Monday, 16 April 2018

राजनीति की भेंट चढ़ गया इन्साफ और हो गया क़त्ल


जैसा की आमतौर पे एक धारणा बन गई है के आतंकवादीओ को बीजेपी के राज में सजा मिलना ना मुमकिन है और उनको सत्ताधारी सरकार का समर्थन हासिल है. एक बार फिर से ये बात सिद्ध हो गई के २०१४ के बाद इन्साफ के मंदिरों पे अब भगवा कब्ज़ा है.  जिस  मंदिर में जहाँ खुद हिन्दू धर्म के हिसाब से भगवन विरजमान है उस आस्था के मंदिर को कठुआ में इन भगवाधारिओ ने अपने कुकर्मो से गन्दा किया तो न्याय का मंदिर किया हैसियत रखता है. आज एनआईए की विशेष अदालत ने साल २००७ के हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट से जुड़े मामले में असीमानंद समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.   NIA कोर्ट में इन आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं रख पाया.

१८ मई २००७ को जुमे की नमाज के दौरान ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में ९ लोगों की मौत हो गई थी और ५८ लोग घायल हुए थे. स्थानीय पुलिस की शुरुआती छानबीन के बाद मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था.
इस धमाके में स्वामी असीमानंद समेत कुल १० लोगों पर आरोप लगा था, एक आरोपी की मौत हो चुकी है.  ये थे केस में १० आरोपी

1.   स्वामी असीमानंद
2.   देवेंदर गुप्ता
3.   लोकेश शर्मा (अजय तिवारी)
4.   लक्ष्मण दास महाराज
5.   मोहनलाल रातेश्वर
6.   राजेंदर चौधरी
7.   भारत मोहनलाल रातेश्वर
8.   रामचंद्र कलसांगरा (फरार)
9.   संदीप डांगे (फरार)
10. सुनील जोशी (मृत)
इस मामले में ६४ गवाह कोर्ट के सामने मुकर गए, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और झारखंड के मंत्री रणधीर कुमार सिंह भी शामिल हैं.

स्वामी असीमानंद ने २०११ में मजिस्ट्रेट को दिए इकबालिया बयान में स्वीकार किया था कि अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस और कई अन्य जगहों पर हुए बम ब्लास्ट में उनका और कई अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों का हाथ है. हालांकि बाद में असीमानंद अपने बयान से पलट गया और कहा कि उसने पिछला बयान NIA के दबाव में दिया था.

यहाँ पे अब प्रश्न यही हे के पिछला बयान उसने दबाव में दिया था या बीजेपा को सत्ता मिलते ही उसको फिर आज़ाद हवा में गुमने की ललक ने झूठा बना दिया.  फिर ये एक असीमानंद का केस नहीं है जिसमे आतंकवादी बरी हुए बल्कि लगभग ब्लास्ट के सभी मामलो में २०१४ के बाद सारे आतंकवादी बरी हो गए. चाहे वो आतंकी महिला प्रज्ञा हो असीमानंद हो कर्नल प्रोहित हो या वंज़ारा हो या माया कोडनानी हो.  

शक करने की भरपूर गुंजाइश है ये कैसे मुमकिन है के कम से कम २०० से ज़्यादा हिन्दू आतंकी २०१४ के बाद या तो बरी कर दिए गए या उनको बेल मिल गई.  और हर बार एक सामान स्टोरी हमें पुलिस ने धमकाया था हमें सी.बी.आई. ने धमकाया था हमारे ऊपर एन.आई.ऐ. ने दबाव बनाया.

चलो मान लेते है के असीमानंद और अन्य १० इस ब्लास्ट में शामिल नहीं थे.  फिर कौन था इन ब्लास्ट का मास्टर माइंड किसने किये ये ब्लास्ट,  क्योंकि ब्लास्ट तो हुए है और बेगुनाह जाने भी गई है. अगर असीमानंद मुजरिम नहीं है तो उसको बरी करते समय एन.आई.ऐ. को असली मुजरिम को पकड़ के न्यायलय के समक्ष हाज़िर करने का हुकुम काहे को नहीं दिया. मतलब साफ़ है, नज़र आ रहा है.  यहां पर भी हत्या हुई है न्याय की हत्या इन्साफ की हत्या. 

