हरयाणा में ईद मानाने आये मुस्लिम शख्स की पीट पीट के हत्या. इस हत्याकांड में हिन्दू आतंकी विंग की महिला ब्रिगेड दुर्गा वाहिनी की सदस्य भी शामिल.
जिस तरह से ब्रिटिश सरकार ने मुस्लिम उलेमाओं को फ़ासी की सजा सुना कर उनकी आज़ादी की आवाज़ को दबाना चाहा था. लेकिन आज़ादी के परवानो को फिर कहाँ अपनी मौत की परवाह होती है वो तो तब तक जद्दो जेहद करते रहते है जब तक मंज़िल हासिल नहीं हो जाती. उसी तरह अब भारत सरकार आज़ादी और एक बटवारे की आवाज़ को कुचलना चाहती है, और मुस्लिम दानिशमंदो, मौलानाओ और पत्रकारों की आवाज़ को सरकार अपनी दमनकारी निति के तहत कुचलना चाहती है.
जिस तरह से ब्रिटिश सरकार ने मुस्लिम उलेमाओं को फ़ासी की सजा सुना कर उनकी आज़ादी की आवाज़ को दबाना चाहा था. लेकिन आज़ादी के परवानो को फिर कहाँ अपनी मौत की परवाह होती है वो तो तब तक जद्दो जेहद करते रहते है जब तक मंज़िल हासिल नहीं हो जाती. उसी तरह अब भारत सरकार आज़ादी और एक बटवारे की आवाज़ को कुचलना चाहती है, और मुस्लिम दानिशमंदो, मौलानाओ और पत्रकारों की आवाज़ को सरकार अपनी दमनकारी निति के तहत कुचलना चाहती है.
अभी हाल ही में १५ अगस्त के दिन उत्तर प्रदेश के एक मौलाना को गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने वो गाना नहीं गाया जिसके कुछ अलफ़ाज़ इस्लाम में हराम है और जिसकी सवेधानिक मान्यता पे भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं.
जो शोलोक एक मुसलमान की इस्लामिक शिक्षा से टकराते है वो है "भारत भाग्य........." और एक मुसलमान का मानना है ना सिर्फ उसका बल्कि समूची कायनात के हर फर्द के भाग्य का विधाता सिर्फ एक महाशक्तिमान है जिसका कोई रूप नहीं कोई आकार नहीं होता.
अब अगर कोई ज़मीन के एक टुकड़े को अपने भगय का विधाता बोले तो वो उसके भाग्य का तो हो सकता है परन्तु एक मुसलमान के भाग्य का हरगिज़ नहीं.
मीडिया में ख़बरों की माने तो उन मौलाना साहब को गिरफ्तार किया गया है. उनकी गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश का एक मुनाफ़िक़ मंत्री कहता है हमने उस मौलाना को गिरफ्तार किया जिसने राष्ट्र गान का अपमान किया था और उस मदरसे की मान्यता रद्द की. में उस मुनाफ़िक़ से कहना चाहता हूँ अपमान उसका होता है जिसका कोई मान हो, दूसरी बात जाइये में नहीं पड़ता वो गाना क्या करते आप. मेरी गर्दन पे छूरी भी रख दोगे तब भी नहीं पडूगा वो गाना क्या करते आप मेरा. करिये मेरी मान्यता रद्द. प्रेस कौंसिल में कहिये की मेरी मान्यता रद्द हो.
जब ज़ुल्म हद से बढ़ जाता है और इंसान की सहनशक्ति जवाब दे देती है तो दो बाते होती है या तो जिसके ऊपर ज़ुल्म हो रहा है वो बर्दाश्त नहीं कर पाता और मर जाता है और दूसरी उस ज़ुल्म के खिलाफ हाथ उठता है प्रतिकार करता है बगावत करता है.
