लिंचिस्तान के आदमखोर भक्त, अंधे भक्त, बीजेपी के कारकून और एहमक
संघी लोग मूर्खों के स्वर्ग में रहते हैं, सोचते हैं कि वे सबसे बुद्धिमान लोग हैं
और शेष वैश्विक आबादी मूर्ख हैं। लिंचिस्तान
की जनता उम्मीद लगाय बैठी है की पाकिस्तान के हाल ही में निर्वाचित प्रधान मंत्री कश्मीर
की समस्या का समाधान भारत सरकार के निर्देशों और जनता की इच्छा के अनुसार करेंगे। एक
मूर्ख भक्त ने अवलोकन किया और पाकिस्तान के
सबसे बुद्धिमान प्रधान मंत्री श्री इमरान खान को हथियार बाजार, व्यापार नीति अमेरिका
और चीन के सिद्धांत पर एक वीडियो के माध्यम से समझाने की कोशिश की। हथियारों की दौड़
में उसने पाक और चाइना की संघी के बारे में तो बताया लेकिन वह भारत और अमेरिका का नाम
लेना भूल गया उसके हिसाब से कश्मीर जैसे मुद्दे के ना सुलझाने के लिए पाकिस्तान और
चीन का हथियार संधि जिम्मेदार है। परन्तु वही
सिध्दांत भारत पे भी तो लागू होता है लेकिन वो भारत का नाम लेना भूल गया.
उस मूर्ख भक्त को इमरान खान की योजना और रणनीति के बारे में शायद
पता नहीं होगा जो हमेशा क्रिकेट पिच में हारे हुए गेम जीते है। अपनी रणनीति और योजना
के कारण पाकिस्तान ने १९९२ में इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप जीता था। किसी को उम्मीद
नहीं थी अब पाकिस्तान क्रिकेट का नया चैंपियन होगा, विशेष रूप से जब बोर्ड पर केवल
८० रन थे और ६ डाउन हो चुके थे , और २५० रनों के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्कोर
दर २ से नीचे थी। लेकिन उन्होंने मैच में मियांदाद के साथ रणनीति बनाई और ना सिर्फ
पाकिस्तान के लिए कप हासिल किया बल्कि पाक को विश्व का नया क्रिकेट चैंपियन घोषित किया।
इमरान खान की रणनीति के चलते जिस तरह पाक को कप और जीत हासिल हुई
जबकि ऐसा लगभग असंभव लग रहा था, उसी तरह इमरान प्रधान मंत्री पद का पद उस समय धारण
किया है जब पाक भ्रष्टाचार, मुद्रास्फीति, अन्याय और कई अन्य मुद्दों से ग्रस्त है।
जैसा कि इमरान की कप्तानी में पाक ने खेल के मैदान में हर हारी हुई बाज़ी को जीता था, उसी
तरह राजनीति में भी वह पाकिस्तान की समस्याओं को भी जीत लेंगे और वो गायब हो
जाएंगी और आखिर में पाक राजनीति के अखाड़े में जीते हुए देशों की फेहरिस्त में उभर के
आएगा जिस तरह इमरान की कॅप्टेन्सी में क्रिकेट के खेल में पाक सदा ही जीता हुआ घोषित
किया गया।
कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए भारत के आदेश पर मूर्ख भक्त अपने
बेतुके, आधारहीन सुझाव देने की कोशिश कर रहे
है। कश्मीर समस्या भारत की इच्छा और मांग के अनुसार हल नहीं होगी, बल्कि यह
कश्मीर के लोगों की मांग और भावना के अनुसार हल हो जाएगी। यदि भारतीय रक्तपात के बारे
में चिंतित हैं और ईमानदारी से कश्मीर मुद्दे को हल करना चाहते हैं, लेकिन पाकिस्तान
को जिम्मेदार मान रहे है की पाकिस्तान पहल नहीं करना चाहता है; तो ठीक है आप पहले कर दीजिये पहले भारतीय सेना को
हटा दें। समूचे कश्मीर को भारतीय सेना मुक्त
कीजिये। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है ये बात तस्लीम कीजिये। मोदी सरकार के गठन के बाद क्यों ७००० से ८००० और अधिक सेनाकर्मी कश्मीर में
नियुक्त किए गए।
इन तमाम वर्षों में कश्मीर मुद्दा केवल भारत सरकार के कट्टरपंथी दृष्टिकोण
और नाकारात्मक मानिसकता के कारण हल नहीं हो पाया है। भारतीय शांति के बारे में बात
करतें है और कश्मीर की स्थिति के लिए पाक को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन वे अपनी
ओछी और दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को क्यों नजरअंदाज करते हैं। भारतीय एक तरफ शांति बहाल
करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात करते है
और दूसरी तरफ वे अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370 को खत्म करने जा रहे हैं। फिर
भी वे कश्मीर मुद्दे को हल करने के बारे में बात कर रहे हैं। एक हाथ वे दोस्ती के लिए
बढ़ाते है और अगले ही पल खंजर घोप देते है। भारतीय सरकार और उसके कथानाक की क्या प्रामाणिकता
है जो कश्मीर मुद्दे को ईमानदारी से हल करने के लिए रूचि दिखा रही है लेकिन कश्मीर
की वर्तमान स्थिति को कमज़ोर करने के लिए काम कर रही है।
मूर्खों की
सलाह पे काम करना बेकार और अर्थहीन है जैसे की एक भक्त ने कश्मीर मुद्दे पर इमरान खान
को अपने वीडियो के माध्यम से प्रचार करने की कोशिश की है। हाल ही में हुए दोनों देशों
के चुनाव परिणाम बुद्धिमान और डफर्स लोगों का सबसे अच्छा उदाहरण हैं।
English
Version
Fools preached to the intelligent, on Kashmir. https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/08/19/fools-preached-to-the-intelligent-on-kashmir/ …
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