Sunday, 15 April 2018

राम का गोरख धंदा में क्या जानू रे


सान्जी राम कठुआ में मुस्लिम बच्ची की सामूहिक बलात्कार का मुख्य हिंदू अपराधी और मास्टरमाइंड है जिसकी वजह से राम के व्यक्तित्व पर कई सवाल उठते हैं कि क्या वह वास्तव में मर्यादावादी-पुरुषोत्तम थे या आतंक की मानसिकता थी और वह उसके भक्तों को आतंक, बलात्कार, हत्या, दंगों को सिखाता है.

राम एक ऐसा नाम है जिसके लिए हिन्दू समाज सम्मान के साथ सर झुकाते है क्योंकि वे उनके पुरुषोत्तम और मर्यादा के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। लेकिन कुछ लोगों ने राम के नाम को बदनाम और अपमानित किया है, और जिसकी वजह से अन्य समुदाय के लोगों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के दिमाग में बहुत गलत संदेश जा रहा है क्या राम ने शांति की या आतंकवाद की शिक्षा दी थी। क्योंकि हर अपराधी, बालात्कारी, आतंकवादियों, गुंडे, मवाली, धोखाधड़ी, पाखण्डिओ के नाम में राम होता है। इन आतंकवादियों या गुंडों की लंबी सूची है रामपाल, आसाराम, रामरहीम, रामदेव, संजीराम

दूसरे, काल्पनिक राम जो एक हेलीकाप्टर से सीता मैया और सीएम योगी के साथ अयोध्या पर उतरा था, बाद में एक लड़की के साथ बलात्कार के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है। इस प्रकार की घटनाएं और उदाहरण राम के चरित्र को समझने के लिए पर्याप्त हैं, के वह दुर्भावनापूर्ण हो सकता है। इस तरह की घटनाएं विश्व भर में और भारत के हिंदुओं को एक ज़ोरदार थप्पड़ हैं जो इस्लाम के पैगम्बर और मुसलमानो को अपने व्यगात्मक और ओछी सोच के ज़रिए लिखे हुए लेखो से नीचा दिखाने की कोशिश करते थे और हर उस हमले और मसले को मुस्लिम समाज से जोड़ देते थे जिसमे उनकी कुछ भागीदारी नहीं होती थी। वास्तव में, ये सभी हमले मुसलमानों से झूट और गलत तरीके से लंगूर मीडिया द्वारा मुस्लिमों से जोड़ के देखे जाते थे। एक सीधा हमला भी मुस्लिम समाज से जोड़ दिया जाता था। इस पत्रकार ने अपने फेसबुक पेज Autonomous Journalist पर राम आतंकवादी का एक वीडियो साझा किया है जो हाल ही में दिल्ली में मस्जिद पर हमले का है। वीडियो में मास्टर माइंड आतंकवादी राम ने अपने शिष्यों को मस्जिद पर हमला करने के लिए उकसाया, जैसे ही जुलूस मस्जिद के सामने वाले दरवाज़े पे पहुँचता है आतंकवादी राम और उसके शिष्यों ने ज़ोरदार फटाके जलाये और चिल्लाना शुरू किया जय जय......

https://www.facebook.com/rajiv.personal/videos/10160230720030176/?t=3

इस पत्रकार ने अपने २९ मार्च २०१८ के एक लेख आतंकी के राम भक्त में सही तरीके से इनकी वियख्या की है या तो स्वयम राम के नाम आतंकवादी रवैया में छिपा है या उनका राम उन्हें आतंकवाद, अपराध, बलात्कार, हत्या, लुभाने आदि की शिक्षा देता है।

भाजपा को राम के सबसे बड़े अनुयायी के रूप में माना जाता है, यहां पर भी इसकी संस्कृति, पाखंड और अन्याय राम के चरित्र पर संदेह दिलाते है कि वह मर्यादावादी और पुरुषोत्तम होगा। निर्भया प्रकरण पर नीरस, उद्दंड महिला स्मुर्ती ईरानी वीडियो में यूपीए की खूब आलोचना कर रही है और वर्त्तमान के हालात पे उसकी चुप्पी स्मृती के पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण है।

देखिये कि वह उत्तेजना के साथ कितनी गर्म गई है और अपने उत्साह की लालसा को संतुष्ट करने के लिए खुद को रोक नहीं पाती है, यहां तक ​​कि उसने अपनी लालसा की संतुष्टि के लिए संसद में गर्म शब्दों का प्रयोग कर अपनी उत्तेजना निकाल कर अपने आपको संतुष्ट किया। यह पत्रकार बीजेपी की पाखंडी संस्कृति पर बहुत निराशावादी है, तभी उसने सभी बीजेपी वालों को पाखंडी नाम दिया है। यदि स्मृति की पीड़ा और दर्द एक महिला के लिए वास्तविक थी तो सभी महिलाओं के लिए एकसमान होना चाहिए, यदि उन्होंने यूपीए की निर्भया काण्ड की आलोचना की तो उन्नाव और कठुआ के बलात्कार में पूर्ण चुप्पी क्यों ली और एनडीए की आलोचना क्यों नहीं की? ऐसा लगता है कि मोदी ने २०१४ के चुनाव के बाद गुलाब जामुन  (एक प्रकार का स्वादिष्ट स्वीट जिसको चूसते समय किसी प्रकार की हड्डी या सख्ती महसूस नहीं होती) के रूप में जो मिठाई पेश की होगी, वह अब भी गुलाब जामुन को मू के अंदर रख के आनंद महसूस कर रही है। यही वजह है कि वह अपनी सरकार के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोल सकी क्योंकि उसके मुंह पर पहले से ही कब्जा है।

