई?

७. भारतीय संविधान ने क्या किया जब शैक्षणिक संस्थानों को केंद्र और राज्यों की भगवा सरकारों ने झूटी कहानिओं के आधार पर उनकी अल्पसंख्यक स्थिति को कम करने के लिए अतिक्रमण करना चाहा।

८. जकीया जाफरी की याचिका के साथ न्यायपालिका ने क्या किया। वह अभी भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है और अपने पति की हत्या के लिए मास्टर माइंड को न्याय के लिए आने की उम्मीद रखती है।

९. जब आपकी धार्मिक मान्यताओं को अतिक्रमण कर के लोकसभा में बल जब्री से ट्रिपल तालाक को समाप्त करने के कानून पारित किया गया तो संविधान ने आपको किस तरह से मदद की।

१०. हाल ही में, रांची उच्च न्यायालय ने सभी गौ आतंकवादियों को अलीमुद्दीन के लीच के लिए बरी कर दिया। फिर भी आप मुसलमानों से भारत के संविधान और भारत की न्याय व्यवस्था पर विश्वास करने के लिए भाषण बाज़ी कर रहे हैं बल्कि आपको मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र और आजादी की मांग करनी चाहिए थी। क्या यह आप पीड़ित मुस्लिम परिवारों के साथ अन्याय नहीं कर रहे हैं, जब आप उन्हें न्यायपालिका पर विश्वास करने के लिए भाषण बाज़ी कर रहे है क्या आप लीचिंग की मुस्लिम विधवाओं की भावनाओं को ठेस नहीं पंहुचा रहे हैं? 

वर्ष २००१ में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के बामिया में कुछ पत्थर आधारित मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया गया था। २००९ में एक मूर्ति का निर्माण पूरा हुआ और सभी मूर्तियां २०१३ तक पुनर्निर्मित कर दी गईं। जबकि भारत में बाबरी मस्जिद १९९२ में शहीद की गई थी, पुनर्निर्माण को भूल जाओ, अभी तक मामला न्यायलय में विचाराधीन है।

भारत में मुसलमानों के साथ गंभीर अन्याय, पक्षपात, हत्या, अपमान को देखते हुए, मैं  पाकिस्तान की इस्लामिक गणराज्य की नव निर्वाचित सरकार समेत सभी मुस्लिम देशों का आह्वान करता हूं, की संयुक्त राष्ट्र, अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों और मंचों में भारत के मुसलमानों पर होने वाले अन्याय के खिलाफ उठने वाली आवाज़ का समर्थन करे। हम हिंदू आतंकवादियों और भगवा सरकार, भगवा न्यायपालिका के अन्याय, हत्या, पक्षपात, अपमान से मुक्ति और एक अलग राष्ट्र चाहते हैं। दुनिया में हमारी आखिरी उम्मीद केवल मुस्लिम देशों के ऊपर निर्भर है और आखिर में सर्वशक्तिमान पर है।


English Version


Freedom or self-rule not less than that. autonomousjournalist.wordpress.com/2018/08/08/fre

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