अज़ीज़ नाज़रीन,
जिस क़िसास और जंग का आग़ाज़ रामचरित्र मानुस पर बिहार से महज़ ज़ुबानी हमले के रूप में हुआ था सूबे शुमाल में दाख़िल हो कर भयानक रूप इख़्तेयार करते हुए फ़ाइर में तब्दील हो गया है। सूबे शुमाल की दारुल ख़िलाफत लखनऊ और योगी के गड में घूस कर स्वामी प्रसाद मोरिया जी के हिमायतियों ने राम चरित्र की कॉपियां आतिशे नार कर दी। यह मेरे रब का क़ेहर और क़िसास है। कभी हिन्दू राष्ट्र में क़ुरान के ख़िलाफ़ शिद्दत पसंद काफिर बदगुमानी फ़ैलाते थे। ऊल जलूल बकवास करते थे। इश्तेआल अंगेज़ी किताब है उसको बेन करने की सिफ़ारिश करते थे। वैसा ही हू बहू हिन्दू किताबों के साथ हो रहा है। क़ुरान को जलाया जाता था, अब राम को जलाया जा रहा है। ऐसा तो कभी देखने को नहीं मिला की हिन्दू ह्रदय सम्राट दिल्ली पर क़ाबिज़ हो सूबे में भगवा शासन लागू और जलाई जा रहीं हैं राम चरित्र माणूस की प्रतियां। यह क़ुव्वत और ताक़त सिर्फ और सिर्फ मेरे रब की जानिब से आ सकती है। और जब अल्लाह जिस बन्दे को कुछ भी काम करने के लिए चुन लेता है उससे वोह काम बराबर लेता है।
वहीँ दूसरा मुद्दा है तब्दील मज़हब। जिस पर शिद्दत पसंद बेहद बवाल मचाते थे। धर्म जिहाद बहका फुसला पैसों का लालच दे कर मुस्लिम बनाया वग़ैरा। लेकिन उन सभी शिद्दत पसंदों को पहले भी कई बार लिख चूका हूँ जिसको इस्लाम की खुशबू और हक़ीक़ी रौशनी मिल जाती है फिर वोह किसी मज़हब में नहीं जाता है। सूबे शुमाल के कौशाम्बी के रहने वाले उदयराज जो बॉम्बे में मुक़ीम थे और अब तब्दील मज़हब कर के एहमद हुसैन बन गए हैं। जब वोह कौशाम्बी अपने घर गए तो मस्जिद में नमाज़ पढ़ते देख उनके एहबाब सन्न रह गए। उनके वालिद ने पुलिस में झूटी और फरेबी शिकायत कर डाली की उनके फ़रज़न्द को बेहला फुसला कर पैसों का लालच दे कर मुस्लिम बनाया गया है। जिन मौलवी साहब ने मुसलमान बनाया उनको भी इस मुद्दे में घसीटा जा रहा है। पुलिस ने एहमद को पुलिस स्टेशन बुलाया उन्होंने साफ़ बोल दिया की मेने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम से मुत्तासिर हो और इसकी खूबियां जान कर उस मज़हब को इख़्तेयार किया है। कियोंके उनके साथ काम करने वाले दानिश हर वक़्त वाज़ू से रहते थे और नमाज़ अदा करते थे तो में उनसे बोहोत मुत्तासिर हुआ और इस्लाम इख़्तेयार कर लिया। लेकिन पुलिस है की मामले तूल दे रही है और मौलवी साहब दानिश साहब के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस और इन्तेज़ामियाँ हर मसले में बेजा मदाखलत ना करे। नहीं तो भारत में ख़ाना जंगी मज़ीद पेचीदा मरहले में पहुंच जाएगी। पहले ही माता जी फ़ौत होने की राह पर हैं। माता जी मतलब भारत। आई सी यू में बिस्तर मृग (मृत शय्या) पर पड़ी हुई हैं ऊपर से अगर ख़ाना जंगी पेचीदा हुई तो भारी पडेगा पुलिस को भी और इन्तेज़ामियाँ को भी। एक तो कंगाली ऊपर से होगा आटा गीला।
कोई भी किसी को दबाव या लालच दे कर इंसान से उसकी सबसे अज़ीज़ चीज़ तब्दील मज़हब नहीं करवा सकता। यह तो इंसान की अंदुरूनी रूह की आवाज़ होती है जिसको वोह सुनता है और इख़्तेयार करता है। जो बात दिल को अच्छी लगी कर ली। अगर पुलिस ने बेजा मुदखेलत किया तो होगी बग़ावत। कियोंके जिसने दिल से किसी बात को क़ुबूल कर लिया अब उससे ज़बरदस्ती वापिस से नाजिस्त (पख़ाना पेशाब) खाने पीने को कहोगे तो वोह मर जाएगा लेकिन ऐसा हरगिज़ नहीं करेगा। इस्लाम की इब्तेदाई तारिख उठा कर देख ले आज के अबू जेहल।
बिलाल हब्शी एक ग़ुलाम थे और उन्होंने अल ऐलानियाँ इस्लाम अपना लिया था फिर उनके आक़ा हाकिम ने उनको जलती हुई आग में सेका अज़ीयत दी लहू लूहान कर देता; आप बिलाल बेहोश हो जाते, जब होश आता और आक़ा पूछता बोल मोहम्म्मद के कलमे के बारे में क्या बोलता है तो आप बोल उठते "अशहदो अल्लाह इल्लाहा इललल्हा वा अशहदो अन्ना मोहम्मदन अब्दोहू व रसूलहू"
दूसरी बात पैसों का लालच दे कर जान से मार डालने का ख़ौफ़ दिखा कर दबाव में आ कर जो लोग किसी भी मज़हब को इख़्तेयार करते हैं वोह झूठे और फरेबी होते हैं। ऐसे लोग अगर इस्लाम में आ रहें हैं तो वोह मुनाफ़िक़ों की फेहरिस्त में हैं। लेकिन जो दिल से किसी भी बात को क़ुबूल करता है अब पुलिस क्या दुनियां की बड़ी से बड़ी ताक़त आ जाए उसको अपने मक़सद से वापिस नहीं पलटा सकती।
Zuber
1 comment:
Be shaq Mera rab bada hi maharban hai
Ok
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