नाज़रीन
सहाफी का मज़मून दो हिस्सों में मुश्तमिल है.
पहला हिस्सा आज की
हुकूमते हिन्द की कारगरदेगी में मुन्नासिर है, जबकि दूसरा हिस्सा बचपन की एक कदीम कहानी पे मुन्नासिर है.
पहला हिस्सा
आज के दौर के भारत का भी वही हाल है जैसा के बादशाहों के वक़्त होता था. लंगूरों की टीम का इसतेसाल किया जाता है उनको जेल जाने की धमकी या टैक्स लगा दिया जाता है. फिर लंगूर भी एक गुलाम की तरह वही करतें हैं जो बादशाह सलामत चाहतें हैं. जिस तरह आज़ाद कश्मीर पे सर्जिकल स्ट्रीक की कहानी को बे पनाह इश्तेहार दे कर आज के दौर के बादशाह अपना सियासी नफा देख रहें हैं. लंगूरों के हिसाब से १००० किलो ग्राम विस्फोटक और ३०० बमों की बारिश दहशतगर्दों के अड्डों को तबाह करने के लिए की गई. इतना विस्फोटक पूरे शहर को नेस्त नाबूत करने के लिए काफी है. और जब पूरा शहर राख का ढेर बन जाता है तो उसका मलबा हटाने, लाशों को दफ़नाने और मज़ीद कई इक़दाम करने की ज़रुरत होती है. अब ऐसे हमलों का नशर उस मुल्क का मिडिया बा खूबी करता है. लेकिन ना तो अभी तक पाकिस्तान के किसी भी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने ऐसी एक भी तस्वीर शाया की है. और ना ही बिलडोज़र से हटाते हुए मलबे की तस्वीरें या वीडियो देखे जा सकतें हैं. अमेरिका पे ९/११ के हमलो की तस्वीरें आज तक गूगल में मौजूद हैं.
फिर
सर्जिकल स्ट्राइक का ये ख्याली पुलाव सिर्फ एक तरफ़ा है, क्योंकि पाक मिल्ट्री सरबराह
जनरल मेजर गफूर ने किसी भी ऐसे हमले और इंसानी मौत का इंकार किया है. दूसरी बात जिस तरह से भारतीय मीडिया मंसूबा बंदी
कर रहा है की २१ मिनट से ज़ाइद भारतीय तय्यारे पाकिस्तानी फ़िज़ाओं में घूम रहे थे और
बम बारी करते रहे. इस दौरान ३०० बम गिराए गए
जिसमे ३०० अफ़राद जांबाहक हुए. हसी आती है. पहली बात २१ मिनट तक पाकिस्तान अपनी फ़िज़ाओं में
दुश्मन के तय्यारों को घूमने फिरने देगा और बरियानी खिलायेगा. क्या शादी में बिन बुलाये मेहमान हैं वो तय्यारे,
नहीं वो दुश्मनी निकालने वाले बम बरसाने वाले तय्यारे हैं और उनको फ़ौरन मार गिराया
जाता.
दूसरी
बात क्या पाकिस्तान भारत में रहने वाले बेबस मुसलमान की तरह है जिनको ४० - ५० आदमखोर
लीचर्स का झुंड जब चाहे लीच कर दें और वो मुसलमान अपना नसीब समझ के मार खाता रहे. नहीं अगर २१ मिनट तक भारतीय तय्यारे पाकिस्तानी
फ़िज़ाओं में रहते तो उसका माकूल जवाब पाकिस्तानी राडार और एंटी मिसाइल सिस्टम देता. तीसरी बात ३०० बम गिराए और ३०० अफ़राद हलाक हुए,
मतलब एक बम पे एक इंसान ये बात भी कुछ हज़म नहीं हो रही है. अगर एक बम की कुव्वत और ताक़त १० अफ़राद को मारने
की है उस हिसाब से ३०० बम कितने अफ़राद मार सकते थे.
