Friday, 7 January 2022

हीरो या विलन; मर्द या नामर्द।

अज़ीज़ नाज़रीन,

हाल ही में पंजाब में भारत के वज़ीरे आज़म  के साथ  जो कुछ भी हुआ उसको तमाम संघ के नुमाइंदे, शिद्दत पसंद हिन्दू,  बीजेपी और उससे मुनसलिक अवाम विक़ार का मुद्दा बना कर पंजाब के वज़ीरे आला पर तनक़ीद की बौछार करने लगे।   नाज़रीन यहाँ एक बात वाज़े करना चाहता हूँ की इस मुद्दे पर इतना हूँ हल्ला सिर्फ और सिर्फ वज़ीरे आज़म भारत की फरारी इख़्तेयार करने की हिकमत को उजागर करता है। 

अवाम को इस बात पर ग़ौर और फ़िक्र करने की ज़रुरत है, जो शख़्स वज़ीरे आज़म के ओहदे पर फ़ाइज़ है और तमाम तहफ़्फ़ुज़ के इक़दाम किये हुए हैं फिर भी वोह अपने मक़सद में कामयाब नहीं हो पाया तो क्या ऐसा शख्स अवाम के मक़सद और उनके मसले हल करने में कामयाब होगा।   नाज़रीन इस ज़िम्न में यह सहाफ़ी इस बात को कहने में कोई गुरेज़ नहीं करेगा की अगर मुल्क का कोई वज़ीरे आज़म बनने की सलाहियत और हौसला रखता है तो वोह महज़ तीन जमात के अवाम में से कोई होना चाहिए।   पहला मुसलमान दूसरा सिख और तीसरा क्रिस्टी (ईसाई) जहाँ तक शुजात, ताक़त, हौसला और ज़हानत का सवाल है वोह मुस्लिम अवाम में कूट कूट के भरी है।  सिख अवाम में शुजात, ताक़त और हौसला और ईसाई में हौसला और ज़हानत।  

ईसाई अपनी ज़हानत की वजह से ही तक़रीबन निस्फ़ से भी ज़ाइद दुनियां के ऊपर हुकूमत कर चुके हैं।और आज की तारिख में अगर तमाम आलम में कोई मज़हब पहले नंबर पर है तो वोह है ईसाई मज़हब फिर इस्लाम।   लेकिन भारत के पसमंज़र में यह सहाफ़ी अलहदा ज़ाविये से देखता है भारत में आबादी के तनासुब को भी मद्दे नज़र रखते हुए वज़ीरे आज़म के लिए पहली दूसरी और तीसरी दर्जे बंदी की गई है।  

नाज़रीन आपको यहाँ यह बताना मुनासिब समझता हूँ जो हालात भारत वज़ीरे आज़म के साथ पेश आये वैसे ही हालात सबसे बड़े इस्लामिक मुल्क के सदर जोको वेदादो के साथ पेश आये थे।  सदर जोको जो की एक मुस्लिम हैं, फिर उन्होंने क्या किया देखिये।   जहाँ तक मोदी जी का सवाल है वोह २० मिनिट तक ओवर ब्रिज पर खड़े रहे और हालात को तकते रहे।  फिर जब कुछ ना बन सका तो तमाशा बन गए।  और अपना फरारी का रिकॉर्ड क़ायम रखा।  हर जगह से फ़रार। 

नाज़रीन अब संघी बाल्टी भर भर के कांग्रेस को सिखों को कोस रहें हैं।  दरहक़ीक़त यह संघियों की ग़लती नहीं है बल्कि इनके ख़ून में ही ग़द्दारी भरी हुई है।  और गले लग कर गर्दन काटना इनके ख़ून में शामिल है।  मुगलों से दुश्मनी की वजह हमारे ऊपर ज़ुल्म किये हिन्दू धर्म खतरे में था जब तक मुग़ल थे तब तक।  फिर ईसाई मज़हब से दुश्मनी क्योंकि उन्होंने हमारे ऊपर हुकूमत की और हमारे ऊपर ज़ुल्म किये।   लेकिन यह क्या जिस सिख़ समाज को २०१९ के पहले और २०२० तक हर इंतेखाब में गले लगाते नहीं थकते थे, वही आज इनको गद्दार नज़र आने लगे।  यह वही सिख़ समाज है जिसको ८४ के दंगों का इन्साफ दिलवाने के लिए मोदी से ले कर योगी और संघ से ले कर शाह जी और उनकी सियासी हिकमत पूरी करने वाली फ़िल्मी नचौड़ी बीजेपी एक सूर में बोल पड़ते थे हम इन्साफ दिलवाएंगे।   लेकिन २०२० के बाद ऐसा क्या हुआ की तमाम सिख़ ब्रदर इन संघी को दुश्मन नज़र आने लगे।    

मतलब साफ़ है इन भगवा ज़हर का हमदर्दी का पैमाना भी और प्यार का दिखावा एक छलावा है नाटक है।  इनको उसी समाज से मोहब्बत और हमदर्दी होती है जो इनके सियासी नफे का बाइस बनता है।  जब तक सिख़ इनको वोट दे रहे थे पंजाब में हुकूमत चला रहे थे तब तक सिख़ अच्छे थे जब सीखो ने अपना हक़ माँगा तो उनको गाडी से कुचल डाला।  ८०० के क़रीब किसान शहीद कर दिए गए लेकिन वज़ीरे आज़म ने एक अलफ़ाज़ हमदर्दी का नहीं बोला।  कुछ संघी बोल रहे हैं की मेरे सिख़ बोहोत अच्छे अहबाब हुआ करते थे और उन पर बोहोत भरोसा था लेकिन अब उनको में दुश्मन की फेहरिस्त में रखता हूँ।  मेरा उन जैसे तमाम संघी और भगवा ज़हर से सिर्फ एक ही सवाल है सिद्दू पा जी और वज़ीरे आला चन्नी पर इतना गुस्सा दिखा रहे हो और तमाम सिख़ बरादरी को गद्दार बोल रहे हो फिर कैप्टन अमरेंदर सिंह के क्यों आगे पीछे घूम रहे हो।  क्यों अकाली दल से मोहायदा करने को बक़रार हो।  अगर सिख़ गद्दार हैं उन्होंने मोदी से उनकी औक़ात पूछ ली  तो अकाली और अमरेंद्र  कौन     हैं क्या वोह सिख़ नहीं हैं।  यह अच्छे भगवा और बुरे भगवा क्या है।  सभी भगवा धारी ज़हरीले और गद्दार होते हैं।   दोस्ती के नाम पर जो पीठ में छूरा घोपते हैं।  

नाज़रीन फिर शिव सेना के साथ क्या हुआ, ग़द्दारी किस ने की अच्छे भगवा ने या बुरे भगवा ने।  शिव सेना भी तो कई सालों तक तुम्हारे साथ थी लेकिन आज उद्धव ठाकरे को वही गाली गलोच जो मुस्लिम, क्रिस्टी और सिखों को दी जाती है दी जा रही है।   उद्धव ठाकरे की अहलिया की शान में बदकलामी करने की जुर्म में एक बीजेपी का सियासत दान पकड़ा गया है और पुलिस उसका खूब पिछवाड़ा सुर्ख कर रही है। 

नाज़रीन मसले का लब्बो लुब्बाब यह निकल कर आता है की गद्दार है अगर कोई तो वोह है सिर्फ और सिर्फ संघी, शिद्दत पसंद हिन्दू और बीजेपी वाले अगर इनको वतन अज़ीज़ से बहार कर दिया जाए तो मेरा भारत फिर से महान होगा। 

Zuber 

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