गौरी लंकेश के खून में अभी तक पुलिस को कोई भी सुराग नहीं और पुलिस के हाथ खाली. पत्रकार जुबेर ने किया कटाक्ष.
जब तक हिन्दू आतंकी देश की सत्ता पे काबिज़ हे पुलिस के हाथ किसी भी आतंकी घटनाओ में खाली ही रहने वाले हे. अगर किसी ईमानदार पुलिस वाले ने किसी हिन्दू आतंकी को पकड़ लिया तो भगदादि का भगवा आदेश आ जाएगा और उसको छोड़ना पड़ेगा. आखिर में अगर केस रजिस्टर्ड हो गया और आतंकी को न्यायलय के समक्ष पेश होना पड़ा तो वहा से उसको बाइज़्ज़त बरी कर दिया जाता हे.
पहलू खान के ऊपर गौ आतंकिओ के हमले में एक अहम् खुलासा हुआ हे. पहलु खान ने हमला होने से कुछ समय पूर्व ७ गौ आतंकिओ के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. रिपोर्ट की कॉपी धर्म निरपेक्ष पत्रकारों के पास मौजूद हे हलाके भगवाधारी पत्रकारों ने अवरोध पैदा किया था के रिपोर्ट की कॉपी प्रेस तक न पहुंच पाए लेकिन फिर भी प्रेस के पास कॉपी आ चुकी हे. पुलिस ने उन सभी हिन्दू आतंकिओ को हमला होने के बाद ग्रिफ्तार भी कर लिया था लेकिन फिर भगवा दबाव और भगवा आदेश ऊपर से आने के बाद सभी को छोड़ दिया गया. अब पुलिस आज़ाद या गौरी लंकेश जैसे पत्रकारों के किसी भी सवालों का जवाब नहीं दे पा रही हे और सवालो पे आंखे चूरा रही हे.
यहाँ तक के उच्चतम न्यायलय का भी भगवाकरण हो चूका हे और ये देश का दुर्भाग्य ही होगा के देश की सर्वोच्च न्यायलय ज़ात, पात और समाज देख के फैसला दे रही हे न की गुनाह देख के. तभी तो आतंकी हमलो का दोषी आतंकी पुरोहित, असीमानंद और अन्य, महिला आतंकी प्रज्ञा को बेल मिल गई. बाबरी मस्जिद को शहीद करने वाले संसद में बैठे हे और याकूब को फांसी हो गई. खाकी आतंकी वंज़ारा और अन्य विशष समुदाय के खून के इलज़ाम से बरी हो गए. फिर गुजरात दंगो में शहीद हुई मस्जिदों, मज़ारो और खानकाओ को सरकारी खर्चे से बनवाने का गुजरात उच्च न्यायलय का निर्णय हाल ही में तब्दील कर दिया गया. यहाँ ये बताने की ज़रुरत नहीं की गुजरात उच्च न्यायलय का निर्णय बदलने वाला चीफ जस्टिस कोई और नहीं बल्कि वही शख्स हे जिसने याकूब की न्यायिक हत्या पे मोहोर लगाईं थी. इस व्यक्ति का सम्पूर्ण ट्रेक रिकॉर्ड एक पत्रकार होने के नाते मेरे पास मौजूद हे.
तो जिस देश में न्याय की हत्या सिर्फ इसलिए हो रही हे के न्यायलय बहुसख्यक समाज के अधीन काम कर रहा हे और आतंकी सोच अब न्यायलय की रगो में भी खून की जगह ज़हर की तरह दौड़ने लगी हे तो उस देश में अब हर व्यक्ति को अपने हिसाब से बदला लेने का हक़ होना चाहिए. जिस आतंकी पुरोहित को बेल मिली उसके खिलाफ सेना का गोला बारूद और आर.डी.एक्स. चुराने के पुख्ता सबूत पेश किये गए थे. फिर इस पुरोहित ने आतंकी हमलो को अंजाम देने के लिए हिन्दू युवको को ट्रेनिंग दीं थी और साधू संतो ने उनमे ज़हर भरने का काम किया था.
भारतीय सभ्य समाज किस दिशा में जा रहा हे वो इस बात से ही अंदाज़ा हो जाता हे के गौरी लंकेश की हत्या के बाद भागवा आतंकिओ और उनके हामिओ की कैसी कैसी प्रतिक्रियाए आ रही थी. एक महिला जिसको मोदी ट्विटर पे फॉलो करते हे वो लिखती हे "एक कुतिया के मरने पे सारे कुत्ते भौकने लगे." तो न्यायलय भी इसी समाज का हिस्सा हे जब इस भारतीय समाज में लोगो की सोच एक दिवंगत महिला के लिए ऐसी होगी तो न्यायलय की भी सोच वैसी ही होगी. जब पिछले तीन क़त्ल दाबोलकर, कलबुर्गी और पंसारे के क़ातिल अभी तक नहीं पकडे गए तो लंकेश के क्या पकडे जायेगे.
जुबेर अहमद खान
पत्रकार
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