पाक
पे हमले का फलसफा सिर्फ और सिर्फ भारत के मिडिया की तरफ से अवाम के दिलों दिमाग का
सर्जिकल स्ट्राइक है. जिसकी ना तो अभी तक भारीतय
फौज ने, ना ही वज़ीरे दाखला और ना ही वज़ीरे
खारजा ने ऑफिसियल तस्दीक की है. दूसरी तरफ
ना तो पाक हुकूमत ने और ना ही पाक फौज ने किसी भी ऐसे हमले की तस्दीक की है बल्कि ऐसे किसी भी हमले का और किसी
भी इंसानी हलाकत का इंकार किया है.
अब
आप एक तरफ़ा हमले पे खुशी बनाते रहिये, और दिवाली से बचे हुए पटाखे अब इस्तेमाल कीजिये. वैसे
भी झूटी कारगरदेगी पे आपको अपना नाम करना खूब आता है. मुगलों की बनाई हुई हर इमारत
को आप लोग जब अपना नाम देने से नहीं चूकते तो झूठे सर्जिकल स्ट्राइक की बात तो बोहोत
छोटी है. फिर आप लोग तो तारिख तक तब्दील कर देते हो तो झूठा
सर्जिकल स्ट्राइक क्या चीज़ है. आप लोगो के
हिसाब से मोहम्मद गौरी से पृथ्वी राज चौहान, अकबर से हल्दी घाटी में राण प्रताप और
औरग़ज़ेब से शिवाजी जीता था. फिर ये आप लोग ही
हो जिसमे लंगूरों से ले कर तो बीजेपी के मंत्री तक मुगलों की सभी तामीर करदा इमारतों ताज महल, बाबरी मस्जिद, दिल्ली
जामी मस्जिद, चार मीनार, धार जामी मस्जिद और ना जाने कितनी इमारतों पे अपना झूठा हक़
जताते हो.
मोदी
जी ने तमाम मीडिया को या तो जेल जाने की या टैक्स चोरी की धमकी दी होगी, तभी तो सभी
मीडिया मोदी के हुकुम के गुलाम बन के झूटी सच्ची बातों में मुश्तमिल हो रहे हैं. मोदी ने पूरा गेम बोहोत सोच समझ के खेला है. पिछले
एक साल से जिस तरह से बीजेपी और मोदी की साख मुतावातिर गिर रही थी उसका ख़मयाज़ा हर हाल
में बीजपी को भोगना पड़ता. और इस सहाफी ने पूरे एन.डी.ऐ. को एक दम दुरुस्त १३० से १५० का फिगर दिया है. उस
हिसाब से बीजेपी तो सरकार बनाने में बोहोत दूर है. फिर क्या था पार्लियामेंट का आखिर इजलास १३ फरवरी
को ख़त्म हुआ और १४ को अटैक करवा दिया. क्योंकि
अब कोई और इजलास नहीं होना है तो कानून साज़ मोदी हुकूमत से सवाल जवाब तलब नहीं कर सकते. फिर अब तो ख़ास इजलास की भी कोई नौइय्यत नहीं है,
क्योंकि अब मोदी हुकूमत केयर टेकर वाली हुकूमत की हैसियत से काम कर रही है और इंतेखाबात
में सिर्फ २ महीने बचे हैं.
देखिये
किस चालाकी से पूरे अवाम का ज़ेहन ही दूसरी तरफ लगा दिया जिन मुद्दों पे मोदी हुकूमत
घिरती नज़र आ रही थी अब उन पे तब्सिरा ही नहीं होता.
१. राफेल
२. मेह्गाई,
३. अकलियतों
के हुकूक
४. मसलाये कश्मीर
५. हिन्दू आतंकवाद
६. राम मंदिर
७. जमुहरियत का क़त्ल
७. बेन अक़वामी सतह पे मुल्क की गिरती साख.
