Saturday, 7 January 2023

ग़फ़ूर बस्ती

 हाकिम की थी मर्ज़ी की हो हमारी हिजरत

मालिक की मर्ज़ी थी की हो ज़ालिम की रियाया बेघर

ग़फ़ूर बस्ती रहे सदा सलामत

तुम करो अपनी ज़मीन से हिजरत

 

चलने लगी दरारें तुम्हारे घरों पर

बोहोत शौक़ था तुमको की चलाएं हमारे ऊपर बिलडोज़र

किया था ज़ुल्म हमको समझ पराया

हाकिम की साजिश का शिकार हुई खुद उसकी रियाया    

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...