जब ज़ुल्म हद से बढ़ जाता है और इंसान की सहनशक्ति जवाब दे देती है तो दो बाते होती है या तो जिसके ऊपर ज़ुल्म हो रहा है वो बर्दाश्त नहीं कर पाता और मर जाता है और दूसरी उस ज़ुल्म के खिलाफ हाथ उठता है प्रतिकार करता है बगावत करता है.
अभी हाल ही में हरियाणा के फरीदाबाद के चांदपुर गांव में ईद-उल-अजहा मनाने आए एक शख्स मोहम्मंद ताहिर की पीट पीट के लीचिंग कर दी और उनकी लाश पेड़ से लटका दी. वह बुधवार को ईद मनाने के लिए गांव में आये थे. ताहिर ईद मनाने के लिए वह २२ अगस्त को अपने गांव में परिवार वालों के पास आ गए थे. परिजनों ने बताया कि ईद की नमाज अदा करने के बाद जैसे ही वह मस्जिद से बाहर आये, तो कुछ लोगो ने उनपे हमला कर दिया जिसमे कुछ युवतियां भी शामिल थी और अगर हरियाणा में ईद के रोज़ खून बहाया तो जान से मारने की धमकी भी देने लगे.
बुधवार शाम के लगभग आठ बजे ताहिर का शव गांव के बाहर एक पेड़ पर लटकता पाया गया. मृतक के परिजनों का आरोप है कि उन्ही लोगो ने ही ताहिर की हत्या कर शव को पेड़ पर लटका दिया. वहीं, मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है युवतियों का ताल्लुक हिन्दू आतंकी महिला विंग दुर्गा वाहिनी या किसी और जानवर बचाव संस्था से होगा. जब कभी भी हिन्दू आतंकी किसी मुस्लिम, दलित या किसी और पुरुष को जान से मारने की योजना बनाते है या उससे किसी प्रकार का बदला लेना चाहते है तो दुर्गा वाहिनी की महिला आतंकी विंग को सदा ही अपने साथ रखते है ताके अगर बात हाथ से निकल जाए तो महिला को आगे से कर दे और पुरुष वर्ग
के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दायर कर के हम साफ़ बहार निकल जाए.
आज २०१४ के बाद से हर मुस्लिम त्यौहारों पे किसी ना किसी मुस्लिम की हत्या की खबर आती है. २०१७ में हरयाणा में भेसा और उत्तर प्रदेश में बकरा कुर्बानी के लिए ले जा रहे मुस्लिम युवको की रोहंगिया मुस्लिम बोल के हत्या कर डाली थी. हत्यारों की दलील थी की रोहिंगिया देश के संसाधनों को खा रहे है और हम उनको भारत में किसी भी प्रकार का त्यौहार नहीं बनाने देंगे. अब इस हत्याकांड के बारे में भी कोई मन घडन्त दलील दे डालो. देश तुम्हारा है सरकार तुम्हारी है पुलिस तुम्हारी है कानून तुम्हारा है न्यायलय तुम्हारे घर की रखेल है जो भी बोलोगे सही मान लिया जाएगा और तुम्हारे को हत्या के दोष से बरी कर दिया जाएगा.
अब मुस्लिम मौलानाओं, दानिशमंदो और धर्म गुरुओं को आगे आना होगा और इस ज़ुल्म के खिलाफ एक जुट हो कर आवाज़ बुलंद करनी होगी. कब तक मुसलमान हिन्दू जनता के हाथों लीचिंग का शिकार होते रहेंगे. मुस्लिम संसद अंधे, बेहरे और गूंगे हो गए है और जो बोलते है वो सिर्फ सविधान और कानून की बात बोलते हैं और उसकी ही दुहाई देते हैं. अलगाव की आवाज़ ज़ुल्म के खिलाफ बगावत की आवाज़ आप को ही बुलंद करनी होगी. और मुसलमानो में इस ज़ुल्म के खिलाफ एक और मुल्क मांगने के जज़्बे को तैयार करना होगा.
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