अज़ीज़ नाज़रीन
भारत के शिद्दत पसंद हिन्दू, बीजेपी वाले अब इस्लामिक उसूलों और इस सहाफ़ी के दो, तीन और पांच अदद वाले फ़लसफ़े को मानने पर मजबूर हो गए हैं। हाल ही में भारत की जानिब से पाकिस्तान के वज़ीरे ख़ारज़ा जनाब बिलावल भुट्टो को शंघाई ताऊन तंज़ीम (SCO) के इजलास में भारत आने की दवात दी थी। अब जल्द ही पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म जनाब शाहबाज़ शरीफ़ को भी इस इजलास में शिरकत के लिए दवात दी जाएगी।
इजलास का आग़ाज़ मई २०२३ में भारत के गोवा में होने जा रहा है जिसकी सदारत भारत कर रहा है।सदर मुल्क की दावत को एक प्रोटोकॉल के तहत माना जाता है। लेकिन पकिस्तन को भारत की जानिब से दावत देना भारत का पाकिस्तान के ख़ुदा के आगे सजदा रेज़ होने जैसा महसूस हो रहा है। नाज़रीन दो तीन बातें कहना चाहूंगा। एक या तो मोदी, अमित शाह और भारत के वज़ीरे ख़ारज़ा को पाकिस्तान की निस्बत से दुश्मनी भरी बातें नहीं करनी थी। मुर्दे के जैसे कड़क नहीं होना था। थोड़ा सा लचीला पन रखना था ताके आगे के हालात अल्लाह के हाथ में हैं और जब पिछवाड़े ऊपर वाले की लाठी पड़े तो उस वक़्त झुकने में कोई परेशानी ना हो।
दूसरी बात भारत का मुद्दा क्या था हम पाकिस्तान से किसी भी फोरम या आलमी चबूतरे पर बात नहीं करेंगें पहले पाकिस्तान आतंकवाद को बंद करे फिर उससे बात चीत शुरू की जायेगें। तो भारत के कड़क मुर्दे तो क्या ऐसा समझा जाए की पाकिस्तान से आतंकवाद पूरी तरह ख़तम हो चूका है।
तीसरी बात पाकिस्तान तो हर फोरम हर मंच पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म ने भारत से बात चीत की पेशकश की थी फिर अमेरिका के वज़ारत खारजा को दिए गए इंटरव्यू में फिर से कश्मीर मुद्दा उठा दिया। तो क्या यह समझा जाए की भारत ने पाकिस्तान की कश्मीर पालिसी को मान ली हैं।
भारत ने पाकिस्तान के तीन एहम ओहदेदारों को दवात दी है। पाकिस्तान के चीफ जस्टिस, वज़ीरे आज़म और वज़ीरे ख़ारजा। भारतीय हुकूमत की जानिब से इस्लामाबाद में भारतीय वाज़ारतख़ाने ने पाकिस्तानी खारजा वाज़ारतख़ाने को एससीओ इजलास में शिरकतनामे का दावतनामा दिया है।
जो अभी झुक रहे हो अपनी इज़्ज़ते नफ़्स को मिटा कर ज़लील हो कर अगर पहले ही थोड़ा सा मोतदिल हिकमत दिखाते तो ज़लील नहीं होना पड़ता। अरे भाई तुम आलम में हो किसी मार्स या दुसरे सय्यारे से नहीं आये हो तुम इस दुनिया का हिस्सा हो और वैसे ही जीना पडेगा जैसा की आम लोग जीतें हैं। अगर नहीं तो मिटा दिए जाओगे तबाही तुम्हारा मुक्क़द्दर बन जाएगी।
नाज़रीन अब ज़रा भारत के वज़ीरे ख़ारज़ा जय शंकर के १५ दिन पहले के उस बयान का मुल्हैज़ा कीजिये जिसमे वोह पाकिस्तानियों की शबाहत सांप से कर रहें हैं। दहशतगर्दी को सांप से मिला रहें हैं और जो पालता है उसको ही डसेगा ऐसे ऊल जलूल बयानात दे रहें हैं। ओसामा जी के ऊपर ज़हर अंगेशी कर रहें हैं। जब इतना ही ज़हर था तो पाल के रखना था वोह ज़हर। फिर १५ दिनों में ऐसा क्या हो गया की सजदा रेज़ हो गया भारत और उसका कड़क वज़ीरे आज़म जो १२ सालों में नहीं हुआ वोह कर डाला।
या तो ऐसी बड़ी बड़ी बातें नहीं करनी थी की ज़मीन पर पड़ा थूक कर चाटा जाए। या फिर पहले ही अल्लाह की ताक़त और क़ुव्वत का इक़रार कर लेना था। अब जब चूतड़ पर ऊपर वाले की लाठी पड़ी तो हो गए उलटे। फिर अभी ३ दिन पहले तक लंगूरों की टोली पाकिस्तान की निस्बत से कैसी ज़हर अंगेशी कर रही थी। जब पाकिस्तान इतना ज़हरीला है तो काहे को उसको मदू कर रहे हो। हमारे वालिद एक शेर कहते थे।
ना बन इतना कड़वा जो खाये उसे थूके,
ना बन इतना मीठा की चट कर जाए लोग भूके।
फिर पाकिस्तान की निस्बत से इतनी कड़वाहट भारत की अवाम, लंगूर-लँगूरनियों और हूकूमती नुमाइंदों को दिखानी ही नहीं थी की ज़हरीला नाम भारत का पड़ जाए और बदनामी अलग हो।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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