Tuesday, 19 February 2019

ऐसे ही दफ़न होते हैं अवाम से जुड़े हुए मुद्दे.

नाज़रीन देखा आपने, कैसे इंतेखाबात से क़ब्ल अवाम के ज़हन को किसी दूसरी ही तरफ घूमा दिया.  इस ही को कहते हैं सियासत दान जो ना सिर्फ वतन के अवाम की लाशों पे बल्कि आर्मी जवानों की लाशों पे भी सियासत करता है.  २०१८ में कुछ एक मज़मूनों और "आज तक" की डिबेट में इस सहाफी ने साफ़ अलफ़ाज़ में बोला था जब मोदी जी बोहोत ही फेकम बाज़ी कर रहे थे.  अब फेकने का वक़्त गया अब हिसाब किताब का वक़्त है.  अवाम आपसे आपके किये हुए कामों का हिसाब लेगी. 

२०१८ के इख़्तेदाम यानी दिसम्बर के महीने से ले कर मई २०१९ तक ५ महीने इस सहाफी ने मोदी जी के हिसाब किताब के लिए रखे थे.  और अवाम को खुली छूट दी थी के मोदी के ऊपर सवालों के हमले का वक़्त और जगह  खुद ते करेगें.  उसके लिए उनको किसी की भी इजाजात की ज़रुरत नहीं है.  क्योंकि अगर ४.५ साल में अवाम के लिए कुछ भी भलाई के काम किये होते तो अपनी सरकार के किये हुए अच्छे कामों का बयान करने के लिए ५ महीने भी थोड़े होतें हैं.   हालांकि मोदी और बीजेपी को इस बात का इल्म हो गया था की उनके लिए २०१९ में राहें अब पहले जैसी साज़गार नहीं रही.  हर मुद्दे पे मोदी हुकूमत फ़ैल रही जिसकी वजह से अवाम में ज़बरदस्त मुखालीफे रुझानात हैं.  ये कारगरदेगी मोदी हुकूमत की सिर्फ ५ साल की सरकार की थी. अब उनको लगने लगा था हमारा इस पार्लियामेंट से रुखसत होना ते है क्योंकि जो भी दूसरी सरकार आएगी अवाम पे किये हुए एक एक ज़ुल्म और आंसूं का हिसाब मांगेगी. 

बीजेपी के सियासतदान मंत्री संत्री कहतें हैं की पुलवामा पे हमको भी बोहोत तशवीश है और हम उसका सियासी नफा नहीं लेना चाहते तो हर मीडिया चैनल में पुलवामा की ही बातें काहे को हो रही हैं.  एक तरफ अवाम को मिडिया के द्वारा पुलवामा के नाम पे मज़ीद गुबार भर के गुमराह जा रहा है दूसरी तरफ बीजेपी अपनी सियासी कारगरदेगी पूरी तरह से निभा रही है.  कल महाराष्ट्र में शिव सेना के साथ इत्तेहाद कर लिया और आज तमिलनाडु में ऐ.आई.डी.ऍम.के से इत्तेहाद कर लिया.  अब महाराष्ट्र में २५ सीटों पे बीजेपी और २३ पे शिव सेना और तमिल नाडु में बीजेपी को ५ सीटें लड़ने को मिल रही हैं.  सबसे बड़ी बात जो बीजेपी का किरदार रहा है गले लग के पीठ पे खंजर खोप देना वही हाल इस हमले के बाद अवाम को गले लगा के ख़ामोशी से क़त्ल कर डाला.  जब वतन का अवाम अपने गम में डूबा था तब बीजेपी ने उन तमाम मसाईल पे कफ़न डाल दिया जो उसके लिए इंतेखाबात में मुज़िर साबित हो सकते थे.  बीजेपी पार्लियामेंट में भी ऐसी ही कारगरदेगी के लिए मशहूर है.  जो कोई बिल उसके मुवाफ़ेक़त का होता है जिसका के उसको सियासी नफा होने वाला होता है कानून साज़ों को भी ऐसे ही गुमराह कर के बिल पास करवा लिया जाता है. 

जो सवालात की फेहरिस्त बीजेपी के लिए मुज़िर साबित होती जा रही थी अवाम के जो सवाल बीजेपी के मंत्रिओं के सामने एक पहाड़ के मानिंद खड़े थे उन सवालात पे अब तब्सिरा और गुफ्तगू काहे को नहीं हो रहा है.  फिर मीडिया भी संघी आतंकवाद ज़ेहनियत के बूढ़े रिटायर्ड ज़हरीली ज़ेहनियत आर्मी के लोगों को बुला रही है जो अवाम के दिलो दिमाग में मज़ीद आलूद और मवाद कायम रख सकें और इंतेखाबात तक ये आलूद ज़िंदा रहे ताके उसका फायदा बीजेपी को मिल जाए.  