पुलवामा
अटैक की तपिश से बचने के लिए झूठा सर्जिकल स्ट्राइक करवा दिया. फिर क्या था मिडिया के लंगूर, भक्त, अंध भक्त, तशद्दुत
पसंद हिन्दू अवाम को वतन की मोहब्बत की गाजर लटका के पूरे मुल्क में खुशी का तूफ़ान
मचा दिया जिससे के मोदी की साख पहले से और बढ़ जाए, और राये शुमारी को सख्त तरीन मुत्तासिर
किया जा सके. अगर सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था
तो पहले की सरकार या राहुल का नाम ले के भक्तों के ज़रिये मुक़ाबला करने की क्या ज़रुरत
है. ठीक है वतन के लिए कुछ अच्छा काम हुआ तो उसमे किसी भी सरकार का मुक़ाबला भक्तों
के ज़रिये अपने आपसे करने की क्या ज़रुरत है.
आज १९७१ का नाम ले कर कांग्रेस तो किसी भी संघी या मोदी जी से उसका मुक़ाबला
नहीं करते है. मतलब साफ़ है सर्जिकल स्ट्राइक
को राहुल बनाम मोदी और कांग्रेस बनाम - बीजेपी बना के २०१९ पे राय शुमारी को सख्त
तरीन मुत्तासिर करने की मोहीम है.
इस हमले पे अपने चाहते मोदी साहब के मुवाफ़ेक़त में कसीदे कसने वालों में सिर्फ लंगूर और भक्त ही नहीं हैं ब्लकि अला ओहदेदार मंत्री योगी और अनिल विज़ जैसे लोग भी शामिल हैं. कोई कह रहा है बदला लेने की कूव्वत तो सिर्फ मोदी जी में ही है. कोई कह रहा है की शेर के बच्चे ने ५६ इंची छाती दिखा दी. अब ये देखना दिलचस्प होगा की इस ५६ इंची छाती का आशिक भक्तो और लंगूरों के अलावा और कौन होता है या इस ५६ इंची छाती को देख कर लोग डर के दूर भागते हैं. दूसरी बात इतना बड़ा हमला होने के बाद कोई भी मुल्क जल्दी संभल नहीं पाता है लेकिन ये क्या अभी हमला हुए २० घंटे भी नहीं हुए थे की पाक ने बॉर्डर पे गोली बारी की जिसकी वजह से ३ भारतीय जवान मारे गए और ३ शदीद ज़ख़्मी हो गए.
दूसरा हिस्सा
एक बार बादशाह अकबर अपने दरबार में मौजूद दरबारिओं के क़ौल फेल का मुताला कर रहे थे. इतने में कुछ लंगूर और लँगूरनियाँ दरबार में हाज़िर हुए और बादशाह सलामत की शान में कसीदे बाज़ी करने लगे. एक लँगूरनी ने बादशाह का नाम अपने नाम के आगे लगा कर उनको मुत्तासिर करने लगी. मज़ीद उसने कहा वो बादशाह की हर ख्वाहिश पूरी करने को तैयार है. बादशाह ने लंगूरों की टीम से पुछा आप लोगों ने इतना अच्छी कसीदे बाज़ी कहाँ से सीखी. उसपे लंगूर बादशाह को और उनके महल को मज़ीद इज़्ज़त देने के लिए झूट और फरेब फैलाने लगे और बोले. इज़्ज़त माब हम लोग आपके महल से १० कोस दूर गांव में रहते है लेकिन आपकी महल की जो रौशनी होती है उसमे रात को पढ़ाई लिखाई कर के हम आपके और आपके महल की रौशनी के शुक्रगुज़ार हैं. उसके ऊपर बादशाह ने उनका इसतेसाल करना शुरू कर दिया और बोला, आपलोगों ने बादशाह के महल की रौशनी इस्तेमाल की है मतलब माले गनीमत इस्तेमाल किया है, अब या तो आप उसका उज्र दीजिये या जेल जाइये. लंगूरों की टीम परेशान हो गई. बात बीरबल तक पहुंची. बीरबल ने कहा फ़िक्र मत करो कल जब दरबार लगे तो हम भी मौजूद होंगे, ना आपको उज्र देने की ज़रूरत पड़ेगी और ना है जेल होगी.
