आज
तक के खबरनामे में बड़े बड़े अलफ़ाज़ में ये कहा जा रहा है की हुकूमते हिन्द ने आज़ाद कश्मीर
पे शदीद सर्जिकल स्ट्रीक कर दहशतगर्दों के पूरे कैंप तबाह कर दिए और इस हमले में कमो
बेश ३०० अफ़राद जाँबाहक हुए. इस तरह की ख़बरें
सिर्फ और सिर्फ भारीतय मीडिया तक ही महदूत हैं और किसी भी बेन अक़वामी सतह पे या अखबारों
में ऐसी किसी भी खबर का हवाला नहीं मिलता है, ना ही इस सहाफी के पास ऐसा कोई भी ट्वीट
बेन अक़वामी मिडिया से वसूल हुआ है जिसकी बिना पे ये सहाफी अपना मज़मून तैयार कर के नाज़रीन
को सच्ची खबर से आगाह कर सके.
जिस तरह से आज तक ने अपने खबरनामे की
सुर्खिया दी है "सर्जिकल स्ट्राइक - २"
बिलकुल सही बात है ये सर्जिकल स्ट्राइक-२ ही है. क्योंकि ऐसी किसी भी सर्जिकल
स्ट्राइक का ज़िक्र बेन अक़वामी मीडिया में नहीं है. यहाँ तक न्यू यॉर्क टाइम्स या बी
बी सी जैसे बोहोत मोतबर अखबारों में ऐसी किसी भी स्ट्राइक का ज़िक्र नहीं है. बी बी
सी लंदन से अपने अंग्रेज़ी में शाये होने वाले अखबार के अज़ाफात हैं “भारतीय फ़िज़ाई फौज
के तय्यारे को पाक ने भगा दिया”. मज़ीद तब्सिरा
इस सहाफी की खबर Indian aircraft violate LoC, scramble back after PAF’s
timely response: ISPR पूरी तरह मुताला कीजिये. अब ऐसी झूटी सर्जिकल स्ट्राइक की खबरें सिर्फ भारीतय
मीडिया तक ही महदूत हैं. बेन अक़वामी मीडिया
में ऐसी कोई खबर नहीं है. और ना ही पाकिस्तान के किसी भी मोतबर अखबार में ऐसी कोई सुर्खियाँ
हैं. जब भारत पे हमला हुआ और ४५ जवान मारे
गए तो पूरा मुल्क हिल गया था. तो क्या पाक
में हुकुमाते हिन्द की तरफ से हमला होगा और मीडिया से ले कर पूरे पाकिस्तान में हाई
अलर्ट नहीं किया जाएगा.
दूसरी बात जिन ४५ जवानों की मौत के बाद भारत और पाक के बीच पैदा हुए हालात काफी कशीदा हो गए थे और पूरा बेन अक़वामी अराकीन सख्त फ़िक्र मंद हैं. हर अखबार की सुर्खिया भारत और पाक के बीच पैदा हुई तल्खियों के ऊपर हैं. और इतने बड़े हमले को बेन अक़वामी अराकीन और अखबारात कैसे फरामोश और नज़र अंदाज़ कर सकतें हैं और ऐसी बड़ी खबर को आलमी चबूतरे पे काहे को जगह नहीं मिली.
जैसा की हुकूमते हिन्द का दावा है की पुलवामा में आतंकवादी हमला हुआ तब उसको पूरा आलमी बरादरी और बेन अक़वामी मीडिया ने कवर किया था.
लेकिन जब किसी मुल्क की हुकूमत की तरफ से उस हमले का जवाब दिया जाता है जिसमे ३०० से ज़्यादा दहशतगर्द मारे जातें है और पूरे दहशतगर्दी तरबियती कैंप नेस्त नाबूत किये जाते हैं तब पूरा अलामी बरादरी और बेन अक़वामी मीडया खामोश क्यों है.
जबकि किसी भी मुल्क की हुकूमत की कारगरदेगी को तो पहले पेज पे जगह मिलनी चाहिए. वो भी अगर अमल दहशतगर्दों के खिलाफ हो तो हर मीडिया उसको पहली खबर बोल के छापेगा और बड़े बड़े अलफ़ाज़ में छापेगा और उस हुकूमत की हौसला अफ़ज़ाई करेगा.
बेन अक़वामी मिडिया तो छोड़ दो भारत के अंग्रेज़ी खबरनामों ने उतनी बड़ी हेडलाइंस में ये खबर नहीं छापी.
जितनी की छापना चाहिए.
तो क्या ये समझा जाए दहशतगर्द हमला किसी भी हुकूमत के हमले से बड़ी फौकियत रखता है.
फिर हुकूमते हिन्द के हमले को आलमी बरादरी में जगह नहीं मिली और दहशगर्दाना हमले को मिली मतलब दहशतगर्द आलमी बरादरी के ऊपर अपनी एहमियत रखते हैं.
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