आम तोर पे
२०१२ से ले कर प्रधान मंत्री बनने के बाद २०१५ तक मोदी को सख्त, कठोर प्रधान मंत्री
के रूप में पेश किया जाता रहा था, असल में ये सारा किया धरा लंगूर मीडिया और लंगूर
पत्रकारों का था. मोदी जी ने भी इन ४ सालों में खूब जुमले बाज़ी की और काम के नाम पे
टाई टाई फिस्स.
पिछले ४ सालों
में मोदी जी हर १५ अगस्त और २६ जनवरी को लाल किले के प्राची से देश को सम्भोदित करते
रहे. और ये सिर्फ मोदी ही नहीं बल्कि एक परम्परा
है भारत का हर पंत प्रधान राष्ट्रिय पर्व पे अपने देश वासिओं और प्रजा को सभोदित करता
है. भारत ही नहीं विश्व में भी मुख्तलिफ देशों
के राष्ट्रिय पर्व पे उनके देश के प्रधान अपनी जनता को सम्भोदित करते है. उनके दूआरा
किये हुए कामो का ब्यौरा देते है और आगे की नई योजनावो की घोषणा करते है.
पिछले ४ सालों
में मोदी जी ने हर राष्ट्रिय पर्व पे लाल किले की प्राची से देश को सम्भोदित किया नई
घोषणाएं की अपनी सरकार की उपलब्धि बताई. लेकिन इस साल का १५ अगस्त का भाषण मोदी के
लिए ख़ास था क्योंकि ये इस सरकार का आखिर १५ अगस्त का भाषण था अगले साल १५ अगस्त तक
चुनाव हो चुके होंगे और किसकी सरकार होगी कोई नहीं जानता.
लेकिन ये
पत्रकार एक बात अवश्य कहना चाहेगा हर १५ अगस्त और २६ जनवरी के भाषणों की भाँती इस साल
मोदी का भाषण काफी बूझा बूझा, सूखे खेत की तरह, असहाय प्रतीत हुआ. उनके भाषणों के अंदर इन ४ सालों में जो जोश खरोश
जुमलेबाज़ी में भी रहता था वो कताई इस साल के १५ अगस्त के भाषण में दिखाई नहीं दिया. भाषण से साफ़ प्रतीत हो रहा था मोदी का ह्रदय दुखी
है देश में आई हुई विपदाओं से, आपदाओं से,
लीचिंग, कश्मीर समस्या से, महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए क्राइम ग्राफ से मोदी
का भाषण दुखी दिख रहा था.
भले ही मोदी ने इन सब बातों में से कुछ एक बातों का ही ज़िक्र किया लेकिन दानिशमंद, लेखक, प्राध्यापक उनकी बॉडी लैंग्वेज को लपक लेने में देरी नहीं करते. भाषण से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था के एक हारा हुआ राजा अपनी प्रजा के सामने किसी मुजरिम की भाँती खड़ा है, और सम्भोदित कर रहा है या कहना चाहता है के में तुम्हारा मुजरिम हूँ, में तुमको सुरक्षा नहीं दे पाया, देश का भला नहीं कर पाया. अब जो सजा देना है २०१९ में दे दीजिये. एक बात और ये पत्रकार कहना चाहेगा इस तरह के भाषणों से बीजेपी और कार्यकर्ताओ का हौसला और मनोबल कमज़ोर होता है. और उनको लगने लगेगा के जंग लड़ने से पहले ही राजा ने हार मान ली है.
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