Saturday, 14 January 2023

भारतीय अवाम को जब ज़हर अब तक़लीफ़ देने लगा।

अज़ीज़ नाज़रीन,

यह तमाम भारतीय तंज़ीमों और अवाम शिद्दत पसंद या दुनयावी की एक आरज़ू है की पाकिस्तान को भारत में ज़म हो जाना चाहिए।  साथ ही सलाह भी देतें हैं पाकिस्तानी अवाम को सल्तनते दिल्ली के तख़्त पर फ़ाइज़ बादशाह से राब्ता क़ायम कर के भारत से ज़म हो जाना चाहिये। 

ऐसे अहमक़ों और दिमाग़ी मुफ़लिसों से में यही कहना चाहूंगा, भारतीय अवाम की कोई एक तो अच्छी बात बता दो जिसको ख़्याल कर के पाकिस्तानी ज़म के बारे में सोचे। 

१.           क्या ज़हर जो अकसरियत अवाम के दिलों दिमाग़ में पेवस्त किया हुआ है वोह ख़तम हो चूका है। 

२.          क्या मुसलमानों को भारत के अकसरियत ने अपना दुश्मन तसव्वुर करना बंद कर दिया है।

३.        क्या शिद्दत पसंद अवाम के दिलों दिमाग़ में जो ज़हर और गंदगी इस्लाम, नबी सल्लम और क़ुरान की निस्बत से भरी हुई है वोह ख़तम हो चुकी है।  

अरे पाकिस्तानी अवाम की बात छोड़ो तुम तो जो भारतीय मुस्लिम १९४७ के बाद भी भारत में रहे उनको आज तक अपना नहीं बोलते हो, उनको भारतीय तस्सव्वुर नहीं करते हो। 

१.          हर मुद्दे पर उनको अपनी भारतीयता ज़ाहिर करना होती है। 

२.       वतन से मोहब्बत का सबूत देना पड़ता है।  अगरचे अकसरियत हिन्दू हक़ीक़त में ग़द्दारी भी करेगा तो उसको माफ़ी है, वहीँ मुसलमान को साबित करना पड़ेगा की वोह ग़द्दार नहीं है। वतन का वफ़ादार है  

३.           हर मुद्दे पर अगरचे उसमे हिन्दू अवाम की शमूलियत सबसे ज़्यादा होगी लेकिन सवाल मुस्लिम अवाम से ही किया जाएगा।  अकसरियत अज़वाज, तलाक़, आबादी।  

ऐसी सूरते हाल में जहाँ भारत के मुसलमान को अकसरियत हिन्दू आज ७२ सालों की आज़ादी के बाद भी भारतीय तस्सव्वुर करने को तैयार नहीं हैं तो पाकिस्तानी अवाम को कैसे अपना कहोगे। 

जदीद दौर के भारत में जहाँ मोदी भारत को आलमी उस्ताद (विश्व गुरू) बनाने के ख़्वाब सजा बैठे हैं अभी तक भी हर मुसलमान में अकसरियत हिन्दू को पाकिस्तानी ही दिखता है।  हर मुद्दे पर उनको पाकिस्तान भेजते रहतें हैं।  जब भारतीय मुस्लिम अवाम को पाकिस्तान भेजने की सिफ़ारिश करते हो तो कैसे पाकिस्तानी मुसलमानों को देख कर तुम्हारे अंदर का हिन्दुस्त्व बैदार नहीं होगा।

कूल मिला कर यह कहना ग़लत नहीं होगा जिस ज़हर की वजह से बटवारा हुआ था वोह ज़हर अभी तक क़ायम है बल्कि २०१४ के बाद मज़ीद बढ़ा है और उसके लिए ज़िम्मेदार हैं ज़ाफ़रानी मीडिया के ज़हरीले सहाफ़ी जो हर मुद्दे पर कहीं से भी मुसलमान को तलाश ही लेते हैं।  फिर झूठी और फरेबी मीडिया कवरेज, मीडिया ट्रायल कर के उनको अवाम की नज़रों में मुजरिम बना ही देतें हैं।  जब तक अदलिया का फैसला आता है तब तक बोहोत ताख़ीर हो चुकी होती है और जो मीडिया का मुस्लिम नस्ल कूशी इज्तेमाई क़त्ले आम और अस्मतदरी करना थी वोह तो हो चुकी होती है।    

फिर किया भारत का अकसरियत अवाम यह बर्दाश्त करेगा की मुत्तहिदा भारत का पहला वज़ीरे आज़म कोई मुस्लिम हो।  अगरचे वही सब करना था तो ४७ से क़ब्ल जिन्ना साहब को काहे को वज़ीरे आज़म नहीं बनाया गया।  ७२ साल क़ब्ल तारीख़ ऐसी लिखी गई थी आज़ाद भारत के पहले वज़ीरे आज़म जवाहरलाल नेहरू और अब ७२ साल बाद अगर पाकिस्तान भारत में ज़म होता है तो मुत्तहिदा भारत के पहले वज़ीरे आज़म असदुद्दीन ओवेसी या आज़म ख़ान या इमरान ख़ान या नवाज़ शरीफ़ ऐसी तारीख़ लिखी जाएगी।  क्या यह हिन्दू अक्सरियत को मंज़ूर होगा।  जो मोदी आलमी उस्ताद बनने के ख़्वाब सजाये बैठा है उसके हाथ क्या लगा बाबा जी का टूल्लू।  तारीख़ में पहला नंबर बनने का क्या हाथ आया उसके।   

दूसरी बात अभी तो सिर्फ भारत में ही शिव लिंग निकलता था लंगूर सीता मैया की तलाश में इधर उधर भटकता था और हर मस्जिद ख़ानक़ाह आस्ताना ऐ वली के पास मिलता था फिर पाकिस्तान अगर भारत में ज़म हो गया तो वहां पर भी यह ख़ुराफ़ात शुरू हो जाएगी।  हर मस्जिद में शिव लिंग निकलेगा।  या तो अकसरियत अवाम इस बात को माने की अंग्रेज़ों के ख़ौफ़ से शिव ने अपना ख़तना कर लिया था और वोह मुस्लिम हो गया था।   अगर वोह अभी तक हिन्दू है तो उसको शिव लिंग नहीं बल्कि फ़व्वारा तस्लीम करें।   

Zuber

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...