नाज़रीन मेरे हमख्याल सहाफिओं और हमक़दम साथिओं,
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लाशों पे सियासत करना कोई भी बाविकाकर और बा
इज़्ज़त शहरी नहीं चाहेगा. अब जिसका विकार और
हिस अपने अना को क़याम रखने के लिए होगा, वो मुल्क के अवाम को क्या फ़ौजिओं की लाशों
पे भी सियासत करने से बाज़ नहीं रहते. हालात की पेचीदगी और संजीदगी का इल्म इस सहाफी को
पहले ही हो चूका था, जिसको एहले ज़ौक़ या एहले तरीक़त हज़रात इहलाम, मेडिकल साइंस में ६टा
एहसास या ६टी इंद्री कहते हैं. लेकिन संघी
दहशतगर्द उसको मुलव्विस होना कह रहे हैं, जो सरा सर गलतबयानी है.
ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम अभी तक ये मान के
चल रही है और जो मालूमात इकट्ठा की है उससे ये ज़ाहिर हो रहा है की पुलवामा में जो कुछ
भी हुआ ये एक हादसा था. बिल फ़र्ज़ अगर ये दहशगर्दाना
हमला था तो उसकी ज़िम्मेदारी भी पूरी तरह से हुकूमते हिन्द के ऊपर आएद होती है. क्योंकि इस सहाफी का कोई भी मजमून इसीलिए ही होता
है के उसको पड़ कर हुकूमत अपना निज़ाम सही और दुरुस्त कर लें. कांग्रेस के सरबराह ने
और कांग्रेसी सयासतदांओं ने इस सहाफी के मज़मूनों को पड़ के अपने आपको दुरुस्त किया जिसका
फायदा उनको वक़्त वक़्त पे मिला. लेकिन अब जिसके
दिलों दिमाग में आलूद और ज़हर भरा हो, जिसको सियासत में अपने कानून साज़ों की कुव्वत
पे फख्र हो जो ताक़त के नशे में चूर हो जो इस
सहाफी की दी हुई जानकारी की धज्जिया उड़ा दे और उसका मखौल उड़ाए तो ये उसकी नाहीली और
निकम्मा पन ही कहलाया जाएगा. फिर ज़िम्मेदारी
किसी और के ऊपर थोपने से अच्छा है की मर्कज़ खुद इस हमले की अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी लें और
अपने आपको मुल्क की जिम्मेदारिओं से आज़ाद करे.
पुलवामा में जो कुछ भी हुआ उसका ठीकरा नए दौर
के भारत के वज़ीरे अज़ाम पडोसी मुल्क पाकिस्तान पे थोप कर रहें हैं. ठीक है पाकिस्तान ज़िम्मेदार है लेकिन फ़ौजिओं के
तहफूज़ की ज़िम्मेदारी थोड़ी पकिस्तान के ऊपर है.
एक तरफ तो आप उसको अपना दुश्मन मान रहे हो दूसरी तरफ सैनिकों के तहफूज़ का एक़दाम
बराबर नहीं कर रहे हो तो दुश्मन का काम है ज़र्ब पहुँचाना आप उस ज़र्ब का शिकार हुए मतलब
नाहीली आपकी है. सबसे बड़ी बात अगर ये दहशतगर्द
हमला है तो इतनी बड़ी तादात में विस्फोटक आया कैसे. दूसरी बात अफ़ज़ल गुरु की बरसी के दिन से एक हफ्ता
पहले से ही सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया हुआ था फिर कैसे १५० से लेकर २५० किलो विस्फोटक
वाली कार फौजी कानवा में घूस गई, उस कार को रास्ते में किसी ने काहे को चेक नहीं किया.
इस सहाफी ने अक्टूबर २०१७ में गुजरात इंतेखाबात
से क़ब्ल वाज़े अलफ़ाज़ में ये बात कही है की मोदी सरकार अपनी गिरती हुई साख और ज़लालत से
बचने के लिए २००२ जैसा हमला करवा सकती है, लेकिन इस बार हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान
पे डाल दी जायेगी. देखिये मज़मून फिर हो सकता है गुजरात में २००२ जैसा हमला जिसकी
तस्दीक दो साल बाद अमेरिकन सिक्योरिटी एजेंसी एन.आई.ऐ. ने भी जनवरी २०१९ में कर दी
के मोदी हुकूमत राये शुमारी को मुत्तासिर करने और इंतेखाबात जीतने के लिए शदीद हिन्दू
मुस्लिम दंगे करवा सकती है.
