Monday, 20 August 2018

मुस्लिम टैक्स का दुरुपयोग

आम तोर पे राजनेता अपने बड़बोलों के लिए मशहूर होते हैं, उसपे भाजपा के नेताओं का क्या कहना एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा.  सिर्फ और सिर्फ इनसे ज़ुबानी जमा खर्च करवा लो.  इसी कड़ी में जुड़ गया है एक और बडबोल नेता, उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम.  शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न और बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी पंचतत्व में विलीन हो गए हैं.   इस अवसर पे ज़रा ज़्यादा ही वाजपाई प्रेम दिखाते हुए योगी जी भावुक हो गये और ताबड़तोड़ घोषणा कर बैठे की उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उनकी याद में चार स्मारक बनाएगी.  योगी सरकार जल्द ही कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाकर इन स्मारकों को बनाने पर फैसला लेगी.

1.           आगरा के बटेश्वर में बनेगा स्मारक.
2.          कानपुर में जहां वो पढ़े थे, वहां बनेगा स्मारक.
3.          बलरामपुर में (पहला लोकसभा चुनाव जीते) बनेगा अटल स्मारक.
4.          कर्मभूमि लखनऊ में भी बनेगा अटल स्मारक.

लेकिन जब बात का बतंगड़ बना तो योगी जी से जवाब देते नहीं बन रही है और फजीहत से बचते मू चुराते नज़र आ रहे है.  क्योंकि योगी जी घोषणा करते वक़्त ये बताना भूल गए की ये स्मारक सरकारी पैसे से बनेगी या बीजीपी, संघ या किसी और हिन्दू इन्तहा पसंद तंज़ीम के चंदे से बनेगी. अब सवाल यहाँ ये उठता है की पैसा कहाँ से आएगा क्या उसके लिए सरकारी खज़ाना खोल दिया जाएगा स्मारक के नाम पे चाहो जितना लूट मचाओ.  अब अगर स्मारक सरकारी ख़ज़ाने से बनती है तो उसमे जनता की भलाई का कोई भी काम नहीं है.  हाँ अलबत्ता संघ के एक कारकून को आते समय तक उत्तर प्रदेश की जनता देख सकेगी, फिर उसके लिए सरकारी खज़ाना इस्तेमाल में लेने की ज़रुरत ही नहीं है.  दूसरी बात अब वाजपाई किसी भी प्रकार से भारत सरकार की सेवा में नहीं है.  जब वो पोस्ट पे नहीं और शांत हो गये तो वो महज़ बीजेपी और सघ का कारकून है. तो उनके नाम पे सरकारी ख़ज़ाने से स्मारक बनाना क्या ये टैक्स पेयर्स के रुपयों का दुरुयोग नहीं है. वाजपाई जब तक प्रधान थे तब तक उसकी कीमत थी  उनकी स्मारक के लिए सरकारी पेसो का इस्तेमाल करना सरकारी ख़ज़ाने को सेंध लगाना है और मुस्लिम टैक्स की बर्बादी करना है      

