अज़ीज़ नाज़रीन
आज कल उत्तराखंड के जोशी मठ में क़ुदरत की तबाही और अवाम की बदहाली घरों पर चलते हुए बिलडोज़र लंगूर और लँगूरनियों की ख़बरों की सुर्खियां बनी हुई हैं। यह क़िस्सा अब सिर्फ जोशी मठ पर नहीं थमने वाला बल्कि उत्तराखंड के चमोली, चम्पावत, नैनीताल, उत्तरकाशी भी खतरे के निशाँन देही कर रहें हैं। मज़े की बात यह है की सिवाए नैनीताल के बाक़ी तमाम जगहें हिन्दू अक़ीदत के हिसाब से पाकीज़ा ज़मीन हैं। नैनीताल एक सियाही हल्क़ा (टूरिस्ट पैलेस) है।
नाज़रीन अब याद कीजिये बिलडोज़र की सियासत को जो साधू ले कर आया था। जब कभी भी मुस्लिम अवाम के घरों पर बिलडोज़र चलता शिद्दत पसंद अक्सरियत अवाम उसका जश्न मनाते थे और योगी के बिलडोज़र की वह वही करते थे। लेकिन क़ुदरत के क़ानून जब ज़ालिम और ज़ुल्म करने वाले के ऊपर लाठी बन कर पड़ते हैं तो वोह "चू" करने के क़ाबिल भी नहीं रहता है।
नाज़रीन
आपको गुजिश्ता रमज़ान शरीफ़ का पाकीज़ा महीना याद है जब कंस मामा ने अपने फ़र्ज़ से ग़द्दारी
कर के ग़रीब मासूम मुस्लिम अवाम के घरों पर बिलडोज़र चला कर उनकी तमाम बस्ती को तबाह
कर दिया था। उनकी ज़ारियाये माश रोज़गार पर बिलडोज़र
चला दिए थे। ऐसी हालत में उन मुस्लिम अवाम
ने सडकों पर सेहरी बना कर रोज़े रखे थे और टूटे हुए घरों पर इफ्तार किया था।
अब
देखिये दूसरा रमज़ान तो अभी आने में ढाई माह बाक़ी है लेकिन ऊपर वाले ने तबाह कर दिया। करोड़ों हिन्दू अवाम को रोड पर ले आया और हज़ारों
लाखों के रोज़गार छीन लिए। इसको क़ुदरत की मार
या खामोश बदला ही कहेगें जो बीजीपी हुकूमतें सदा मुस्लिम अवाम को योगी के बिलडोज़र की
धौंस दिखाती थी वहीँ मजबूर हो गई अपने अवाम अपनी रियाया के घरों और आशियानों को तोड़ने
के लिए। रोज़गार, आलिशान होटल, बंगले कोठियां
सब मट्टी के ढेर में तब्दील कर दिए गए।
क़ुदरत
का इन्साफ एकदम बराबर है खरगोन में कसं मामा ने मुस्लिम अवाम के घरों को तोड़ा था पुलिस
एक्शन में कोई शहीद नहीं हुआ तो उत्तराखंड में सिर्फ घरों को तोड़ा गया अभी तक किसी
के मारे जाने की कोई ख़बर नहीं है। नहीं तो
हो सकता था पूरा पहाड़ आ कर घरों पर गिर जाता या ज़लज़ला आ जाता तो कम से कम ५ से ७ लाख
हिन्दू मारे जा सकते थे।
नाज़रीन
इससे क़ब्ल सूबे शुमाल में कई हूकूमती इमारते क़ुदरत के क़ेहर आंधी तूफ़ान से टूट चुकी
हैं और मुस्लिम अवाम के घरों पेट्रोल पंप होटल को तोड़ने की सज़ा मिल चुकी हैं। अब उत्तराखंड की बारी थी। जैसा करोगे वैसा भरोगे। ना इंसाफ़ी की मासूम मुसलमानों के घरों को तोड़ा तो
वही काम ऊपर वाले ने हिन्दू हुकूमत से हिन्दू अवाम के लिए करवा लिया
नाज़रीन
अभी बाबरी मस्जिद का इन्साफ़ होना बाक़ी हैं।
होगा बिलकुल होगा। कियोंके किसी भी
मुस्लिम बादशाह ने कोई मंदिर नहीं तोड़े और ना ही मंदिर को तोड़ कर कोई मस्जिद बनाई गई
हैं। लेकिन साजिश के साथ धोखे बाज़ी से मस्जिद
को तोड़ा गया और उस पर मंदिर बन रही हैं। अभी
ज़वाल नहीं आएगा पहले मंदिर बन जाने दो। खर्चा
हो जाने दो फिर आएगी तबाही। इन्साफ़ का यही
तकाज़ा हैं।
पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान बंगलादेश के अवाम से भारत के तमाम शिद्दत पसंद अक्सरियत, बीजेपी और संघ को बड़ी हमदर्दी थी। हुकूमत इन मुमालिकों से आये पनाह पज़ीरों को भारत की शहरियत दे कर उनको भारत के अवाम में शामिल करना चाहता था। अब में मोदी हुकूमत और वज़ीरे दाख़ला से सवाल करता हूँ, उत्तराखंड के उजड़े बर्बाद तबाह हुए अवाम के ख़ैर के क्या इक़दाम किये हैं। इन अवाम को कहाँ बसाओगे और इनके रोज़गार माश तालीम घर के लिए किया करेगी हुकूमत।
इन उजड़े हुए चमन को अब कहा बसाओगे। बेचारे क्या खायेगें, कहाँ रहेगें किस के पास जायेगें मोदी और शिद्दत पसंद बीजेपी को लाने वाले भी यही लोग थे अब अपनी विपदा किसी को सूना भी नहीं सकतें। योगी के बिलडोज़र की हिकमत इनको बोहोत पसंद थी अब वही बिलडोज़र तमाम उत्तराखंड और हर हिन्दू हल्क़े में तबाही मचा रहा हैं।
ज़ुबेर
No comments:
Post a Comment