फरवरी २०१९ में एक मज़मून मुसलमान हिन्दू दहशतगर्दों की इमदाद के मोहताज नहीं.... में इस सहाफी ने कुछ ८ नुक़्तों पे मोदी हुकूमत
को फ़ैल क़रार दिया है और उसके लिए इंतेखाबात में कोई भी सुरते हाल नहीं है जिसकी वजह
से वो हिन्दू शिद्दत पंसदों की राये शुमारी की यकजेहदी हासिल कर सके. उन नुक़्तों में ८वे नंबर पे है पाकिस्तान / कश्मीर
चलिए इस हमले के बाद आपके साथ पूरा मुख़ालेफ़ीन
आ गया लेकिन आप तो उस सानेहा के ऊपर अपनी सियासी दूकान दारी चालू कर रहे हो. हर सियासी रैली में उस हमले का बखान करने और बदला
लेने के सख्त अज़्म को बार बार दोहराने की किया वजह है. एक बार बोल दिया काफी है. उसकी सिर्फ दो वजह हो सकती है या तो आप को ये यकीन
नहीं है के मुल्क का अवाम अब आपकी फेक्कम बाज़ी पे यकीन करेगा या आप उस हमले का सयासी
नफा देख रहे हो. इस मसले पे आज तक पे इस सहाफी
ने एक ट्वीट किया है
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मोदी जी हो गया ना आपने अपने सभी भाषणों में प्रण ले लिया ना की
गुनहगारों को सजा ज़रूर मिलेगी. अब उसका राजनीतिकरण काहे को कर रहे हो. एक बार
आधिकारिक स्टेटमेंट जारी कर दीजिये बस हो गई बात खत्म. फिर करने दीजिये अधिकारियों
और सेना को अपना काम. जब काम हो जाएगा तब सभी को पता चल जाएगा. अब ऐसी बाते अपनी
राजनैतिक रैली में करने का क्या मतलब है. मतलब आप सेना के जवानों की मौत पे
राजनीति कर रहें हैं. आधिकारिक स्टेटमेंट और सरकारी आदेश जारी कर दिया तब भी देश
की जनता को पता चल जाता है उसको चुनावी सभाओं में ढिंढोरा पीटने की ज़रुरत ही नहीं
है. आज कल तो सोशल मीडिया का ज़माना है सब बातें और चीज़े तुरत जनता के सामने हाज़िर
हो जाती हैं.
दूसरी बात आपकी मीडिया ने मुल्क का माहौल इतना
गर्म कर दिया जिससे मुल्क के हर बाशिंदे को दहशत महसूस होने लगी. दीगर हिस्सों में रह रहे कश्मीरी तुलबा अपने आपको
एक मुजरिम जैसा महसूस करने लगे. मुल्क के दीगर
हिस्सों से कश्मीरी तुलबा के ऊपर तशद्दुत और जब्र की ख़बरें आने लगी. क्या ये ही आपकी और आपके मीडिया की हिकमते अमली
थी. अगर फ़ौजिओं पे पकिस्तान ने हमला किया तो
उसको ऐसा करने की हिदायत कहाँ से मिली क्योंकि आप चौकन्ने नहीं थे आप तो अपना सियासी
नफा देखने में मुल्क की दीगर एजेंसिओं को इसकी जासुसी उसकी जासूसी करने में इस्तेमाल
कर रहे थे तो उसका जो काम है मुल्क के वसाईलों के तहफूज़ के लिए वक़्त किधर मिलेगा.
इस बात का ज़िक्र ये सहाफी अपने कई मज़मूनों में
कर चूका है जब आप अपने हम वतनों की हक़ तल्फी करते हो और वतन का हर अवाम फ़िरक़ों और खित्तों
में बटा होता है जब आप अपने मसाइल इतने पेचीदा कर देते हो की उसी में उलझ जाते हो तो
दुश्मन को पूरी आज़ादी और इख़्तेयार होता है के आपके मुल्क में घुस कर ना सिर्फ हमला
कर दे ब्लकि अपने मक़सद में कामयाब भी रहे.
लेकिन अब मसला वही है के आप तो ठहरे ताक़त के नशे में चूर जो इस सहाफी के पोलिटिकल
पंडित की रिपोर्ट और जानकारी का मखौल उड़ाना जानते हो, तो उसकी जानकारी पे अम्ल करना
दूर की बात है.
दिल्ली हो या झारखंड, मध्य प्रदेश हो राजिस्थान हो हरयाणा हो या गुजरात महाराष्ट्र हो या कर्नाटका हर कुदरती बलियात और आफ़ात के बाद इस सहाफी ने ट्वीट कर के कभी पहले तो कभी बाद आगे के हालात से आगाही की है की ना इंसाफ़ी मत करो. यहाँ तक की दिसम्बर २०१८ में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसात पे तशवीश ज़ाहिर की है और मर्कज़ से वाज़े अलफ़ाज़ में कहा है की इतने लोग तो दहशतगर्दाना हमलों में नहीं मारे गए होंगे जितनी के आपकी सरकार आने के बाद हादसात का शिकार हो कर मारे गए. ट्वीट कर के या मजमूनों के ज़रिये आगे के हालात बयान कर देना वो भी इस सहाफी की ६टी सेंस ही थी अब इन ट्वीट के
बाद तो आपको और चौकन्ना होना चाहिए था. फिर
ये हमला पाकिस्तान ने कैसे कर दिया मतलब सिक्योरिटी में ज़बरदस्त चूक है.
दूसरी बात एक मुसन्निफ़ की सोच मुल्क के हालत
पे मुनासिर होती हैं और ख्यालात मुल्क में होने वाले हर रोज़ की ज्यात्ति, मार काट,
दहशतगर्दी, ना इंसाफ़ी, ज़िना बिल जब्र के ऊपर पैदा होतें हैं और मज़मूनों की खत वैसी
ही होती है. अगर मुल्क के हालात साज़गार होंगे
हर तरफ खुशहाली होगी, ठंडी हवाएं बह रही होंगी पुर सुकून माहोल होगा तो मुसन्निफ़ की
सोच भी वैसा ही काम करेगी और मज़मून भी बजाये नुक्ताचीनी के नफीस और दिल को सुकून पहुंचाने
वाले खुशदिल होंगें.
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