हाल ही में हिन्दू आतंकी और बीजेपी का सरगना अटल बिहारी वाजपाई मारा गया. उसकी मौत पे हो सकता है उसके चेले, चमचों और उसको फॉलो करने वाले आतंकिओं को आघात पंहुचा होगा. परन्तु लेचिस्तान में ऐसे भी बोहोत सी जनता होगी जो उस आतंकी की मौत पे गम का इज़हार ना करना चाहे.
इसके ऊपर आतंक मचाना और जनता को ज़ोर ज़बरदस्ती सोग मानाने लगाना कहाँ तक जाइज़ और दुरुस्त है . लिंक देखिये
जी हाँ ऐसा ही मामला औरंगाबाद महानगर पालिका में देखने को मिला. जहाँ एक प्रस्ताव आया था के आतंकी अटल बिहारी के मारे जाने पे शोक और दुःख वियक्त किया जाए.
जिसपे आल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल
मुस्लेमीन
के पार्षद मतीन साहब ने सदन में अध्यक्ष से इस प्रस्ताव पे अपना विरोध दर्ज करने को कहा जो के एक पूरी तरह से सवेधानिक प्रक्रिया
है. इस विरोध प्रस्ताव पे आतंकी अटल के बचे हुए आतंकिओ ने सदन को अपने कब्ज़े में ले कर पार्षद मतीन के ऊपर जान लेवा हमला बोल दिया और खूब आतंक मचाया. सदन में मौजूद तमाम आदरणीय मुस्लिम पार्षद इस आतंकी हमले से सकते में रह गए.
हर बार की तरह अब फिर ये पत्रकार श्रीमान असदुद्दीन
ओवेसी और ऍम.आई.ऍम. के सरबराह से एक सवाल ज़रूर करना चाहेगा. क्या इसी सविधान की आप सदा दुहाई देते रहते हो अब जब सदन के अंदर आतंकी घूस के मुस्लिम पार्षदों को लीच करने के ऊपर उत्तारू हो जाते है तो किस सविधान की आप बात करते हो किस कानून की आप दुहाई देते हो.
अभी तक बेगुनाह मुस्लिम नोजवानो को १५ से २० हिन्दू आतंकी लीच करते थे फिर वही काम पुलिस ने करना शुरू कर दिया हाल ही में मध्य प्रदेश में एक शोएब खान को बगैर किसी जुर्म के पुलिस गिरफ्तार कर लेती है और १५ से २० खाकी आतंकिओ के झुंड ने मिल के उसको हलाक कर दिया. After mob lynching its time for Khakee
terrorist lynching.
अब तो बात हद से आगे निकल गई है अब अकेले मुस्लिम पार्षद
के ऊपर १५ से २० आतंकिओ ने सदन में घूस के जान लेवा हमला कर दिया और लीच करने की कोशिश की अब इसके बाद सिर्फ मुस्लिम विदयाक और संसद ही बच जाते है जिनको १५ से २० आतंकी लीच कर डाले.
फिर भी असदुद्दीन
ओवेसी के मुख से सदा ही भारत के लिए शहद ही टपकता है सविधान की दुहाई देते रहते है कानून की बात करते है अब कहाँ गया असद साहब का सविधान रक्षक जिस सदन में कानून बनाया जाता है जहाँ सविधान की कसम खाई जाती है उसी सदन की गरिमा को आतंकिओ ने धूमिल कर दिया और सविधान की धज्जिया उड़ा दी. आगे और क्या क्या देखाएगे असद साहब कितने मुस्लिमों
की बलि देनी पड़ेगी आपके लेचिस्तान
की मट्टी को लाल करने के लिए. अब तो खुदारा बटवारे के बारे में बोलना शुरू कीजिये. अल एलानिया नहीं तो दबे अलफ़ाज़ में बोलिये और और जब मोहीम सख्त हो जाए तो अलल एलानिया बोलिये और हासिल कीजिये मुसलमानो के लिए एक और अलग राष्ट्र.
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Zuber Ahmed Khan
Journalist
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Terror in the house
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/08/18/terror-in-the-house/ …Zuber Ahmed Khan
Journalist
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