Sunday, 3 February 2019

हुकूमते हिन्द में बेटियों के बाद बहुवें भी मेहफ़ूज़ नहीं.


मुजाहिदीनों के बहाली की हिकमते अमली के तहत अपने शौहरों के साथ मकबूजा -कश्मीर आईं पकिस्तान की ख्वातीनों के एक वफंद ने बरोज़ हफ्ते को पाकिस्तानी वज़ीरे आज़म इमरान खान से गुज़ारिश की है कि वे सभी को वापस बुला लें क्योंकि वे सबसे खराब हालात में हैं और उन्हें ज़िन्दगी और इज़्ज़त का खतरा है । ग्रुप लीडर का वीडियो देखें।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें हस्बे वादे मुस्तक़िल रिहाइशी सर्टिफिकेट फ़राहम नहीं किए गए हैं। इस हिसाब से हुकूमते हिन्द ने वादे की खिलाफवर्जी की है.  वफंद के एक रकून की वीडियो बातचीत देखें।

२००१ में, एन.सी. के नायब सदर और फिर वारीरे आला  उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के उन भटके हुए नौजवानों के बहाली की हिकमते अमली का एलान किया था.  जो एल.ओ.सी. पर हथियारों की तरबियत के लिए गए थे, लेकिन बाद में दहशतगर्दी को रुखसत  कर दिया था और एक आम ज़िन्दगी की क़यादत में जीने के लिए वतन और घर लौटना चाहते थे।

ख्वातीनों ने एक बयान में कहा,  "जब से हम अपने शौहरों और बच्चों के साथ उमर अब्दुल्ला हुकूमत की तरफ से एलान करदा बहाली की पालिसी के तहत यहां आए हैं, लेकिन हमें पी.आर.सी. दस्तावेज फ़राहम नहीं कराया गया है।"

"बरक्स उसके हमारे खिलाफ ऑफ.आई.आर. दर्ज हो गई है, और हमें जबरन कोर्ट कचहरी और मुकदमात में मुल्लाव्विस कर दिया गया है."  उन्होंने आगे मज़ीद कहा.

वादी ए कश्मीर के मुख्तलिफ हिस्सों से आने वाली ख्वातीनों ने  रेसीडेंसी रोड श्रीनगर में मुत्तेहद हो कर अपने मुतालबात पर ज़ोर डाला.

"हम भारत पाकिस्तान के वारीरे आज़म और दोनों मुल्को के वज़ीरे खारजा से अपील करतें है की हमें सफर करने के दस्तवेजात इंसानी हुकूक के हवाले से फ़राहम करें".

रकून ने आगे कहा अगर वो हमें सफर करने के दस्तावेज़ जारी नहीं करते तो हम बहार निकलने के लिए बनते हैं."

ख्वातीन ने आगे कहा "रियासत में इनकी आमद के बाद, पाकिस्तान में वो अपने खानदान और दिगर अवाम से मिलने के काबिल नहीं रहे"

हमारे क़रीबी रिश्तेदार जिसमे हमारे वाल्दैन शामिल है इस अर्से में फ़ौत हो गए. जिसकी वजह से हम अज़हद सदमे में रहे.  ख़वातीन ने दावा किया की हम अपने रिश्तेदार, और हम वतनों की फलहा और बहबूती के लिए वतन वापिस आना चाहतें हैं".

सहाफी जुबेर की मामले पे तशख़ीस

मुझे लगता है क्लिपिंग देखने के बाद किसी को भी पाकिस्तान की निस्बत से ज़र्रा बराबर शुबा नहीं होना चाहिए के वो ख्वातीनों के हुकूक के तहफ़्फ़ुज़ के मामले में एक बदतरीन मुल्क है, वहाँ ना इंसाफ़ी और इंसानी हुकूक की हकतलफी की जाती है, जो दहशतगर्दों के लिए मेहफ़ूज़ जन्नत है. सच्चाई कई मर्तबा बरहना हो चुकी है, जब इस सहाफी ने दोनों मुल्कों के दरमियान मुक़ाबले में पाया की पाकिस्तान कई एतेबार से अपने सख्त मुखालिफ भारत से कई गुना बेहतर है.  इन्साफ और जीने का हक़ इंसानियत के तक़ाज़े के एहम हिस्से हैं.  और भारतीय इंतेज़ामिया ना सिर्फ अपने शहरियों बल्कि पाकिस्तान की बेटियों को वो हक़ देने में ना काम साबित हुआ.   जो कश्मीरी अवाम के साथ शादी कर के भारत में आईं थीं.  और उनसे वादा किया गया था की उनको मुजाहिदीनों के बहाली की हिकमते अमली के तहत बेहतर ज़िन्दगी फ़राहम की जायेगी.  लेकिन उनकी ज़िन्दगी यहाँ दोज़ख का अज़ाब बन गई.  इन लोगों को हमेशां यहाँ हर दूसरी सुबह भारतीय फौज की वजह से अपनी ज़िदगी, गिरफ्तारी और इज़्ज़त के उतर जाने का खतरा बना रहता है. क्योंकि इनके पास कागज़ात की कमी है.  जो अब जहन्नुम से निकल के पाक जाना चाहतीं हैं.

भारतीय इन्तेज़ामियाँ ने पाकिस्तान की बेटियों के साथ धोखा किया है, जबकि भारत की बेटीयाँ (हिन्दू बहनें) पाकिस्तान में ना सिर्फ मेहफ़ूज़ हैं बल्कि खुश और खुर्रम हैं.   जिन सभी ने हाल ही के सालों में मोदी के आने के बाद पाकिस्तानी शेहरीयों से शादी की है.  उन सभी को पाकिस्तानी शहरियत और एक शहरी के हुकूक हासिल हैं.

मोदी हुकूमत जब अपनी खुद की बेटीयों की हिफाज़त करने में ना काम साबित हुई और बेटीयाँ मेहफ़ूज़ नहीं हैं तो बहुएँ कहाँ से मेहफ़ूज़ होंगीं, उनका नारा "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" बीजेपी के क़ानून साज़ों और रकून साज़ों ने गलत तरीके से लिया "बेटी बचाओ, हम आ रहे हैं",  कोई भी बा इज़्ज़त शहरी कठुआ की उस ८ साल की बच्ची का भयानक मजमूई अस्मत दरी और उसका क़त्ल नहीं भूल सकता.  फिर मुजरिमों की हिमायत में बीजेपी के वज़ीर आ गए.  अभी तक भारत में बेटीयाँ मेहफ़ूज़ नहीं थीं लेकिन अब भारीतय अवाम को बहादुरी से इस बात को तस्लीम करना चाहिए और कहना चाहिए की हमारी बहुवें भी मेहफ़ूज़ नहीं हैं.

अब मोदी का नया नारा होगा "बेटी बचाओ, बहू भगाओ"


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Now Daughters in law are not safe in India



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