Monday, 18 September 2017

विदेशो जैसी सोच हम कहा से लाएंगे



दोस्तों मेरा ये लेख भारतीय समाज को समर्पित हे

मोदी सरकार भारत की जनता को विदेशो की तरज़ पे अति आधुनिक सुख सुविधाय देने को तत्पर हे.  जिसमे शामिल हे भारत में महामार्गों का जाल बिछाना, तमाम महानगरों को एक्सप्रेस हाई वे से जोड़ना, बुलेट ट्रैन, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, वर्ल्ड क्लास हाई टेक् रेलवे स्टेशन, क्लीन इंडिया और बुला बुला बुला........

एक पत्रकार होने के नाते में इतना कहना चाहूँगा की श्रीमान मोदी विदेशो की तर्ज़ पे भले ही भारत में लाख सुख सुविधाय देने की कोशिश कर लें लेकिन भारत की जनता में वो विदेशो जैसी सोच कहा से लाएंगे. मेने विदेशो में भी भ्रमण किया हे और समूचे भारत का भ्रमण कर चूका हूँ.  हर दुसरे रोज़ भारत में किसी किसी महानगर या स्टेट में मेरा दौरा रहता हे.  में इन दौरों के लिए अपना निजी वाहन या फिर कभी सार्वजनिक परिवाहन की सेवाये लेता हूँ.   ट्रेनों में स्लिपर क्लास में जो हालत होती हे उसके ऊपर में तब के प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी और रेलवे  मिनिस्ट्री को दो या तीन पत्र लिख चूका हूँ. बोगी में गंदगी, हर १०-१५ मिनिट बाद भिखारिओ की बरात, अनधिकृत फेरी वाले, एक बोगी में भेड़ बकरिओ की तरह जनता की भरमार, शौचालयों में गंदगी.  स्लिपर क्लास में यात्रिओ की भेड़ बकरिओ की तरह सख्या की वजह से ही ट्रेन हादसों में भारत में हताहत होने वालो की तादाद ज़्यादा होती हे.  ज़्यादातर यात्री  दम घुटने से  मारे  जाते  है  या  वो  समय  पे  बहार  नहीं    सके इसलिए मारे  जाते  है.  ये तो हुई स्लिपर क्लास के पैसेंजरस की परेशानी  .सी. स्लिपर में भी हालात कुछ ठीक नहीं होते है. हां .सी सेकंड क्लास में हालात कुछ सामान्य होते हे.  देश की ७५% जनता स्लिपर क्लास में प्रवास करती हे जबकि ए.सी. सेकंड क्लास में ५ से १०%.  मेरा यहाँ पे समझाने का तात्पर्य ये हे की अगर ए.सी. सेकंड क्लास में हालत सामान्य हे और उसमे प्रवास करने वाली जनता सिर्फ ५ से १०% हे तो इससे दो बाते साफ़ हो जाती हे या तो सरकार सिर्फ हाई इनकम क्लास जनता की सेवाओं का ज़्यादा ख्याल रखती हे या जनता में वो विदेशो वाली सोच सिर्फ ५ से १०% जनता में हे और देश की ७५% जनता भारतीय सोच में जी रही है अगर उसको अच्छी सुख सुविधा भी दी जाती हे तो वो उसका दुरुपयोग करेगी. 

इसी हिसाब से अगर प्रतीक्षा रूम की बात की जाय तो कल्याण की ही बात की जाय जो की हाई टेक् और बम्बई का सबसे बिज़ी रेलवे स्टेशन है लेकिन स्लिपर क्लास में शौचालयों में गंदगी पानी की कमी और अनादिकृत जनता की भरमार. तो ये हाल सिर्फ कल्याण का ही नहीं हे बल्कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों का हे.  हां .सी. स्लिपर क्लास वेटिंग रूम की हालत सामान्य हे.

