Wednesday, 11 January 2023

क़दम ऐ दरवेश और शैतानी क़दम

अज़ीज़ नाज़रीन,

किसी शायर ने क्या खूब कहा है "क़दम ऐ दरवेश रद्द बला है"

जब किसी बंजर, बर्बाद शैतानी हल्क़े में किसी नबी, दरवेश या वली के क़दम पड़ते हैं तो वोह जगह सरसब्ज़ और शादाब हो जाती है।  उस ज़मीन पर जहाँ ज़ुल्म, नाइंसाफ़ी, क़त्लो ग़ारत, शैतानी अमलियात की वजह से अल्लाह की लानत बरस रही होती है वही जगह दरवेश के बा बरकत क़दमों और रूहानियत की वजह अल्लाह की रहमतों के साये आ जाती है।  वहीँ किसी ख़ुशहाल हस्ती खेलती बस्ती पर शैतानी अमलियात शापित मनहूस के क़दम पड़ते हैं तो वोह बस्ती तबाह और बर्बाद हो जाती हैं उजड़ जाती है। 

नबी ऐ मुक्कर्रम सरज़मीन ऐ अरब में जब तशरीफ़ लाये थे तब वोह ज़मीन ज़ुल्म नाइंसाफी मार काट बदअमनी से भरी पड़ी थी।  मस्तूरातों को कोई हुक़ूक़ नहीं थे।  बेटियां ज़िंदा दरगोर कर दी जाती थी। आज वहीँ सरज़मीन ऐ अरब की माशी, जदीद तकनीक आलीशान बिल्डिंग, दफ़तर, आलीशान रिहाइश सड़क पानी वग़ैरा की क्या बेहतरीन हालत हैं।   जिस अरब वर्ल्ड और नबी मुक्कर्रम, क़ुरान को हिन्द के शिद्दत पसंद मज़ाक़ बनातें हैं और भारत को एक अज़ीम ताक़त तस्सव्वुर करतें हैं भारत जदीद तकनीक से आरास्ता हैं बोलतें हैं मोदी एक अज़ीम शख़्सियत हैं।  ऐसा बोलने वाले शिद्दत पसंद अक्सरियत के अहले ख़ाना में से कम से कम एक फ़र्द तो अरबियन मुमालिक में जा कर कमा रहा होगा।  और जहाँ तक मोदी का सवाल हैं वोह तो सऊदी अरब के शहज़ादे के सामने ऐसे हाथ बंद किये हुए खड़ा था जैसे नमाज़ की नियत कर रखी हो और अभी अल्लाह के हुज़ूर सजदा रेज़ हो जाएगा। 

नाज़रीन नबियों की सिफ़त जो एहले दुनियां से हट कर हो उसको मोजज़ा बोला जाता और वही सिफ़त अगर किसी मोमीन में ज़ाहिर हो तो उसको करामात बोलतें हैं।  और यह सिफ़त अल्लाह की जानिब से अता करदा होती हैं।  

और हर मोमीन का यह मानना है की नबी सल्लम के बाद अब कोई नबी तशरीफ़ नहीं लाने वाले।  हाँ लेकिन अल्लाह के सच्चे वली दरवेशों का आना सुबह क़यामत तक जारी रहेगा।   जो अल्लाह के हुकुम के ताबेदार होंगे और हक़ की दवात देंगें।  जिस किसी भी ख़ित्ते में तबाही, बर्बादी, बदअमनी, नाइन्साफ़ी, क़त्लो ग़ारत होगा वहां किसी ना किसी दरवेश को हक़ की दावत देतें हुए देखा जा सकता है। 

वहीँ दूसरी जानिब मोदी जैसा शैतानी अमलियात का माहिर जिस बस्ती में गया अपने साथ ले गया तबाही बर्बादी और मौतें।  अपने पीछे छोड़ गया क़दमों के ख़ूनी निशान। 

नाज़रीन आपको सितम्बर २०१९ की उत्तराखंड की गुफ़ा में ज़ाफ़रानी शाल के साथ साहब की कारगरदेगी याद है।  जी हाँ वही वही उस सर्दी में जहाँ इंसान का जाना दुश्वार होता है साहब के पहुंचने से क़ब्ल कैमरा पहुंच गया और साहब की निगाहें भी अपने मालिक भोले बाबा की याद से ग़ाफ़िल हो कर कैमरे की जानिब गड़ी हुई थी।   

देखिये नतीजे मिलने लगे गुफ़ा में रियाज़त करे हुए सितम्बर २०१९ से ले कर ढाई साल ही गुज़रे थे की आ गई तबाही।   आज तीन साल बाद तमाम उत्तराखंड अब तो बर्बादी की दास्तान लिख रहा है।   

नाज़रीन बताने का मक़सद वही है बाबरकत क़दमों से दरवेश की निगाहों से इंसान की तक़दीर बदल जाती है।  आने वाली हज़ार बला आफत शैतानी असर रफू चक्कर हो जाता है इसके बरक़्स किसी शैतानी फितरत, नाइंसाफ़, पनोती बाज़ के क़दमों की मनहूसियत से उस ख़ित्ते में आने वाली बरकत और रेहमत तबाही और बर्बादी में बदल दी जाती है।  और ऐसा पनोती बाज़ शख्स अपने क़दमों के साथ लाता है तबाही बर्बादी मौतें।  

Zuber

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