मोदी ने १२वीं फ़ैल ४५ साल से अधिक उम्र की महिला में ऐसा क्या देखा जो उन्हें कैबिनेट रैंक दे डाली? यह महिला स्मृति इस पत्रकार से कांग्रेस के लिए अपनी आलोचना और उसके बाद तब के प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को भारी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और मुद्रास्फीति के मामले में पहले भी पिटाई खा चुकी है.  यूपी के सामान्य निकाय में भाजपा की अनैतिक जीत को, उसने योगी सरकार के ८ महीने के काम को जीत ज़िम्मेदार बताया था,  लेकिन गोरखपुर और फूलपुर पर चुप्पी को धारण कर ली। यूपी के जनरल बॉडी के चुनाव के बाद इस पत्रकार के लेख देखिये इस हार का ठीकरा किसके सर पे फोड़ू और अंगूर खट्टे में नहीं खाती   और स्मृति को किये हुए इस पत्रकार के ट्वीट

स्मृति जी इस हार को भी कुछ नाम दे दो आपने उत्तर प्रदेश के निकाय जीत को योगी के साथ मिल के ८ महीनो के पैदा किये हुए विकास को जिम्मेदार बताया था. अब इस हार को उस रात के गुनाह का विनाश बता दो जिसमे आप से और योगी जी से गलती हुई

यह पत्रकार २०१० में लेखन क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ संघ-भाजपा, लंगूर पत्रकारों और झूठी रिपोर्टों पर इस्लाम और मुसलमानों के विरूद्ध जहर उगलने वाले लोगों के पाखंड को उजागर करने का मकसद ले कर आया था। जुबेर को इस ज़हरीली और पाखंडी मानसिकता के तहत दो बार अपनी नौकरी से हाथ धोने पड़े वर्ष १९९२ में भाजपा और हिंदू कट्टरपंथियों की वजह से ज़ुबर ने पहली बार अपनी नौकरी खो दी थी। दूसरी बार लंगूर पत्रकारों द्वारा मुसलमानों पर झूठी और नकली रिपोर्टों के कारण किए गए हर हमले को मुसलमानों से जोड़ने की वजह से जुलाई २००७ में दूसरी नौकरी जाती रही। उस समय ही उसने कसम खाई थी के वो चुप नहीं रहेगा सच्ची और झूटी खबरों पे हमेशा सच्ची बात जनता के सामने ला कर रहेगा। 

२००७ के बाद ज़ुबर किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ जुड़ के आनंदित जीवन व्यतीत कर सकता था, लेकिन उन्होंने लेखन के छेत्र में आने का फैसला किया। वर्ष २०१२ में, ज़ुबर के पास हिंदुस्तान के एक इंग्लिश प्रतिष्ठित अखबार से प्रस्ताव आया, जिसमे उन्होंने कठोर शब्दों का इस्तेमाल ना करने और सरकार के कृत्य को लेकर आलोचकों की भूमिका का त्याग करने की शर्त के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह एक गुलाम की हैसियत से काम नहीं करना चाहता था। दूसरा प्रस्ताव २०१६ में इंटरनेशनल पब्लिशिंग ग्रुप अमेरिका से आया थाI उनका भी प्रस्ताव जुबेर ने ठुकरा दिया क्योंकि उनकी भी शर्त वैसी ही थी जैसी की पहले वाली अत्यधिक कठोर शब्दों का चयन ना करने वाली, दोनों पब्लिशिंग हाउस मेरी इच्छा के अनुसार भुगतान करने के लिए तैयार थे। 

२०१० से २०१८ के बाद से काफी कुछ चीजें सही रास्ते पर आ गईं हैं और लंगूरों द्वारा मुसलमानों को लगाया गया दाग अब गायब हो रहा है और हिंदू आतंकवादियों के रूप में वास्तविक अपराधियों का खुलासा हो रहा है, फिर भी अभी लंबा रास्ता तय करना है।

ये देखिये एक और रामभक्त साहेब पाखण्डिओ, झूटो के सरदार जून २०१४ के पहले चुनावी सभाओ में जनता के सामने ५० दिनों का वादा करते हुए और दिसंबर २०१४ तक की समय सीमा खुद ही ते करते हुए. परन्तु सत्ता की मलाई खाने के बाद समूचे वादे जुमलों में बदल गए और अब ये आखिर दिसम्बर है क्योके अगले साल मार्च में फिर चुनाव की घोषणा होगी और साहेब फिर किसी नए जुमले के साथ हाज़िर होंगे. 

अभी हाल ही में बाबा साहेब के नाम के साथ राम का नाम जोड़ने के पीछे की सियासत भी शायद ही कोई समझ पाया होगा उसके पीछे की बीजेपी की सियासत बाबा साहब को अपने जैसा पाखंडी राम भक्त दिखाना है और जैसे वो राम के नाम पे आतंक मचाते है बीजेपी दिखाना चाहती है के बाबा साहब भी वैसी ही एक विशेष समाज को राम के नाम पे आतंकित करते थे. नहीं तो क्या वजह है के २०१८ में उनके नाम के साथ राम का नाम जोड़ा गया. इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी, केंद्र में भी कई बार बीजेपी की सरकार आई. फिर क्या वजह है की केंद्र में आज ४ सालो से बीजेपी की सरकार होते हुए भी पिछले हफ्ते ही उनका नाम तब्दील किया गया.


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