अज़ीज़ नाज़रीन,
दिखा दी ताक़त हिजड़े ग़ायब। ज़ाफ़रानी संसद में ऐसा क़रारदार पास हुआ था की २० लाख मुसलमानों को काट डालेंगे। उसके जवाब में आज बरोज़ जुमा बाद नमाज़ जैसा की मौलाना तौक़ीर रज़ा दामत बर्कातूहू ने वादा किया था की हम मुस्लिम मुल्क की यकजेहदी के लिए खाना जंगी से बचाने के लिए खुद अपनी मर्ज़ी से क़ुर्बान होने को तैयार हैं। उनके इस एलान पर तमाम मुस्लिम ब्रादरान लब्बेक बोल कर अपने मौलाना के पीछे चल पड़े। पहला जथ्था खुद क़ुर्बानी देने के लिए इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड पर पंहुचा जिसकी तादात कम से कम ५० हज़ार से १ लाख के क़रीब रही होगी। लेकिन यह क्या क़ातिल ख़ुद ग़ायब हो गया भगवा कसाई योगी जिसको मुस्लिम अवाम के ऊपर बोहोत गोलियां चलाने का शौक़ है वोह हिजड़ा भी किसी मेहफ़ूज़ समझी जाने वाली भोग (गुफा) में जा घुसा। गुफा पुत्र। अरे जब ताक़त नहीं हिम्मत नहीं तो काहे को हमारे रस्ते में आते हो। अब योगी, भोगी और खाकी ख़ौफ़ज़दा होंगे की अगली हिकमत इस हुजूम की क्या होगी। जिस धर्म संसद में ज़हरीले बोल बोलने पर महज़ ६० - ७० से ज़्यादा हिन्दू नहीं थे वहीँ अपनी जानों की क़ुर्बानी देने के लिए १ लाख के क़रीब मुस्लिम अपने मज़हबी पेशवा और क़ौमी रहबर तौक़ीर रज़ा के बुलाने पर आ पहुंचे। अब तुम ज़्यादा डिसिपीलीन या हम जिनको तुम पंचर बाज़ बोलते हो। तुम जैसे तालीमी आफ़ता से तो हम पंचर बाज़ लाख गुना आला हैं जो क़ौम के रहबर और पेशवा के एक बुलावे पर सर कटाने के लिए लाखों जमा हो जातें हैं।
इन
धर्म संसद वालों के मुसलमानों को काटने के बुलावे पर महज़ ५० से ६० लोग जमा हुए तो सोचो
अगर मुसलमानों से कटवाने के लिए बुलाया जाता तो कितने आते। शायद एक भी नहीं आता। मोदी की पंजाब अवामी जलसा कुर्सीयां थी ७० हज़ार
आये ७० भी नहीं।
यह पहली बार नहीं बल्कि बारहा इन भगवा तंज़ीमों को मुस्लिम अवाम ने ज़ोरदार तमाचा मारा है। हर बार के जैसे गाल पर चस्पा हो गया है जो सुबह क़यामत तक के लिए तारिख के सफों में दर्ज हो चुका है।
नाज़रीन हर कट्टरपंथी की यही कहानी है। बड़ी बड़ी बातें वडा पाव खाते।
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