पत्रकार
जुबेर ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह की कश्मीर यात्रा पे दी दुआ
श्रीमान
राजनाथ सिंह जी आपकी कश्मीर यात्रा शुभ हो और उसके पॉजिटिव रिजल्ट सामने आये.
भारत के गृह
मंत्री श्री राजनाथ सिंह ४ दिवसीय कश्मीर के दौरे पे हे. उन्होंने साफ़ कर दिया हे के कश्मीर मसला हल करने
के लिए वो किसी भी पक्ष से बात चीत करने को तैयार है. मेने गृह मंत्री जी को ट्वीट किया हे के क्या आप
हुरर्यत से भी बात करेंगे फिर दूसरा ट्वीट किया हे के अगर आपकी सरकार कश्मीर को आज़ाद
करती हे या उसको सम्पूर्ण सुवायात्ता देती हे जो कश्मीरी जनता की डिमांड हे तो ये आपकी
सरकार का सबसे पॉजिटिव कदम होगा. जो काम कांग्रेस सरकार पिछले ६० सालो में नहीं कर
पाई अगर आप ४ सालो में करते हे तो ये किसी मिरेकल से कम नहीं होगा.
प्रधान मंत्री
श्री मोदी पहले ही साफ़ कर चुके है की कश्मीर मसला न गोली से और न गाली से बल्कि गले
लगाने से हल होगा. उसके ऊपर पत्रकार जुबेर ने कटाक्ष किया था और दो तीन मिसाल दी थी
की गले लगाने के लिए वैसी नियत चाहिए. लेकिन अब गृह मंत्री का कश्मीर दौरा और उसके
ऊपर उनका ये वक्तव के वो मसला हल करने के लिए किसी भी पक्ष से खुले मन से बात चीत करने
को राज़ी हे तो उससे सरकार की अभी तक की तो मंशा साफ़ लगती हे. अगर ये बाते सच्चे मन
से की जा रही हे और उसमे कसी भी प्रकार की राजनीती नहीं हे तो लगता हे कश्मीर मसला
जल्दी ही हल होगा.
में पत्रकार
जुबेर हुर्रियत के तमाम तूमाईंदो से अपील करूँगा के अपनी समस्या गृह मंत्री के सामने
रखे और कश्मीर की तहरीके आज़ादी में सरकार की मदद ले. मेरे पिछले कश्मीर दौरे पे और
कायदे आज़ादी जनाब सय्यद अली शाह गिलानी से बात चीत के दौरान मेने यही बात उनसे भी कही
थी. अगर कश्मीर में हुर्रियत के नुमाइंदो को भारतीय फौज से शिकायत हे तो वो अपनी
बात भारत के गृह मंत्री के समक्ष रखे. राजनाथ सिंह एक सुलझे हुए व्यक्तित्व के मंत्री
हे भले ही वो मोदी केबिनेट में हो लेकिन मोदी केबिनेट में वो एक सबसे बड़े सेक्युलर
होंगे जहा तक मेरी जानकारी हे.
दूसरी तरफ
में मोदी सरकार के गृह मंत्री से भी निवेदन करूँगा के बोहोत खून व गारत हो चूका मासूम
कश्मीरी बच्चो की आँखे चली गई मासूम बच्चीओ की इज़्ज़त चली गई. जवान कश्मीरी शहीद हो
गए. भारत के सेना के जवान शहीद हो गए. इतना सब बिगाड़ कर के भी कश्मीरीओ का दिल भारत
की सरकार नहीं जीत पाई. जो समस्या १९४७ से लबित थी अभी तक जस की तस स्थिति बनी हुई
हे. आज़ादी और आज़ाद हवा में सास लेना कश्मीरी जनता का हक़ हे और उसको सरकार गोली के ज़ोर
पे नहीं दबा सकती अगर जब्र और ज़ुल्म होगा तो उसपे कश्मीरीओ का गुस्सा और एहतेजाज होगा.
कश्मीर मसला सिर्फ और सिर्फ शांति पूर्ण तरीके से हल किया जाना होगा. आज़ादी की आग वो
आग हे जब दिल में सुलगती हे तो उसको शोला बनते देर नहीं लगती. फिर जब पत्नी और औलाद
आज़ादी के लिए बागी होते हे तो उनको ज़बरदस्ती घर में नहीं रख सकते उनको आज़ाद ही करना
पड़ता हे. उसी तरह से कश्मीरी जनता भी आज़ाद फ़िज़ा में सास लेना चाहती हे. उनके भी अपने
कुछ सपने हे वो भी चाहते हे के वो बगैर सेना के खुली फ़िज़ा में बगैर किसी ज़ुल्म और ज्यात्ति
के घूम फिर सके.
भारत के गृह
मंत्री को भारत की किसी भी शर पसंद या इन्तहा पसंद तंज़ीम की बातो में न आ के कश्मीरी
नुमाइंदो और सरकार के बीच एक मुज़ाकरात की स्थिति पैदा करना हे जिसमे कश्मीर मसला हल
करने की नियत और निति दोनों ही ठीक हो. भारत सरकार को कश्मीर मसला हल करते समय भारत
की नुक्ते नज़र से नहीं बल्कि कश्मीरी जनता की नज़र से देखना होगा के कश्मीरी जनता क्या
चाहती हे फिर कश्मीर में आज की स्थिति को देख के फैसला नहीं करना होगा बल्कि १९४७ में
जब विभाजन हुआ था उस वक़्त की स्थिति को ध्यान में रख के फैसला करना होगा. क्योके अगर
आज की स्थिति देख के मसला हल करना चाहा तो कभी हल नहीं होगा लेकिन १९४७ की स्थिति को
ध्यान में रखा तो मसला ए कश्मीर जल्द हल होगा क्योके १९४७ में भारत विभाजित ही हुआ
था.
अगर कश्मीर मसला मोदी सरकार इतनी आसानी से हल कर देती हे तो वो इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी.
जुबेर एहमद खान
पत्रकार
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