Friday, 13 April 2018

‘रेपिस्ट बचाओ, बेटी छुपाओ’


जम्मू के कठुआ से उन्नाव तक किस तरह ज़ेहनियत और नारा तब्दील हुआ.

कश्मीर की वादीओ से आने वाली जनवरी की सर्द हवाएं मार्च में जब उन्नाव पहुंची तो गर्म आग उगलने लगी और अब उसकी तपिश महसूस होने लगी है. जम्मू से उन्नाव तक जिस तरह ठंडी हवाएं गर्म आग उगलने लगी उसी तरह से लोगो की ज़ेहनियत और सरकार की नीति भी इंसानियत और महिला वर्ग के लिए उसका धर्म, जाती देख बदलते हुए दिखाई दी. फिर बीजेपी का स्लोगन बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ भी तब्दील होते हुए दिखा जो अब रेपिस्ट बचाओ, बेटी छुपाओ हो गया है.

समाज का कुछ हिस्सा जम्मू के कठुआ सामूहिक अस्मतदरी में बलत्कारिओ के खुल के समर्थन में आ गया, जिस सामूहिक बलात्कार मे हिन्दू जाग्रति के आतंकवादीओ के साथ इस नृशंस हत्या काण्ड और बलात्कार में पुलिस भी शामिल थी.  इन निराधरों ने उस मासूम ८ साल की बच्ची के साथ रेप किया जिसको सेक्स, रेप और जुर्म की परिभाषा भी नहीं मालूम होगी. जम्मू के हिन्दू समाज ने इस समूचे प्रकरण को सी.बी.आई. जाँच  का हवाला दे कर धार्मिक उन्माद भड़काने और साम्प्रदाइक रंग देने की कोशिश की और खुल के बलत्कारिओ का समर्थन किया ओर उन्नाव में योगी प्रशासन बीजेपी के बलात्कारी विधान सभा के सदस्य के लिए सहानूभूति रवैया दिखा रही है.

बिलकुल देश का वो समाज बधाई का पात्र है जो उस बलात्कार और हत्या का विरोध कर रहे है और जम्मू की ८ साल की बच्ची तथा उन्नाव की रेप पीड़िता के हक़ में और बलकारिओ ख़ूनीओं के खिलाफ बोल रहे है. और सरकार से सख्त से बोहोत सख्त सज़ा का ख़ास कर के काठूअ केस में अनुरोध कर रहे है 

जनता की परेशानी उनके चेहरे पे और वक्तव से बीजीपी शासित राज्यों और भारत में महिलाओ के खिलाफ बढ़ते हुए रेप, गेंग रेप, मोलेस्टेशन के ग्राफ को ले कर साफ़ देखि जा सकती है.  कुछ एक तो डर से सिहर उठते है सिर्फ उस भयानक हादसे के बारे में सोच भर के जो जम्मू की ८ साल की बेटी के साथ हुआ. जो पीड़ा उसने सही होगी, वो तो इतनी मासूम थी की बलत्कारिओ से दया की भीक भी नहीं मांग सकी होगी, और वो अनजान होगी अगली तकलीफ के लिए जो उसको दी जाने वाली होगी. समूचे समाज का यही मानना है जो कुछ भी जम्मू की बेटी के साथ हुआ कल हमारे साथ भी हो सकता है अगर चीज़े सूचारू नहीं आई. कुछ ने सिस्टम को और उन लोगों को खूब कोसा जो एक महिला को और मासूम को भी धार्मिक चश्मे से देख रहे है.  ज़्यादातर महिला वर्ग के ये मानना था के आगे से हम अपनी बच्चीओ को पुलिस वालो और बीजेपी के नेताओं से छूपायेगे (बचाएंगे).
सोमवार शाम को जम्मू और श्रीनगर क्राइम ब्रांच ने चार्ज शीट फाइल कर दी, जिसमे कहा गया है बच्ची को अगवाह किया गया और मंदिर के अंदर बंद कर के उसकी हत्या के पहले एक हफ्ते तक उसका शोषण किया.  उसकी निर्शस हत्या और बलात्कार में अभी तक पुलिस ने कुछ ८ बलत्कारिओ को गिरफ्तार किया है. जिसका बाद में खूब साम्प्रदाइक और राजनीतिकरण धूरूवीकरण हुआ. 

उसके परिवार ने बताया के वो एक सौम्य और बहादुर बच्ची थी जिसको अँधेरे और जंगल से कभी डर नहीं लगता था. वो कम बोलती थी लेकिन हर हाल में उसके साथ जो कुछ हुआ अगर वो जिन्दा होती तो उसका बयान ज़रूर करती.  
जम्मू के कठुआ की ८ साल की मासूम बच्ची आसिफा के साथ हुए ज़ुल्म और उसकी हत्या का खौफ अब जनता को डराने लगा है और अब सभी इस तरह की वारदात के खिलाफ एक मंच पे आ रहे है.  गुरूवार को सभी ने एक दुसरे का हाथ थाम के विरोध प्रदर्शन किया जैसा की सोशल मिडिया पे निर्भया काण्ड के बाद देखने को मिला था.

English Version

‘Rapist Bachao, Beti Choopao’
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/13/rap 
 

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