सवाल यहाँ ये सबसे बड़ा है की मुस्लिम समाज को सरकार कितनी सुविधा दे रही है, शिक्षा, रोज़गार, उच्च शिक्षा, घर फिर क्या मुस्लिम समाज सरकार को टैक्स नहीं देता है.  आज बाथ रूम के शेम्पू से लेकर रात में इस्तेमाल होने वाला कंडोम तक, सुबह की चाय से लेकर तो ऑफिस के लिए गाडी में पेट्रोल भरवाने तक हर वस्तु पे सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समाज भी टैक्स भरता है. फिर क्या वजह है मोदी सरकार मुस्लिमो से जुड़े हुए हर मसले पे सब्सिडी ख़त्म करती जा रही है और हिन्दू समाज के लिए दिए जाने वाले लाभ बढाती जा रही है. क्या वजह है माइनॉरिटी फण्ड को सरकार कम से कम करती जा रही है. किसी भी मुस्लिम मोहल्लो में ज़रूरी संसाधनों का अभाव रहता है.  जिसमे मुख्यता शामिल है लाइट, पानी, स्कूल. उसके बजाये मुस्लिम अक्सरियत वाले इलाको में सरकार शराब खाना और पुलिस स्टेशन पहले खोलती है.  हज सब्सिडी ख़त्म की लेकिन हिन्दू समाज को मिलने वाली सब्सिडी तो चालू है तो क्या ये मुस्लिम टैक्स पयेर्स की गाडी कमाई का दुरुपयोग नहीं है.  लेकिन हज सब्सिडी बंद कर दी गई.  हमें गर्व है की हम हमारे मज़हबी कार्यों को अपने बल बूते पे अंजाम दे सकते है. मोदी सरकार ने हज सब्सिडी बंद कर के भारत और विश्व को दिखाना चाहा के मुस्लिम सिर्फ सरकार के द्वारा दिए हुए लाभ के बल पे ही अपने तीर्थ कर सकते है.  लेकिन ये क्या यहाँ पर भी मोदी सरकार को झटका लगा पिछले साल की तुलना में इस साल ज़्यादा हाजिओं ने फार्म भरा था और रिकॉर्ड हज यात्री सऊदी गये.    सभी धार्मिक यात्राओं में से सिर्फ हज को छोड़ के अभी भी सरकार इन धार्मिक यात्राओं पे सब्सिडी देती है.

हज सब्सिडी:  हज सब्सिडी बंद और इस साल पहली बार मुस्लिम समाज ने बगैर हज सब्सिडी के हज यात्रा की और २०१७ की तुलना में भारत से इस साल रिकॉर्ड नंबर में मुस्लिम लोग हज पे गये.  ये बात खुद माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्ट्री ने अपने पूना में दिए हुए वक्तव में तस्लीम की है. की हज सब्सिडी बंद करने के बाद इस साल भारत से रिकॉर्ड हज यात्री सऊदी गये.

लेकिन हिन्दू समाज के लिए तो सब्सिडी चालू है. फिर क्या ये मुस्लिम समाज के फंडामेंटल राइट पे हमला नहीं है. देखिये किन किन यात्राओं के लिए हिन्दू समाज को सरकार सब्सिडी देती है और मुस्लिम समाज के यह हज पे जाने की सब्सिडी पे इतना हूँ हल्ला क्यों.

उत्तर प्रदेश: कैलाश मानसरोवर के लिए एक लाख रुपये
उत्तर प्रदेश सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा और सिंधु दर्शन यात्रा के लिए सब्सिडी देती है. सिंधु दर्शन के तहत १०,००० रुपये और कैलाश मानसरोवर के लिए एक लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है. पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ५० हजार की सब्सिडी मिलती थी, पिछले साल योगी सरकार ने इसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया.

दिल्ली: वरिष्ठ नागरिकों की एसी बस में तीर्थयात्रा
दिल्ली सरकार ने भी हाल में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत हर विधान सभा से १००० वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त तीर्थयात्रा कराई जाएगी. इन  नागरिकों को एसी बसों से मथुरा, वृंदावन, आगरा, नीलकंठ, हरिद्वार, वैष्णोदेवी जैसे कई तीर्थस्थानों की यात्रा कराई जाएगी. इसके तहत रहने, खाने और यात्रा का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी.

मध्य प्रदेश: विदेश यात्रा पर भी सब्सिडी
साल २०१२ में राज्य में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना शुरू की गई थी. इसके तहत सीनियर सिटीजन को मुफ्त में तीर्थस्थलों की यात्रा कराई जाती है और हर साल करीब एक लाख लोगों को इसका लाभ मिलता है.  यही नहीं मध्य प्रदेश सरकार विदेश में तीर्थयात्रा पर भी ३०,००० रुपये तक सब्सिडी देती है. इनमें मानसरोवर (चीन), ननकाना साहिब, हिंगलाज माता मंदिर (पाकिस्तान), अंगकोर वाट (कम्बोडिया), सीता माता मंदिर और अशोक वाटिका (श्रीलंका) शामिल हैं.

उत्तराखंड: वरिष्ठ नागरिकों के लिए तीर्थाटन
साल २०१४ में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 'मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ स्कीम' शुरू की थी, जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को राज्य में ही गंगोत्रा, यमुनोत्री, बद्रीनाथ, आदि स्थानों की यात्रा कराई जाती है. यही नहीं राज्य का संस्कृति विभाग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भी ३०,००० रुपये तक की सब्सिडी देता है.

