Friday, 15 February 2019

पुलवामा पे पहली नज़र.


आज १५ फरवरी २०१९ बरोज़ बुध दोपहर के कुछ ३ बजे के आस पास ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम पुलवामा हादसे की जगह पहुंची और उसने अपनी जांच पड़ताल शुरू की.  जैसा के हर नाज़रीन को ये मालूम होना चाहिए की ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम किसी भी ऐसे मुद्दे पे जिसपे की लंगूर सहाफिओं की राय कुछ और होती है और वो हक़ीक़त से नज़रिनों को रू बरू करवाती है.  ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को पहली नज़र में इस बात का शुबा हो रहा है की बजाये ये एक खुदकश हमले के हादसा हो सकता है जिसके ज़्यादा इमकान नज़र आतें हैं.

मज़ीद जांच पड़ताल के बाद एक सो फि सद दुरुस्त खबर से आपको आगाह किया जाएगा.  जिस तरह से २६ जनवरी को हिन्दू दहशतगर्द हमले पे, इंग्लैंड में तीन लोगो की हलाक़त करने वाले के ऊपर, भय्यूजी महाराज की खुदकशी पे, अमेरिका में होने वाले पब में फायरिंग हमले, राणा प्रताप जयंती, हनुमान जयंती, राम नवमी पे होने वाले दंगो और उसकी वजह से आपको हक़ीक़त से रू बरू करवाया था और दंगों की असली वजह बताई थी जो लंगूर कुछ और ही बोल रहे थे. भय्यूजी महाराज की खुदकशी पे लंगूर जिस सेवादार को महाराज का सबसे बड़ा मुवाफिक तस्लीम कर रहे थे उसी को ऑटोनोमस जर्नलिस्ट ने महाराज का क़ातिल बोला था.  दूसरी बात महाराज के खुदकशी करने के पीछे की वजह भी वही निकली जो इस सहाफी ने बोली थी उनको जिन्सी ताल्लुक़ात की वजह से ब्लैक मेल किया जा रहा था.  

पुलवामा हादसे में अभी तक किसी भी तरह का विस्फोटक की जानकारी इस सहाफी की टीम को नहीं मिली है. हमले में आर.डी.एक्स. जैसे किसी भी विस्फोटक के मौजूद होने के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं.  एक और बात जो इस ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम को अपनी जांच में पता चली की जिस गाडी का ज़िक्र लंगूर कर रहें है और शोर मचा रहे हैं उसके अस्ति पंजर तक कही नज़र नहीं आ रहे हैं.  फिर जो खुदकश हमलावर था उसके बॉडी पार्ट्स कही भी नज़र नहीं आ रहे हैं और ना ही उसके कपड़ो से या किसी और सामान से उसकी शिनाख्त जैसे के लंगूर किसी आदिल डर का नाम ले कर बोल रहें है ज़ाहिर होती है. 

इस जांच पड़ताल में इस सहाफी की टीम ने किसी भी हुकूमत के आला ओहदेदार या लंगूर मीडिया के लोगो से कोई भी गुफ्तगू नहीं की है और ना ही उनसे किसी भी जानकारी का हवाला माँगा है.  ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम अपनी जांच अपने हिसाब से करेगी, क्योंकि ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम का ये मानना है की हुकूमत का कोई भी आला ओहदेदार हो या लंगूर मीडिया का मुलाज़िम उनके गले में गुलामी का पट्टा बंधा होता है और उसकी डोर होती है हाकिमे वक़्त के हाथ में जो उनके हुकुम के खिलाफ हरगिज़ नहीं बोल सकते.

३ से ४ बजे के बीच सच्चाई का थोड़ा सा अक्स ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम ने अपने एडिटर इन चीफ यानि इस सहाफी को व्हाट्सअप या दीगर सोशल मीडिया के ज़रिये भेजना शुरू किये ही थे की इस सहाफी ने धड़ा धड़ ट्वीट करना शुरू कर दिए. 

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भारत सरकार को अज़हर मसूद को आतंकी घोषित करने की बोहोत जल्दी है. पेहले तो साबित करो के अज़हर भाई इस हमले मे शामिल थे भी या नही. दूसरी बात हमला है भी या दुर्घटना. सिर्फ इसको हमला बता के अपनी गिरती हूई राजनैतिक साख मुस्तहकम करना तो मकसद नहीं है. खैर वो जो कोई भी मे देख लूँगा आप जाइये मोदी साहब. सारी जानकारी जेसे की सबसे पेहले पत्रकार निकाल लेता है वेसे ही इस केस की भी निकाल लि जायेगी. २६ जनवरी हिन्दू आतंकी हमलो से ले कर कर राम नवमी, राणा प्रताप ओर हनुमान जयंती सभी हिन्दू आतंकी हमलो मे सच्ची खबर इस पत्रकार ने सबसे पेहली दी बाद मे लंगूरों ने मूंडी और दुम हिलाना शुरू कर दी. लँगूरनियों ने.......... ५६ इंच छाती

