मुंबई
इंसान की मानसिक के ऊपर कब शैतान हावी हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता. ऐसे ही एक शैतान का मामला मुंबई के कांदिवली से सामने आया है. वासना के देश रेपिस्ठान में अभी तक महिलायें असुरक्षित थी फिर मासूम बच्चियां उसके बाद विदेशी मेहमानो को हवस का शिकार बनाया गया. परन्तु अब बारी जानवरों की थी. मुंबई जैसे शालीन महानगर में जहाँ महिलायें अपने आपको सुरक्षित समझ सकती हैं जहाँ पुरुष समाज महिलाओं की इज़्ज़त करना जानता है. जहाँ काम काज के सिलसिले में महिलायें देर रात को भी अपने घरो पे सुरक्षित लौट सकती है परन्तु इस शालीन और सुरक्षित इंसानों के शहर में कुछ शैतान पहुंच गए हैं. ऐसा ही एक निरादाम शैतान प्रेम सिंह हवस की आग में इस कदर जल रहा था कि उसने बेजुबान कुतिया के साथ ही शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया। नाकाम रहने पर उसने क्रूरता से कुतिया को तड़पाकर मार डाला। आरोपी जब अपने कुकृत्य में असफल रहा तो उसने कुतिया के निजी अंगों में लोहे की छड़ घुसेड़ दी, जिससे उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
इंसान की मानसिक के ऊपर कब शैतान हावी हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता. ऐसे ही एक शैतान का मामला मुंबई के कांदिवली से सामने आया है. वासना के देश रेपिस्ठान में अभी तक महिलायें असुरक्षित थी फिर मासूम बच्चियां उसके बाद विदेशी मेहमानो को हवस का शिकार बनाया गया. परन्तु अब बारी जानवरों की थी. मुंबई जैसे शालीन महानगर में जहाँ महिलायें अपने आपको सुरक्षित समझ सकती हैं जहाँ पुरुष समाज महिलाओं की इज़्ज़त करना जानता है. जहाँ काम काज के सिलसिले में महिलायें देर रात को भी अपने घरो पे सुरक्षित लौट सकती है परन्तु इस शालीन और सुरक्षित इंसानों के शहर में कुछ शैतान पहुंच गए हैं. ऐसा ही एक निरादाम शैतान प्रेम सिंह हवस की आग में इस कदर जल रहा था कि उसने बेजुबान कुतिया के साथ ही शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया। नाकाम रहने पर उसने क्रूरता से कुतिया को तड़पाकर मार डाला। आरोपी जब अपने कुकृत्य में असफल रहा तो उसने कुतिया के निजी अंगों में लोहे की छड़ घुसेड़ दी, जिससे उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
घटना कांदिवली पुलिस थाना
छेत्र की है। पुलिस ने जानवरों के साथ अप्राकृतिक संबंध एवं पशु क्रूरता अधिनियम के
तहत मामला दर्ज कर आरोपी सुरक्षा गार्ड प्रेम सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। मनोचिकित्सकों
के अनुसार, इस प्रकार की हरकतों को अंजाम देने वाले लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं।
इंसान के ऊपर जब शैतान सवार होता है तो वो बन जाता है जानवर. ऐसा ही एक मामला हाल ही में राजस्थान की राजधानी जयपुर से २९ अगस्त को सामने आया था जहाँ आनंद सिंह नामक युवक ने अपनी ना बालिग बेटी और भतीजी के साथ ज़िना कारी की थी. उत्तर प्रदेश से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था. जहाँ रक्षा बंधन के रोज़ सभी घर वाले मंदिर गए हुए थे उसका फायदा उठा के एक निरधाम ने अपने ही भतीजे की बेटी के साथ हवस पूरी कर डाली. दोनों ही केसेस में अपराधी पकडे जा चुके हैं और उन्होंने अपने गुनाह कुबूल भी कर लिए है.
फिर ऐसी मानसिकता से घर
वाले तो त्रास रहते ही है परन्तु जानवर भी ऐसी मानस्किता के शिकार होते है. हाल ही में मोदी के वेस्ट बंगाल दौरे के भाषण का
असर एक निराधम संजय मंडल पे इतना हुआ के उसने कुतिया को अपनी हवस का शिकार बना डाला. उसके ठीक दो दिन बाद मध्य प्रदेश के हिन्दू बहुल
और पवित्र शहर होशंगाबाद के बुदनी गांव में एक निराधम ने अपनी मंदिर के पास बंधी हुई
गाये के साथ मू काला कर डाला.
