भारत में
जात पात और धर्म की राजनीति २०१४ के बाद खूब ज़ोरो पे है और उसमे फंस रहे है नादान भारतीय
हिन्दू समाज जो ये भी नहीं जानते के उनके साथ घिनोना मज़ाक किया जा रहा है. सरकार सिर्फ
और सिर्फ अगाडी जाती के लिए या जो उसके कारकून और करीबी है उनके लिए ही काम कर रही
है.
हाल ही में
२ अप्रैल को दलित समाज ने उच्चतम न्यायलय के एक निर्णय के खिलाफ भारत बंद का आयोजन
किया था. भारत बंद में कुछ हिंसा भी हुई जो के स्वभाविक है जिसके फलस्वरूप पुलिस को
बल प्रयोग करना पड़ा जिसके चलते कुछ १०-१२ लोगो ने अपने प्राणो की आहूति दी जिसमे मुख्यतः
दलित समाज के लोग ही थे जो पुलिस की गोलिओ का शिकार हुए.
इस भारत बंद
और आरक्षण के विरोध में अब अगाडी जाती के लोगो ने भारत बंद का आयोजन किया और जैसा की
हर बंद में जो कुछ होता है वही सब हुआ. आगज़नी, प्रदर्शन, आरक्षण विरोधी नारेबाजी, निजी
तथा खाजगी संपत्ति को नुक्सान पहुंचना. जनता ने वही सब कुछ किया जो एक जनता करती है
और अपने आक्रोश को प्रदर्शित करने के लिए आगज़नी, नुकसान नारेबाजी लेकिन प्रशासन ने
वो कुछ नहीं किया जो के उसको करना चाहिए. और यहीं पे प्रशासन और सरकार की मंशा पे सवालिया
निशान लगते है, क्या सरकार का नारा सबका साथ सबका विकास सिर्फ चुनावी जुमले बाज़ी थी.
क्या ये सिर्फ पतौले बाज़ी थी और हकीकत से एकदम परे. क्योंकि जब दलित समाज ने बंद का
आयोजन किया था और प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया जिसमे कुछ १० से १२ नौजवानो
को अपने प्राणो की आहूति देनी पड़ी लेकिन जब वही काम अगाडी समाज ने किया तो पुलिस की
तरफ से न कोई गोली चली और ना की किसी की जान गई.
ये कैसी गोली
है जो एक के लिए मीठी है और दूसरो के लिए जानलेवा. क्या पुलिस की गोलिया सिर्फ मुस्लिम और दलित समाज
के लिए ही है. जिसका प्रयोग पुलिस बेखौफ धना धन मुस्लिम और दलित समाज के नौजवानो पे
करती है.
दूसरी मिसाल
अभी हाल ही में रामनवमी में जानलेवा हथियारों के साथ हिन्दू समाज ने जुलूस निकाला जिसमे
मुस्लिम समाज के लिए अत्यंत निम्न दर्जे के गाने चलाये गए और उनके मज़हबी एतेक़ाद के
ऊपर भी हमला किया गया फिर भी पुलिस की गोलिया खामोश ही दिखी. यहाँ तक के उस समूचे घटनाकर्म में एक १६ साल का जामी मस्जिद के इमाम का बेटा भी दँगाईओ के हाथो मारा गया फिर भी पुलिस
की गोलिया ठंडी बियर के मानिंद हिन्दू समाज को सुकून देती रही. हद तो तब हो गई जब हिन्दू
आतंकवादीओ ने पुलिस के ऊपर पेट्रोल बम से हमला किया जिसकी वजह से हालात का जायज़ा लेने
गए और मौके पे मौजूद आई.पि.एस. और इलाके के चीफ का एक हाथ हवा में उड़ गया फिर भी पुलिस
की गोलिया शांत रही.
लेखक के इस
तरह के लेखो और मन में उत्पन्न विचारो का अगाडी समाज या बीजेपी सहानुभूतित लोगो दूआरा
प्रोत्साहित करने के बजाये उसके ऊपर कटाक्ष किया जाता है के आप समाज को बाँट रहे हो
हम सब भारतीय है और आपका लेखन भारत को हिन्दू मुस्लिम दलित क्रिस्टी सिख ऐसी वियख्या
कर के बाँट रहा है.
