अज़ीज़ नाज़रीन,
हिंदी ख़बरनामे में कुछ ११ रोज़ क़ब्ल राहुल गांधी के हिन्द की दारुल ख़िलाफ़त देहली पहुंचने पर टी शर्ट नज़रियाती तब्सिरा किया था। और मेने बोला था की राहुल को हर हाल में कोई रूहानी ताक़त फ़राहम हो रही है। जैसे की उनके आबो अजदाद पंडित नेहरू, महात्मा गांधी, सरोजनी नायडू, इंदरा गांधी को ओलेमा फिरंगी महल के वलिओं का फैज़ हासिल था। शायद राहुल गांधी पोशीदा तरीक़ेकार हिकमत से फिरंगी महल लखनऊ से रूहानी ताक़त ले कर आये होंगे। में हैरान हूँ राहुल गाँधी कश्मीर पहुंच गए जहाँ दिसम्बर जनवरी में दर्जे हरारत -१५ और - २० पहुंच जाती है फिर भी उनका टी शर्ट है की साथ नहीं छोड़ रहा है। यक़ीनन यह इंसानी जिस्म का कमाल नहीं है बल्कि उनको ताक़त और क़ुव्वत कोई रूहानी फैज़ से मिल रही है।
पंडित
जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी फिरंगी महल लखनऊ से काफ़ी फ़ैज़याब होते थे। कोई भी काम मौलाना अब्दुल बारी अला रेहमा के मशवरे
के बिना नहीं करते थे। मौलाना साहब भी मशवरा
अपनी ज़हानत और इल्म की रौशनी में मुख़लेसाना देते थे जो हूकूमते फिरंगी के ख़िलाफ़ और
हिंदुस्तान के मुस्तक़बिल के लिए कारगार साबित होता था। ख़िलाफ़त तहरीक का आगाज़ भी मौलाना अब्दुल बारी ने
ही किया था। उस तहरीक में उसके हमराह उस दौर
के मारूफ शायर और सहाफ़ी मौलाना हसरत मोहानी रेहमतुल्लाह अलैहे भी शाना बा शाना थे।
मौलाना अब्दुल बारी रेहमतुल्लाह अलैहे ने फतवा दिया था की में मुस्लिम ख़ानसामाओं को हुकुम देता हूँ अंग्रेज़ अफसरों के ख़ाने में ज़हर मिला दें रोज़ा ऐ जज़ा को में उनकी किफ़ालत करूँगा। उनके उस फतवे पर अंग्रेज़ हुकूमत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया। लेकिन कभी भी उनको गिरफ्तार नहीं कर पाए।
यह
बात अंग्रेज़ी हुकूमत के पुलिस महकमे के रिकॉर्ड में मौजूद है और रॉबिंसन ने अपनी किताब
“ओलेमा ऑफ़ फिरंगी महल” में दर्ज की है
। जब जब अंग्रेज़ पुलिस के अस.पी., डी.अस.पी. या कोई और आला ओहदेदार उनको गिरफ्तार करने
पहुंचते तो उनके अंदर ईसा मसीह का जलवा देखते थे।
अंग्रेज़ अफसर ने रानी विक्टोरिया को अपने हलफनामे में इस बात को दर्ज किया है
की मौलाना साहब को गिफ्तार करने की ज़िद अंग्रेज़ हुकूमत छोड़ दे में जब उनको गिरफ्तार
करने पहुंचा तो मेने पाया की ईसा मसीह नमाज़ अदा कर रहें हैं और मेने उनके अंदर ईसा
मसीह का जलवा देखा है। में ऐसी अज़ीम शख्सियत
को गिरफ्तार करने की जुर्रत नहीं कर सकता हाँ में अपना इस्तीफा दे सकता हूँ।
एक बार हज़रत कलकत्ता से लखनऊ आ रहे थे। और पुलिस को इत्तेला मिल गई की मौलाना बारी मियाँ इस गाडी से लखनऊ आ रहें हैं। तमाम चारबाग़ स्टेशन उनको गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। उनका बग्गी का कोचवान उनको लाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचा। गाडी जब स्टेशन पहुंची तो पुलिस और वोह बग्गी का कोचवान देख कर हैरान परेशान हो गए जितने भी पैसिंजर उतरे वोह सब मौलाना अब्दुल बारी अला रेहमा की शबी वाले थे। अब किस को गिरफ्तार करें। बग्गी का कोचवान इस बात से परेशान था की इन में से कौन से हज़रत हैं हज़रत घर कैसे पहुचेगें। इतने में एक शख्स ने उसका हाथ पकड़ा और बोला चालो घर और ऐसे अब्दुल बारी रेहमतुल्लाह की करामात ज़ाहिर हुई और अंग्रेज़ पुलिस उनको कभी भी गिरफ्तार नहीं कर पाई।
यूं तो अल्लाह के वलिओं की कश्फ़ और करामात ज़ाहिर होती ही रहती है। उन्ही कारामात में से एक हो सकता है की टी शर्ट का राज़ भी किसी वली के करामात का हिस्सा ही होगा। यह इंसानी क़ुव्वत और ताक़त नहीं हो सकती। अब राहुल गांधी के टी शर्ट पर तफ्तीश और रिसर्च हो रही है।
राहुल गांधी का ब्लड टेस्ट किया जा रहा है की उनके खून में ऐसी कौन सी धमनी है जो उनको सदा तरो ताज़ा रखती है, और उनको मौसन के किसी भी क़ेहर का एहसास नहीं होता। ना बारिश ना सर्दी और ना गर्मी।
सहाफ़ी
ज़ुबेर

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