Thursday, 18 August 2022

साधू और अब्दुल का फ़रज़न्द।

अज़ीज़ नाज़रीन,

आज की कहानी का आग़ाज़ लंगूर-लँगूरनियों और ज़ाफ़रानी नंगी टोली के ऊपर एक तन्क़ीदी तमाचा है।हालांकी कहानी बरहना है लेकिन क्या करें जब हूकूमते बेहया हो जाएँ हर काम ग़ैर अख़लाक़ी, ग़ैर मेय्यारी, ग़ैर क़ानूनी, ख़िलाफ़े दस्तूर करने लगें जिसमे उसका साथ सहाफत खुल कर देने लगे तो अवाम को भी एक ही हमाम में नंगे हो कर ग़ुस्ल करने की हाजत होगी। 

ऐसे हालात में अवाम को चाहिए की वोह भी बरहना हो जाए और जो भी करे खुल्लम खुल्ला करे।  उनको अपने ऊपर अपनी क़ौम के ऊपर किये गए हर नाइंसाफी का बदला लेने का पूरा हक़ है।  इसमें मुजरिम को उसके जुर्म के हिसाब से ख़ुद सज़ा देने से ले कर ज़ानियों की बेहेन बेटिओं के साथ वैसा ही सलूक करने तक शामिल है। 

एक मुल्क के किसी सूबे में एक साधू रहता था।  वोह साधू गोरखपुर मंदिर का महंत था।  जो बृंदावन, और मथुरा में गाये और बैल चराता था।  अब उसका विवाह उसके वाल्दैन ने किसी कमसिन सुशील कन्या के साथ कर दिया।  अब साधू ठहरा गोबर भक्त, जिसने गोमूत्र पीया था और वोह कहाँ से निकलता है देखता था।  फिर वही हिकमत उसने अपनी बीवी के साथ लगाई और पूरी रात कन्या की चोटी उठा कर तलाशता रहा।  कन्या शर्मीली थी कुछ बोल नहीं पाई।  सुबह उठ कर वोह अब्दुल पंचर वाले के पास अपनी बीवी को ले गया जो बड़ाई भी था।  और बोला ए पंचर बाज़ पाकिस्तानी तुम्हारी औक़ात ही यही है चल हमारी पत्नी के सर के नीचे एक छेद कर दे। अब्दुल समझ गया की लल्लू है, उसने कहा हाँ साहब में मेरे बेटे को बोल देता हूँ लेकिन दो तीन दिन इनको हमारे पास रखना पडेगा।  साधू राज़ी हो गया।  अब तीन दिनों में अब्दुल के बेटे ने आला किरदार, आला ज़र्फ़, खुलूस से सुशील और कमसिन कन्या का दिल जीत लिया और कमसिन कन्या के दिल में अब्दुल के फ़रज़न्द के लिए मोहब्बत पैदा हो गई।  फिर वही किया जो साधू ना कर सका।  तीन दिन बाद योगी आया फिर वही गाली गलोच के साथ बात करना मखौल उड़ाना हो गया छेद।   उसने कहा हाँ सरकार हो गया लेकिन सर का हिस्सा बोहोत सख़्त था इसलिए नीचे होल गिरा दिया है।  इन संघियो, शिद्दत पसंदों, बीजेपी वालों की हस्बे आदत जब योगी बगैर पैसे दिए जाने लगा तो अब्दुल का बेटा बोला हां ९ महीने बाद अपने मामा बनने की खबर सुनाने ज़रूर आना और कभी कुछ नाइन्तेफ़ाक़ी हो जाए तो फिर से हमारे पास ले आना क्योंकि अब यह हमारे बग़ैर ना रह पाएगी।

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