उन सभी पाठकगणों
से ये पत्रकार कहना चाहता है के मेरा लेखन देश को नहीं बल्कि बीजीपी वाले और सरकार
की दोगली, भेदभाव पूर्ण नीति देश को बाँट रही है. जब देश का पंथ प्रधान कब्रस्तान-शमशान
फिर ईद-दीवाली जैसे बयान देता है जब योगी सरकार एनकाउंटर करती है तो सिर्फ मुस्लिम
और यादव समाज को लोगो के तो समाज और देश तो जाती धर्म के आधार पे बट चूका है. दूसरी बात जिस महिला का महामण्डन योगी सरकार महिला
दिवस के ऊपर कर चुके है और बीजेपी का नारा था बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ उसी महिला और नारे
को बीजेपी के कारकून जाती और धर्म के आधार पे बाँट रहे है.
इतना ही नहीं
बीजीपी वाले तो अपराध को भी जाती धर्म के आधार पे बाँट रहे है कश्मीर के कठुआ में जिस
८ साल की मासूम का रेप और हत्या हुई उसके बाद मुजरिमो के बचाव में बीजेपी के महामंत्री
ने एक रोड शो किया. इतना ही नहीं जिन वकीलों
के ऊपर कानून की रखवाली करने की ज़िम्मेदारी होती है हिन्दू वकील खुल के मुजरिमो के
सपोर्ट में आये और पुलिस के साथ हाथा पाई की और अवरोध पैदा किया ताके पुलिस मुजरिमो
को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने में असमर्थ रहे और हिन्दू रेप के मुजरिम जेल जाने
से बच जाए.
अभी कल ही
राजिस्थान के एक मंत्री ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा के सभी हिन्दुओ
को मुस्लिम समाज को अपने घरो में नहीं आने देना चाहिए. और उनसे कीसी भी प्रकार का व्यवहार
नहीं करना चाहिए. क्योके मुस्लिम समाज अपराधी मानसिकता का होता है और ना ही में मुस्लिम
सामाज के मोहल्लो में जाता हूँ और ना ही उनको अपने घर आने देता हूँ और ना ही उनसे वोट
की अपील करता हूँ.
हिंदुत्व
की बात करना या हिन्दू धर्म के लिए काम करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन नीति दोगली
और भेदभावपूर्ण नहीं होना चाहिए. एक काम के लिए अगर मुस्लिम, दलित, क्रिस्टी सक्षम
है तो उसी काम को कीसी हिन्दू को इसलिए नहीं देना चाहिए के वो हिन्दू है अगरचे वो इस
काम में माहिर भी ना हो. दूसरी बात रेप महिला के ऊपर सबसे बड़ा घिनोना अपराध है तो ऐसे
अपराधी का बचाव करना क्योके वो हिन्दू है सही नहीं है और इसके उलट अगर वही काम कीसी
गैर हिन्दू ने किया होता ८ साल की मासूम के साथ रेप और हत्या तो क्या फिर भी बीजेपी
उन गैर हिन्दुओ के बचाओ में आती और लंगूर मीडिया इतनी ही ख़ामोशी इख्तियार करता जितनी
के अभी है. नहीं कभी नहीं मीडिया तो तूफ़ान मचा देता हर चेंनल में ब्रेकिंग न्यूज़ दी
जाती रही होती. एक ८ साल की मासूम के साथ ८ दरिंदो में किया गेंग रेप और हत्या. फिर लंगूर मीडिया खुद ही मांग कर डालता फांसी की सजा.
तो जिस देश
के समाज में ज़ात पात, धर्म ज़हर की तरह भरा जा रहा हो तो उस देश में जाती धर्म का नाम
ले कर कोई लेख लिखना बूरा नहीं है और लेखन से नहीं बल्कि नेताओ के वक्तव से और उनकी
कार्यशैली से समाज और देश विभाजित होगा.
See in English
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What
type of bullet it is, for one it is sweet and others fatal.
https://autonomousjournalist.wordpress.com/2018/04/11/what-type-of-bullet-it-is-for-one-it-is-sweet-and-others-fatal/ …
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