काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुए विवाद को लेकर अब सत्ताधारी बीजेपी रक्षात्मक मुद्रा में आ गई हे. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोदी और अपनी सरकार का बचाव करते हुए कहा के काशी हिंदू विश्वविद्यालय जो कुछ भी हुआ उसके पीछे बाहरी ताक़तों का हाथ हे. हास्यपद........ सुन्दर......... अति सुन्दर ......... योगी जी ऐसे बेतुके बयान बाज़ी से आप अपनी और केंद्र की छवि ख़राब कर रहे हे. हम जैसे पत्रकार आप के बयान का ऑपरेशन कर के आपके सामने एक नई चुनौती खड़ी कर देंगे.
आपके बयान से दो बाते निकल के सामने आती हे एक तो काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जो कुछ भी हुआ उसका आपको खेद नहीं हे बल्कि आप उसका बचाव कर रहे हे. होना ये चाहिए था के आप खाकी हमले पे खेद व्यक्त करे और दोषीओ के खिलाफ कारवाही.
यहाँ महाराज में आपसे पूछना चाहूँगा मीडिया में भी ऐसी खबरे आम हो चुकी हे और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी लाठी चार्ज के बाद विपक्ष को इसका ज़िम्मेदार ठहराते हुए नज़र आये. और अब आपका ये बयान तो पहली बात सदन में उत्तर प्रदेश हो या केंद्र कम से कम ७५% बीजेपी के नुमाइंदे मौजूद हे और विपक्ष नाम की कोई चीज़ ही नहीं बची हे और शायद १९९२ के बाद ये पहली बार ऐसा हुआ होगा के केंद्र में एक निहायत कमज़ोर विपक्ष होगा. फिर भी अगर आपकी और कुलपति महोदय की बात को माने के ये बाहरी ताक़त और विपक्ष का किया धरा हे तो ऐसा कहने में आप ही की कमज़ोरी दिखती हे. के ७५% सत्तारूढ़ पार्टी के नुमाइंदो के ऊपर २५% विपक्ष भारी रहा. और अगर आपके सत्ता में होते हुए प्रधान मंत्री के संसदीय छेत्र और उनकी मौजूदी में बाहरी ताकते आ के अपना कमाल दिखा देती हे तो आप सिर्फ नाम मात्र के मुख्य मंत्री हे आपका गुप्त विभाग क्या कर रहा था. उसने अलर्ट जारी क्यों नहीं किया के प्रधान मंत्री के वाराणसी दौरे पे बाहरी ताकते फ़िज़ा ख़राब कर सकती हे ये तो आपकी सुरक्षा में चूक हुई के बाहरी ताकते सत्ताधारी पार्टी के नुमाइंदो के ऊपर हावी रही. तो ऐसी सूरत में आपको सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं हे. अगर आप महिलाओ और छात्राओं को सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते जो के आपकी प्रधान ज़िम्मेदारी हे और चुनावी घोषणा पत्र में आपने संकल्प किया हे तो आप विफल हुए.
दूसरी बात
लाठी चार्ज के आदेश किस अधिकारी ने जारी किये थे और क्या आपने उस अधिकारी के खिलाफ
कारवाही की जिसने बेगुनाह छात्राओं पे लाठी चार्ज के आर्डर दिए थे. चाहे वो आर्डर कमिशनर
पुलिस के हो चाहे वो आर्डर ऐ.डी.ऍम. के हो या फिर आपके. ऐसे असवैधानिक आर्डर कुलपति नहीं दे सकते और अगर
लाठी चार्ज करने के आदेश कुलपति के थे तो पुलिस ने ऐसे आर्डर की अमलबजावणी की कैसे.
क्योकि विश्विद्यालय का कुलपति एक न्यायिक संस्था नहीं हे और पुलिस उसी संस्था का आदेश
मान सकती हे जिसके अधीन वो काम करती हो या वो न्यायिक संस्था हो.
तो योगी जी
केंद्र में बैठे अपने गुरु जी के नक़्शे कदम मत चलिए "में माफ़ी नहीं मांगूगा..........."
“में उपवास रखुगा लेकिन माफ़ी नहीं मांगूगा”, “मेरी अगर गलती हे तो इलेक्ट्रिक पोल पे
लटका दो”, तो ऐसे जुमले बाज़ी आपको अगले चुनाव में भारी पड़ेगी.
जुबेर एहमद खान
पत्रकार
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