हरियाणा: सिंधु दर्शन यात्रा का लाभ
राज्य की मौजूदा बीजेपी सरकार ने हर साल ५० वरिष्ठ नागरिकों को सिंधु दर्शन यात्रा (१० हजार की सब्सिडी) और ५० अन्य तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सब्सिडी (५० हजार रुपये) देने की योजना शुरू की है.

राजस्थान: प्लेन से तीर्थयात्रा की सुविधा
साल २०१३ में कांग्रेस सरकार ने राज्य के वरिष्ठ नागरिकों की तीर्थयात्रा के लिए रेलवे किराया वहन करने की योजना शुरू की. इस योजना का हजारों लोग फायदा उठा चुके हैं. लेकिन पिछले साल बीजेपी सरकार ने इसमें ६५ साल के ऊपर के लोगों के हवाई जहाज किराया देने की भी शुरुआत की. इस योजना पर राज्य सरकार अब तक १२५ करोड़ रुपये से ज्यादा रकम खर्च कर चुकी है.

गुजरात: श्रवण तीर्थदर्शन योजना
गुजरात में साल २००१ से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा योजना चल रही है. इस साल वहां सिंधु दर्शन और श्रवण तीर्थदर्शन योजना भी शुरू की गई है. कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए २३,००० रुपये की सब्सिडी दी जाती है.

कर्नाटक: चार धाम की यात्रा पर सब्स‍िडी
कर्नाटक के लोगों को उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा के लिए २०,००० रुपये की सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा मानसरोवर यात्रा के लिए भी ३०,००० रुपये की सब्सिडी दी जाती है. साल २०१७ में राज्य के पर्यटन विभाग ने पुनीत यात्रे नामक एक योजना शुरू की है जिसके तहत सभी समुदायों के लोगों की तीर्थयात्रा पर २५% तक सब्सिडी दी जाती है.

तमिलनाडु: येरुशलम की यात्रा के लिए सब्सिडी
तमिलनाडु में तो ईसाइयों को येरुशलम की यात्रा के लिए भी सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा हिंदुओं को मानसरोवर और मुक्तिनाथ यात्रा के लिए सब्सिडी मिलती है. येरुशल के लिए २०,००० मुक्तिनाथ के लिए १०,००० और मानसरोवर के लिए ४०,००० रुपये की सब्सिडी दी जाती है.

ओडिशा: वरिष्ठ नागरिकों का ख्याल
राज्य सरकार ने साल २०१६ में वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना शुरू की. इसके तहत बीपीएल श्रेणी के वरिष्ठ नागरिकों को १०० फीसदी और गैर बीपीएल यात्रियों को उम्र के मुताबिक ५० से ७० फीसदी तक की टिकट में रियायत दी जाती है.

असम: बस यात्रा पर सब्सिडी
असम की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने साल २००४-०५ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए धर्मज्योति योजना शुरू की. इसके तहत विभिन्न तीर्थस्थलों की बस यात्रा पर ५० फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है. मौजूदा बीजेपी सरकार ने साल २०१७ में पुण्यधाम यात्रा योजना शुरू की. इसके तहत ३,००० तीर्थयात्रियों को हर साल जगन्नाथ मंदिर, वृंदावन, मथुरा और वैष्णोदेवी की यात्रा कराई जाती है.

ये तो हुई मोदी सरकार की भेदभाव वाली राजनीति के किस तरह धार्मिक आधार पे मोदी सरकार जनता के टेक्स के ऊपर भी भेद भाव कर रही है. क्या मुस्लिम समाज मोदी सरकार को टैक्स नहीं देता है क्या सिर्फ हिन्दू समाज ही टैक्स देता है. तो क्या वजह है मुस्लिम समाज के टैक्स का दुरुपयोग कर के हिन्दू समाज के धार्मिक कार्यों में लगाया जाए. बात सिर्फ यहाँ पे ख़त्म नहीं होती है,  अब तो सरकारी ख़ज़ाने से संघ, बीजपी, और आतंकवाद से जुड़े हुए लोगो की प्रतिमाएं बनने लगी है.  अब जो सरकार जनता के टैक्स का पैसा अपने पूर्वजो की प्रतिमा बनवाने में लगाती है वो क्या देश के बारे में विचार करेगी. 

