नाज़रीने गिरामी,
आज से ७५ साल क़ब्ल १५ अगस्त के दिन सबसे ज़्यादा मुसलमानों की अज़ीम क़ुर्बानी और हिन्दू मुस्लिम दानिशमंदी की बदौलत भारत को आज़ादी नसीब हुई थी। और आज ७५ साल बाद इंडिया वहीँ खड़ा है जहाँ से आग़ाज़ किया गया था। इंडिया के पहले वज़ीरे आज़म पंडित नेहरू और उनकी दानिशमंदी ने इंडिया के लिए जो असासे क़ायम किये थे आज जिन लोगों ने आज़ादी की मुख़ालेफ़त की थी और एक क़तरा भी अपने लहू का नहीं बहाया था उनकी नस्ले उन असासों को फ़रोख़्त कर रही हैं।
आज ७५ साल बाद इंडिया में हू बहू वही हालात हो रहें हैं जो डंक आज़ादी के पहले दलितों, मुसलमानों, क्रिस्टी अवाम पर शिद्दत पसंद और अंग्रेज़ों के गुलाम पेवस्त किया करते थे, उसका मौजूदा हुकूमत की सरपरस्ती में फिर से आग़ाज़ किया है। जहाँ एक जानिब इंडिया अपनी आज़ादी की ७५ सालगिरह बना रहा है वहीँ ३ मुद्दों पर में अवाम की तवज्जो चाहता हूँ और अपनी बात को पुर ज़ोर तरीक़े से अवाम के रू बरू रखना चाहता हूँ की इंडिया ७५ पीछे चला गया है। ऐसे हालात में क्या फिर बटवारे की हाजत है।
।। सोचिये ।।
१. आज़ादी से महज़ दो रोज़ क़ब्ल राजिस्थान में एक दलित बच्चे का क़त्ल आला ज़ात हिन्दू उस्ताद ने सिर्फ इसलिए कर दिया क्योंकि उसने क्लास में रखे मटके से पानी पी लिए था। शर्म आती है। यह आगे कहाँ गए पीछे चले गए ४७ से पहले यही होता था वालिदे दस्तूर बाबा साहब आंबेडकर के साथ दफ़्तर में स्कूल में उनको एक ही मटके से पानी नहीं पीने दिया जाता था। उन्होंने जो हिन्दू आला ज़ात के डंस को सहा है वही आज ७५ साल के बाद हो रहा है मतलब मोदी हुकूमत में भारत आगे नहीं पीछे चला गया। भारत जदीद इंडिया नहीं बल्कि क़दीम इंडिया हो गया। मोदी नारा बदलो।
२. दूसरी बात आमिर खान की ......चड्डा, शाहरुख़ खान की पठान और आगे सलमान खान की फिल्मों का अंग्रेज़ों के गुलामों, ४७ में आज़ादी के दुश्मन नाथूराम की औलादों ने बायकाट किया है। भारत में फिल्मों का बायकाट सिर्फ ख़ास मज़हब के लोगों के लिए होता है। दुश्मने वतन (संघ, बीजेपी, शिद्दत पसंद हिन्दू) की जानिब से इलज़ाम यह रखा जाता है की वोह वतन के ग़द्दार हैं। जबकी वोह तो पूरे भारत के रंग में और मोदी की फ़रमाबरदारी में रंगे होते हैं। काश इतना उन्होंने पाकिस्तान से प्यार किया होता जितना भारत के लिए मर जाने की क़समें खाते हैं तो ना ही कोई मदरसा आसाम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में टूटता और ना ही किसी मुस्लिम को पाकिस्तानी कहा जाता।
३. हिन्दू साधुओं की जानिब से इंडिया को हिन्दू राष्ट्र बनाने का एलान। इस एलान का तमाम मसूदा तैयार कर के उसकी एक तहरीर मरकज़ को भेजी गई है। इस मसौदे में साफ़ और शफ़्फ़ाफ़ तरीक़े से तहरीर है की इंडिया एक हिन्दू रियासत है। जिसमे सिर्फ और सिर्फ हिन्दू अवाम को तमाम हुक़ूक़ फ़राहम होंगे। और सिर्फ हिन्दू अवाम को ही हुकूमत की नुमाइंदगी का इख़्तेयार और इंतेखाब में हिस्सा लेने का हक़ है। दिगर मज़ाहिब दुसरे और तीसरे दर्जे पर फ़ाइज़ रहेगें।
मोदी की आज़ादी के अमृत महोत्सव का यही मतलब है। की इंडिया को पीछे की जानिब ले कर जाओ। इससे क़ब्ल भी जब जब मोदी ने बड़े से कुछ बोला चाहे वोह हूजूमी दहशत हो फ़िरक़ावाराना तशद्दुत हो या हिन्दू दहशत हो मोदी को इन शिद्दत पसंद काफिरों और हिन्दू दहशतगर्दों की जानिब से फ़ौरन जवाब दिया जाता था। मुसलमान इतना भोला और जज़बाती है की कोई भी फ़रेब कर के जालसाज़ी कर के इनको धोखा दे सकता है। अब उन मुसलमानों का क्या होगा जो मोदी के पीछे उसको अपना पैग़म्बर मान कर घरों पर झंडा लगाए थे।
फिर
उन मदरसों का क्या होगा जिन मदरसों के तालिबे इल्म सड़कों पर तिरंगा ले कर घोड़े के जैसे