Zuber Ahmed Khan shared a post.
क्या बकवास खबरे चला रहे हो. एसी खबरों पे भक्त अंध भक्त यकीन करेगे एक पत्रकार ओर जानकार नही. पाक भारत के लिये फेवरइट नेशन था ही किधर. सिद्दू के पाक जाने से ले कर करतारपूर कॉरिडॉर तक कितना बवाल मचा था. जिसमे लंगूर तो थे ही शामिल आम जनता बीजेपी के राजनेता तक शामिल थे. दूसरी बात अगर पाक फेवरइट नेशन होता तो मसला ही नही था, फिर बात चीत मोदी सरकार ने 3 बार काहे को रद्द की. सही देखा जाये तो भारत के राजनेता खास बीजेपी ओर जनता के मन मे पाक रूपी ज़ेहेर है ओर उनको पाकफ़ोबिया हो गया है. पाक प्रधान मंत्री ने तो कई काम भारत की निस्बत से अच्छे करना चाहे लेकिन मोदी रूपी अहंकार आड़े गया. अब बाते बना रहे हो. पाक से स्टेटस खत्म वो स्टेटस खत्म. दिया क्या था तुमने जो खत्म कर दिया.

Zuber Ahmed Khan shared a post.
ये सब मोदी सरकार की दोगली पॉलिसी ओर अहंकारी ज़ेहेनियत की दैन है. कश्मीर जेसे पेचीदा मसले मे मोदी ज़ब्र ओर फोर्स का सहारा ले रहा है जो मसले को ओर गंभीर बना रहा है. बात चीत को तोड़ना मतलब जंग के संकेत है ओर जंग मे सेनिको की मौत पे केसा गम. अगर बात चीत जारी रखते तो हालात अलग होते. लेकिन मोदी को लंगूरों ने चढ़ा रखा था चने के झाड़ पे बोहोत सख्त प्रधान मंत्री का तमगा दे कर. तीन नासूर भारत के लिए तबाह कुन साबित होंगे. एक कश्मीर जो अब पक चूका है और उसको अलग करना ही दुरुस्त और सही रास्ता है नहीं तो वो भारत के दूसरे हिस्सों में फैलेगा. और नासूर जो पक रहे है और समय आने पे उनके बारे में भी लिखा जाएगा.

अब तो ये आने वाला वक़्त ही बताएगा की ये हमला है या हादसा.  दूसरी बात अगर हमला है तो इसके तार किस तंज़ीम के साथ जुड़े हुए हैं.  क्या इसमें हुकूमत की कारगरदेगी तो नहीं है.  क्योंकि इस सहाफी ने गुजरात इंतेखाबात से पहले ही जांच पड़ताल के बाद अपने खबरनामे में जो बात लिखी थी वो सही और दुरुस्त होती नज़र आ रही है.  दूसरी बात अमेरिका की जांच एजेंसी  एन.आई.ऐ. ने भी जनवरी २०१९ में वही बात कही है जो इस सहाफी ने गुजरात इंतेखाबात से क़ब्ल लिखी थी, के मोदी हुकूमत अपनी  ज़िल्लत और रूसवाई से बचने के लिए इंतेखाबात २०१९ से पहले शदीद दंगे करवा सकती है. 

ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट की टीम कश्मीर पहुंच चुकी है और जदीद जांच पड़ताल जारी है.  जिसकी जल्द आगाही  और इस सहाफी के कमेंट के साथ रिपोर्ट का इख़्तेदाम किया जाएगा. 

तारिख १५ फरवरी २०१९ ताज़ा अपडेट रात के ११.११ बजे 

ब्रेकिंग न्यूज़ हाल ही में ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट टीम जो के कश्मीर में है बड़ा खुलासा हुआ है. बम्बई शहर की कुछ रसूखदार मस्तुरातों ने मीडिया को गुमराह किया था और हादसे को हमला बोल के बवाल मचाने के लिए बाध्य किया था.   अभी तक इस बात की तस्दीक नहीं हो पाई है की वो हमला था या हादसा.  ऑटोनोमस जर्नलिस्ट की टीम जदीद जांच पड़ताल कर रही है.  जैसे जैसे उसके पास इनफार्मेशन आती जायेगी उसको नज़रीनों के साथ उनको शेयर की जायेगी.  

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