दूसरी तरफ हमारा पडोसी देश पाकिस्तान वहां के नव निर्वाचित प्रधान मंत्री ने प्रधान मंत्री महल में रहने से मना कर दिया है. वो एक साधारण से मंत्री के जैसे मिनिस्टर एन्क्लेव में रहेंगे. इतना ही नहीं वो प्रधान मंत्री महल को एक विश्विद्यालय के रूप में इस्तेमाल करेंगे और पूर्व में प्रधान मंत्रिओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तमाम गाडिओं की नीलामी करेंगे, और उस पैसे को देश की जनता के भलाई के कामो में लगाएंगे.  इतना ही नहीं पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने अपना ताम झाम और वी.आई.पी. स्टेटस भी कम करने का निर्णय लिया है, उन्होंने पहले के प्रधान मंत्रिओं की तरह नौकरों की फौज इस्तेमाल करने के बजाय अपने नौकर चाकर और सरकारी अमले में कमी करने का फैसला लिया है. इससे देश के ऊपर जो अतिरिक्त बोझ प्रधान मंत्री के खर्चे का पड़ता था वो कम होगा. 

सही देखा जाए तो दानिशमंदो, पत्रकारों और प्राध्यापकों का यही काम होता है की सरकार को सही दिशा और मार्ग दर्शन करवाए.  इस पत्रकार ने मोदी के प्रधान मंत्री बनने के बाद उनको भी बोहोत से सुझाव दिए थे, केजरीवाल के मुख्य मंत्री बनने के बाद सुझाव दिए थे. और समय समय पे ये पत्रकार राजनेताओं को अपने लेखो के ज़रिये सुझाव देता रहता है. दिल्ली वाले और कांग्रेस वाले ने इस पत्रकार के सुझाव को अपना लिया लेकिन मोदी तो अहंकारी निकले जो अपने मंत्रिओं, संत्रिओं और खुद के खर्चे में कमी करने के बजाये  जनता से ही कुर्बानी मांगने लगे, और जनता से गैस सब्सिडी त्यागने की प्राथना करने लगे जिसके ऊपर इस पत्रकार ने कई लेख लिखे हैं.   हर बार जनता ही काहे को कुर्बानी दे, क्या मंत्रिओं संत्रिओं को अपने आपको मिलने वाली सब्सिडी नहीं त्यागना चाहिए.  क्या ये देश मंत्री, संत्री, सांसदों और विधायकों का नहीं है.  इस पत्रकार के लेखों का असर भारत की सरकार पे तो नहीं पड़ा लेकिन पडोसी देश के प्रधान ने लपक लिया.

इतना ही नहीं आतंकवाद, ज़ात पात, अन्याय, अल्पसंख्यकों के हुकूक के ऊपर जो लेख इस पत्रकार ने भारत की सरकार के लिए लिखे थे उसको अमली जामा पहनाया पाक की सरकार ने और यही वजह है के आज पाक दुनिया की उभरती हुई ताक़तों में से एक गिना जाने लगा है और उसकी साख अंतराष्ट्रीय समुदाय के सामने बेहद सुदृढ़ हुई है यही वजह है की कश्मीर पे मानवीय हक़ के मसले पे विश्व की संसद यूं .एन. में पाकिस्तान के संकल्प को इख्तयार किया जाता है और दोहराया जाता है वही भारत के सभी तर्कों को नकार दिया जाता है.  क्योंकि अंतराष्ट्रीय बरादरी देखती है के हम हिन्दू मुस्लिम पे ही अटके हुए हैं.  इतिहास में किया हुआ उसको बदलने के पीछे पड़े हुए है, रेलवे स्टेशन, शहर और रोड का नाम बदलने में लगे है.  इन सब बातों से देश की जनता का क्या भला हुआ आज भारत की साख आतंकवाद और उसके ऊपर सरकार की उदासीनता की वजह से बेहद खराब हुई है. 

  
English version of this Article

This is Islam and Muslims
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/01/20/this-is-islam-and-muslims/ 

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