मोदी सरकार ने हर महानगर को नेशनल एक्सप्रेस हाई वे से जोड़ने का संकल्प लिया हुआ हे इस विषय में इस पत्रकार ने एक लेख गुजरात का काला सच  १९ मई २०१५ को लिखा हे.  ऐसा करने के पीछे सरकार का उद्देश्य सेफ ड्राइव की नीति होना चाहिए क्योकि सभी प्रमुख राज मार्ग एकाकी होती हे. लेकिन सरकार को ये  नहीं भूलना चाहिए की वो कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन यहाँ भी भारतीय मानसिकता को तब्दील नहीं कर सकी और भारत विश्व का पहला देश हे जहा सबसे ज़्यादा रोड एक्सीडेंट में डेथ होती हे.  वर्ष २०१५ सबसे ज़्यादा भयावह रहा जिसमे % रोड एक्सीडेंट डेथ में इज़ाफ़ा हुआ.  भारत में हर ४ मिनट में एक रोड एक्सीडेंट डेथ होती हे. वर्ष २०१३ में लगभग १ लाख ४० हज़ार के करीब लोग रोड एक्सीडेंट में मारे गए.  इन सभी रोड एक्सीडेंट में २५% केसेस में दो पहिया वाहन एक्सीडेंट का प्रमुख कारण रहे.  लेखक जब भी रोड यात्रा पे होता हे तो उसने ये महसूस किया हे और उसको इस बात पे बोहोत गुस्सा भी हे की एकाकी राज मार्ग पे दो पहिया, तीन पहिया, जीप या ट्रक गलत दिशा में आते हे जिससे उनको बचाने के चक्कर में पीछे से आने वाली गाडी से टक्कर का बोहोत ज़्यादा खतरा होता हे.  फिर जीप में क्षमता से ज़्यादा ठूस ठूस के जनता को भर दिया जाता हे.  और जीप का ड्राइवर अगली खेप मारने के चक्कर में वेग नियंत्रण नहीं कर पाता हे और हर उस गाडी को ओवर टेक करने की कोशिश करता हे जो उससे आगे हे फिर अगर एक्सीडेंट होता हे तो उस जीप में क्षमता से ज़्यादा पैसेंजर होते हे जिनकी मौत होती हे.  उसी तरह से तीन पहिया वाहन (रिक्शा) में ७-८ यात्री बैठे होते हे और रिक्शा की गति इतनी धीमी होती हे के उससे एक्सीडेंट के चान्सेस खूब होते हे.

अब यहाँ पे सरकार को ये बताने की ज़रुरत ही नहीं के दो पहिया, तीन पहिया और ट्रक चलाने वाली जनता की और आलिशान गाड़ी रखने वाली जनता की प्रतिशत कितनी हे. अब जो जनता आलीशान गाड़ी रखती हे उनकी सोच विदेशो जैसी होगी और जो दो पहिया, तीन पहिया और ट्रक चला रहे हे उनकी सोच भारतीय होगी. तो अब अगर मोदी सरकार एकाकी राज मार्ग का निर्माण करती हे और तमाम महानगरों को उससे जोड़ती हे लेकिन उस सोच का क्या करेगी जो एकाकी राज मार्ग पे भी उलटे आते हे. दूसरी बात उनकी गलती की सजा एक अनजान मुसाफिर को क्यों भुगतना पड़े. क्योकि अगर एक्सीडेंट होता हे जिसमे गलती सिर्फ और सिर्फ सामने वाले की हे लेकिन जान तो दोनों की ही जायेगी गलत दिशा से आने वाले की और सही दिशा में चलने वाले की भी.  मोदी सरकार राज मार्ग का निर्माण करके बोहोत ही अच्छा कार्य कर रही हे लेकिन उस सोच को भी दबाने की ज़रुरत हे जो दूसरो को नुक्सान का बाइस बनती हे.

एक निवेदन
 



1.     सरकार को चाहिए के हर राज मार्ग पे सख्त पुलिस और सड़क परिवहन अधिकारी का पहरा हो और उलटी दिशा में आने वालो को पकड़ के उनका लाइसेंस ज़ब्त किया जाये.

2.     फिर वो लाइसेंस उनको न्यायलय के समक्ष हलफनामा दे के ही मिले के ऐसी गलती वो फिर नहीं करेंगे और ट्रैफिक नियम का पालन करेंगे और उसपे एक मोहोर लगा दी जाए की इन्होने ट्रैफिक नियम तोडा हे. और जो उलटी दिशा में आने की गलती की हे उसके ऊपर एक जुर्माना लगाया जाए.

3.     फिर अगर ऐसी तीन मोहोर लाइसेंस पे लग जाए तो उस शख्स का लाइसेंस ज़ब्त कर लिया जाए और फिर भारत वर्ष में किसी भी प्रान्त से उसको लाइसेंस जारी किया जाए.

4.     ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करना एक गैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में रखा जाए.

5.     पैसेंजर जीप या रिक्शा की यात्री सीमा निर्धारित की जाए और उसको सख्ती से पालन किया जाये.

6.     पैसेंजर जीप, तीन पहिया,  दो पहिया वाहनो को राज मार्ग और एक्सप्रेस हाईवे में चलने की अनुमति हो. अगर कोई नियम तोड़ता हुआ पाया जाता हे तो उसका वाहन परवाना तुरत ख़ारिज किया जाए.

7.     कोई और सुझाव जो सरकार बेहतर समझे.

जुबेर अहमद खान
पत्रकार
 

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