खाकी आतंकी वंज़ारा के केस में न्यायालय बोलता है उसके खिलाफ प्राइमा फेसि केस ही नहीं बनता है, तो किसके खिलाफ केस बनता है. एनकाउटर तो हुआ था फिर किस ने किया था सोरबुद्दीन, इशरत जहाँ का एनकाउंटर, कौन था उनकी जान लेने वाला.  

ठीक है बीजीपी अपनी हठदर्मी से आतंकवादीओ को निकालती रहे लेकिन महाशक्तिमान उन बेगुनाहो की जान का बदला लेगा जो उस ब्लास्ट में और समूचे ब्लास्ट में गई जो हिन्दू आतंकवादीओ ने किये थे. हर बार की तरह ये पत्रकार फिर से दोहराना चाहेगा बीजेपी हिन्दू समाज की रक्षक नहीं है बल्कि अपने कार्यकर्ताओ, आतंकवादीओ और उस पार्टी से जुड़े हुए लोगो के लिए ही रक्षक है. अगर असीमानंद और अन्य को न्यायालय ने बरी किया और अगर वो दोषी होंगे तो उपरवाले का अज़ाब आएगा. और ये बात भी बताने की नहीं के बीजेपी के सत्ता में आने के बाद शायद भारत में सबसे ज़्यादा दुर्घटनाये हुई होगी. लेकिन बीजेपी को क्या कोई निर्दोष मरता है तो मरता रहे हमें तो हमरे कार्यकर्ताओ और सहानुभूति वाले लोगो को बचाना है. 

जिस मासूम बच्ची को इन्साफ दिलाने के लिए आज समूचा भारतीय समाज एक जुट हो कर खड़ा हो गया है समय बीतते वो सब भी बरी हो जायेगे. और जैसे जैसे समय बीतेगा वैसे वैसे जनता भी सब कुछ भूल जायेगी. आज मामला गर्म है तो जनता का आक्रोश दिख रहा है परन्तु जब सब कुछ ठंडा हो जाएगा तब ये बलात्कारी भेड़िये बहार जायेगे. जैसे की आतंकवादी बहार गए.

हाल ही में आतंकी असीमानंद और ९ अन्य को न्यायलय ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट से बरी कर दिया, जिसकी वजह से देश की न्याय विवस्था में भूचाल आना लाज़मी था.  अभी देश की जनता बलत्कारिओ को सजा दिलवाने की कवायत में लगी थी तभी जेल गए आतंकवादीओ को रिहाई मिल गई.  क्या ये देश की जनता के साथ धोका नहीं है.  यहां ये पत्रकार न्याय की इस हत्या पे स्पस्ट रूप से कहना चाहता है ये राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी की वजह से हुई हत्या है.   बीजेपी को कांग्रेस के समय पकडे गए सभी मुजरिमो और अतक्वदिओ को रिहा करवाना था जिसका सीधा सीधा फायदा आगामी चुनाव में लिया जा सके.  हिन्दुओ को कहा जा सके की कांग्रेस ने आपके अपने साधु संतो को गलत तरह से गिरफ्तार किया लेकिन हमने उनको जेल से रिहा करवाया.  और मुस्लिम सहानुभूति ये कह के ली जा सके के हमने आपके साथ इन्साफ किया रांची में जिस गौ रक्षक ने अलीमुद्दीन नामक व्यक्ति की हत्या की हमने उन लोगो को ६ महीनो के अंदर सजा दिलवाई. यहाँ तक के हमने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता को भी नहीं बक्शा हम इन्साफ पसंद पार्टी है और इन्साफ पे यकीन रखते हैं. 

English Version

Murder of Democracy, Murder of justice what is left in Saffron India (Ram Rajiya).autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/17/mur

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