कोई
माने या ना माने ए सब बीजेपी, संघ ओर हिन्दू आतंकिओ के शैतानी कूकर्मो का नतीजा है. ये पत्रकार सदा ही इस बात की पूरज़ोर वकालत करता
है अगर देश की सत्ता पे शैतान बैठा होगा तो जनता में शैतानी असरात नुमाया होंगे. जिस
तरह घर में अगर शैतान हावी होगा तो घर के दुसरे अफ़राद पे उसका असर होगा. और अगर घर में सूफी होगा, देश की बागडौर सूफी /
संत चला रहा होगा तो देश सुचारू रूप से काम करेगा. चारो तरफ खुशहाली होगी, सभी लोग
सुरक्षित महसूस करेंगे, देश की तरक्की होगी, नाम होगा इज़्ज़त मिलेगी. क्या वजह है आज़ादी से पहले मुग़ल काल में एक महिला
कश्मीर से ले कर कन्याकुमारी तक अकेले समूचे अंग पे सोना पहन के सुरक्षित सफर कर सकती
थी. ना कोई लूट होती थी और ना उसके साथ किसी
भी प्रकार का दुर्व्यवहार. फिर मुगल काल में
भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. क्योंकि
शासक इन्साफ पसंद थे सूफी मानसिकता के थे.
चाहे आज इतिहास में उनको गलत संज्ञा दी जाए वो अलग मामला है. चाहे सिनिमा में उनको एक अहंकारी, बलात्कारी, समलैंगिक,
ज़ालिम बोल के पेश किया जाए और मुग़ल शासको की छवि धूमिल की जाए लेकिन साँच को आंच ही
किया. जो इतिहास जानते है और जो सत्य पे यकीन
रखते है वो कदापि इस बात को मानाने को तैयार नहीं होंगे.
भारत
में जिस तरह से हालत पेचीदा होते जा रहे है जिस तरह से जनता जुर्म करने पे आमादा है
और जिस तरह से जनता के मन में क्रोध, घृणा पैदा हो रही है और वो अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशों
के अधीन नत मस्तक हो रही है उससे तो साफ़ ज़ाहिर हो रहा है के राजा की मानसिकता संतों
वाली नहीं है परन्तु एक अपराधी वाली कपटी, धूर्त मानसिकता है.
ईदुल
अज़हा को हरयाणा में एक मुस्लिम ताहिर की मोब लीचिंग के बाद उत्तर प्रदेश से चार रोज़
तक रोज़ एक मुस्लिम की मोब लीचिंग की गई. तमिलनाडु
से एक मुस्लिम मौलाना की लीचिंग की गई. और बिहार से एक ५० साला मुस्लिम युवक की लीचिंग
की गई. क्या वजह है के जनता के सर पे इस कदर
खून सवार है. कुछ तो गड़बड़ है. दूसरी बात मोदी की कही हुई बात पे काहे को भक्त यकीन
करने के बजाय उसके उलट काम कर रहे है. इधर
मोदी ने कुछ कहा उधर भक्तों की तरफ से उसके उलट एक्शन हुआ.
मोदी के संत और फ़कीर वाले बयान पे एक कहानी याद आई. एक पंडित जी थे जो रोज़ भक्तों को मंदिर में प्रवचन देते थे और अच्छे कर्म करने की शिक्षा देते थे. लेकिन उस गांव में तो हालात पहले से और भी बद से बत्तर होते चले जा रहे थे. सभी हैरान परेशान थे के इतने ज्ञानी पंडित के प्रवचन का जनता के मन पे असर काहे को नहीं हो रहा है. फिर एक सिद्धि साधू उस गांव में आये जो पाखंडी, धूर्त और ना इन्साफ नहीं थे. उन्होंने रात को सभी को पंडित के गुप्त अड्डे पे बुलाया वहां पे पंडित सभी तरह की रंग रालिओं में मगन था. और वो सभी कार्य कर रहा था जिससे के वो जनता को रोकने के बारे में प्रवचन देता था.
इस कहानी से ये सीख मिलती है अगर किसी ज्ञानी महापुरुष की बात को जनता नकार रही है और ठीक उसके उलट कर रही है मतलब वो ज्ञानी धूर्त है कपटी है पाखंडी है और जिस काम से वो जनता को मना कर रहा है वो खुद भी उसी कार्य में शामिल है. तभी तो जनता के मन में उसके कहे का असर नहीं हो रहा और उसके प्रवचन को सुन के जनता की आखों से नदामत और पशेमानी के आंसू नहीं निकल रहे है, और जनता मे कोई बदलाव नहीं दिख रहा है.
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