जिस तरह से बूढ़े संघी दहशतगर्दाना ज़हरीले, मवादी आर्मी अफसर पाकिस्तान पे हमला करने और पुरानी जंगों की याद दिहानी कर के अपना ५६ इंची सीना चौड़ा कर रहे हैं उससे सिर्फ और सिर्फ अवाम के दिल में बीजेपी की लिए ये संघी दहशतगर्दाना ज़हरीले, मवादी आर्मी अफसर उनसियत भर रहें हैं उनका और मीडया का मकसद भी वही है जिसके लिए बुढ़ापे में इन आर्मी ऑफिसर्स और मिडिया को बीजेपी और सरकार से पैसा मिलता है.  वतन के नाम पे फ्री फुग्गे का बीजेपी के लिए इश्तेहार.  कोई भी दानिशमंद और अक़लमंद, पढ़ा लिखा इंसान समझ सकता है की जितनी आसानी से जंग की बातें कही जा रही हैं वो उतनी आसान नहीं हैं.   जब किसी भी मुल्क से जंग के हालात होते हैं तो सबसे पहले दोनों तरफ के सिफारातखानें बंद होते हैं.  फिर अक़वामे मुत्तहेदा में इस तरह की एक सिफारिश की जाती है की इस मुद्दे पे हम जंग लड़ रहे हैं.  दोनों तरफ से किसी भी तरह का मज़ाकिरात नहीं होता.  तिजारत, कारोबार और ज़राये आमद रफ़्त पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है.  दोनों तरफ की हवाएं और पानी क़ैद हो जाते हैं.  अब अगर पाकिस्तान की हवा में ना सिर्फ जंगी बल्कि अवामी तय्यारा घुसा के फ़ौरन उसको मार गिराया जाएगा और वैसा ही भारत की तरफ से होगा.   वही हालात पानी के होंगे, पाकिस्तानी दरिया में कोई भी कश्ती घुसी तो उसको पकड़ा नहीं जाएगा बल्कि फ़ौरन शूट कर दिया जाएगा और वैसा ही भारत की तरफ से होगा.  

फिर सरकार की तरफ से एलान किया जाता है दुसरे मुल्क को एक मुक़र्ररा वक़त पे हमारी ये मांग पूरी करो नहीं तो जंग के लिए तैयार रहो.  फिर हमला होता है.  लेकिन ऐसा तो कुछ भी नहीं है. ज़राये आमद रफ़्त पूरी तरह से चालू है, तिजारत चालू है, मुज़किरात चालू है वहाँ की खबरे यहाँ मालूम पड़ रही हैं और यहाँ की खबरे वहाँ.   तो मोदी सरकार बीजेपी वाले और लंगूर मीडिया ज़हरीले बूढ़ों की कयादत कर के किस को बेवकूफ बना रहे हैं.  जंग इतना आसान नहीं है उसके लिए अभी तक ना तो मोदी ने और ना ही इमरान खान ने वैसे हालात दिखाए हैं.  ये सिर्फ ज़ुबानी जमा खर्च इंतेखाबात तक रहेगी.  और इन आर्मी के बूढ़ों की ज़ुबानी जमा खर्च है और कुछ नहीं.      

दूसरी बात अगर जंग लड़ना सरकार का मकसद होता तो इंतेखाबात की तैयारी ना की जाती.  शिव सेना से और तमिल नाडु में इत्तेहाद करना ही इस बात की दलील है की हुकूमत को जंग नहीं लड़ना है, क्योंकि अगर जंग लड़ना मकसद होता तो काहे का इत्तेहाद और काहे का इंतेखाबात फिर उस तरह से मामले की नज़ाकत समझमे आती.  फिर जंग लड़ने के लिए पार्लियामेंट से इजाज़त ज़रूरी होती है,  और अब तो कोई पार्लिअमानी इजलास नहीं होने वाला है और अब तो ख़ास इजलास की भी कोई नौइय्यत समझ में नहीं आती तो किस को ये संघी और बीजेपी वाले बेवकूफ बना रहे हैं. 

अभी तक ना ही भारत ने और ना ही पाकिस्तान ने सरहद पे टैंक, तोप और अपनी अपनी आर्मी की अक्सरियत को बढ़ाया है और ना ही दोनों मुल्कों के सरहदी बाशिंदों को मेहफ़ूज़ जगह ले जाय गया है.  तो अभी तक जंग के हालात इस सहाफी को नज़र नहीं आते.  हाँ लंगूर और लँगूरनियाँ बूढ़े ज़हरीली ज़ेहनियत के साथ अवाम के अंदर हम जंग लड़ेगें  के शक और उलझन को कायम रखेगें.    

जंग की गाजर सिर्फ और सिर्फ इन्तेख़ाबात तक लटकी रहेगी और इस लटकती हुई गाजर के पीछे बीजेपी अपना इन्तेख़ाबी नफ़ा देख रही है, और उसकी कारगरदेगी पूरा करने की कोशिश कर रही है.  अब ना कोई मुखालिफ सवाल कर रहा है और ना ही कोई जिन्न परेशान कर रहा है और मीडिया की लँगूरनियाँ रस्ते की गर्द, गुबार नीचे की घांस बूढ़े ज़हरीले आलूद मवादी आर्मी अफसरों से साफ़ करवाते चल रहीं हैं ताके इन्तेख़ाबात तक बीजेपी को मिले साफ़ सुथरा एहसास, और उनके लिए अपनी ख्वाबगाह (पार्लियामेंट) में जाने से पहले सेज सजी हुई मिले.

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