इस हमले पे अपने चाहते मोदी साहब के मुवाफ़ेक़त में कसीदे कसने वालों में सिर्फ लंगूर और भक्त ही नहीं हैं ब्लकि अला ओहदेदार मंत्री योगी और अनिल विज़ जैसे लोग भी शामिल हैं. कोई कह रहा है बदला लेने की कूव्वत तो सिर्फ मोदी जी में ही है. कोई कह रहा है की शेर के बच्चे ने ५६ इंची छाती दिखा दी. अब ये देखना दिलचस्प होगा की इस ५६ इंची छाती का आशिक भक्तो और लंगूरों के अलावा और कौन होता है या इस ५६ इंची छाती को देख कर लोग डर के दूर भागते हैं. दूसरी बात इतना बड़ा हमला होने के बाद कोई भी मुल्क जल्दी संभल नहीं पाता है लेकिन ये क्या अभी हमला हुए २० घंटे भी नहीं हुए थे की पाक ने बॉर्डर पे गोली बारी की जिसकी वजह से ३ भारतीय जवान मारे गए और ३ शदीद ज़ख़्मी हो गए.
दूसरा हिस्सा
एक बार बादशाह अकबर अपने दरबार में मौजूद दरबारिओं के क़ौल फेल का मुताला कर रहे थे. इतने में कुछ लंगूर और लँगूरनियाँ दरबार में हाज़िर हुए और बादशाह सलामत की शान में कसीदे बाज़ी करने लगे. एक लँगूरनी ने बादशाह का नाम अपने नाम के आगे लगा कर उनको मुत्तासिर करने लगी. मज़ीद उसने कहा वो बादशाह की हर ख्वाहिश पूरी करने को तैयार है. बादशाह ने लंगूरों की टीम से पुछा आप लोगों ने इतना अच्छी कसीदे बाज़ी कहाँ से सीखी. उसपे लंगूर बादशाह को और उनके महल को मज़ीद इज़्ज़त देने के लिए झूट और फरेब फैलाने लगे और बोले. इज़्ज़त माब हम लोग आपके महल से १० कोस दूर गांव में रहते है लेकिन आपकी महल की जो रौशनी होती है उसमे रात को पढ़ाई लिखाई कर के हम आपके और आपके महल की रौशनी के शुक्रगुज़ार हैं. उसके ऊपर बादशाह ने उनका इसतेसाल करना शुरू कर दिया और बोला, आपलोगों ने बादशाह के महल की रौशनी इस्तेमाल की है मतलब माले गनीमत इस्तेमाल किया है, अब या तो आप उसका उज्र दीजिये या जेल जाइये. लंगूरों की टीम परेशान हो गई. बात बीरबल तक पहुंची. बीरबल ने कहा फ़िक्र मत करो कल जब दरबार लगे तो हम भी मौजूद होंगे, ना आपको उज्र देने की ज़रूरत पड़ेगी और ना है जेल होगी.
दुसरे रोज़ फिर दरबार सजा कारवाही शुरू होते ही बीरबल बोले बादशाह सलामत दरबार की कारवाही तो होती रहेगी आइये पहले पुलाव खाते हैं. बादशाह, बीरबल और तमाम दरबारी लंगूरों की टीम के साथ एक खुली जगह पहुंच गए. अब बीरबल ने एक सबसे ऊंचे दरख्त की टहनी पे एक काठ की हांडी बांध दी और उसके नीचे थोड़ी से आग सुलगा दी. अब सभी पुलाव तैयार होने का इंतज़ार करने लगे. कई घंटे बैठे रहने के बाद आखिर बादशाह सलामत से रहा ना गया और बोल उठे. बीरबल हांड़ी तो इतनी ऊपर है और आग इतने नीचे कैसे पुलाव और कब पकेगा. बीरबल फ़ौरन बोल उठा. बादशाह सलामत ठीक उसी तरह इन लंगूरों का गावं भी आपके महल से कोसो दूर है फिर ये कैसे आपके महल की रौशनी इस्तेमाल कर सकतें है और कैसे माले गनीमत इस्तेमाल करने के जुर्म में इनको जेल हो सकती है.
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