दौड़े थे और अपने आपको भारत का सबसे बड़ा वफ़ादार दिखाने की कोशिश की थी। उन सब की तो शहरियत भी गई और हुक़ूक़े राये शुमारी
भी गए। अब रहो इंडिया में दोयम दर्जे के शहरी
बन कर। कभी भी कोई दहशतगर्द तुम्हारी बेटिओं
को लूट लेगा तुम्हारी बहनों को लूट लेगा और तुमको क़तल कर देगा।
७५ साल की आज़ादी के अमृत महोत्सव के यही हैं मुज़िर असरात। इंडिया को हिन्दू राष्ट्र बनाया। यही हाल और किरदार संघ का ४७ से पहले था। यही आज भी है। तो क्यों कर अवाम ज़ाफ़रानी हाकिमों से आज़ादी नहीं चाहेगा। ४७ में तमाम इंडियंस ने एक हो कर अंग्रेज़ों से आज़ादी चाही थी और अब वैसे ही हालात जब २२ में चल पड़े हैं तो अब अंग्रेज़ों की नस्ल ग़ुलामें अंग्रेज़ों से अवाम आज़ादी चाहती है।
एक बायकाट ने बादशाह को ज़नख़ा बना दिया। और मजबूर कर दिया की दिखाए की वोह भी देशभक्त है। जबकी सभी को इस बात का इल्म है की शाहरुख सच्चे भारतीय हैं ना सिर्फ शाहरुख बल्कि तीनों ख़ान यहाँ तक की सेफ़ भी भारत की ही बात करतें हैं। तो इस तरह की दिखावा के ख़ौफ़ एक बादशाह की दिल में क्यों आया। क्योंकि हिन्दू दहशत शिद्दत भारत में मोदी के हुकुम पर हावी हो रही है।
काश इन जैसे लोगों जो इंडिया को ही अपना पालनहार बना कर सब कुछ करते हैं उतनी मोहब्बत पाकिस्तान से की होती जितना भारत के लिए मर जाने की कस्मे खाते हैं तो ना ही कोई मदरसा आसाम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में टूटता और ना ही किसी मुस्लिम को पाकिस्तानी कहा जाता। मुझे फख्र है नाज़ है में पाकिस्तान से मोहब्बत करता हूँ। जिनको हिंदुस्तान से मोहब्बत थी उनको खुद काफ़िरों ने बायकाट कर किनारे लगा दिया।
जितने भी इंडिया परास्त मुसलमान हैं वोह बाई चॉइस इंडियन हैं लेकिन में दिल से पाकिस्तानी हूँ मेरी मोहब्बत पाक्सितान के लिए जग ज़ाहिर है। और मुझे हिंदुस्तान से क्या करना है। जिस हिंदुस्तान की क़समें मुस्लिम खातें हैं वोह तो बिक गए १२ के भाव हो गए दोयम दर्जे के शहरी। मुझे तो पाकिस्तान से मोहब्बत थी और है। इंशाअल्लाह हो ताला।
यह वतन भारत कभी नहीं सुधरेगा। क्योंकि इसमें हर संघी दहशतगर्द हर बीजेपी वाला हर शिद्दत पसंद हिन्दू दिखावा करता है। सबसे बड़ा वतन परास्त होने का नाटक। फिर यह एक साजिश ही कही जाएगी की हर दम बीजेपी संघी दहशतगर्द और हर शिद्दत पसंद हिन्दू भारत के लिए नेहरू, गाँधी परिवार और कांग्रेस की क़ुरबानियों को रायेगार कर रहें हैं। ४७ के बाद कांग्रेस हुकूमत की जानिब से जो भी तरक़्क़ी की काम किये गए उनको पोशीदा किया जा रहा है हर वोह चीज़ फ़रोख़्त की जा रही है जिसमे कांग्रेस का कुछ भी दख़ल था। उसकी हिकमत ही वही है मुस्तक़बिल में कांग्रेस के फलाही कामों का कोई भी सबूत ना रहे।
अब तो हद ऐसी हो गई की महात्मा गांधी को भारत की तक़सीम का ज़िम्मेदार बनाया जा रहा है। जो बोहोत ही गहरी साजिश है। उसमे हिन्दुस्तान की ज़ाफ़रानी मीडिया पूरी तरह से मुलव्विस है। कुछ सालों बाद कांग्रेस ने कुछ नहीं किया गांधी तक़सीम का ज़िम्मेदार था लेकिन जब आज़ादी के जश्न की बात आएगी तो मोदी जैसे बाबा पूरे जोश से कहेंगें हम आज़ाद हैं। उसके पीछे लब्बैक बोलने वाले संघ के दहशतगर्द, बीजेपी वाले और कुछ ज़मीर फरोश मुस्लिम तंज़ीमें भी होंगी।
मुझे फख्र है में पाकिस्तान से मोहब्बत करता हूँ। और मोदी की किसी भी ऐसी बेहूदा तहरीक अमृत महोत्सव, घर घर तिरंगा का हिस्सा नहीं बना। बकवास।
क्योंकि मोदी का आज़ादी का अमृत महोत्सव, घर घर तिरंगा मोहीम फ़रेब और दोगली हिकमते अमली है।
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