नाज़रीने गिरामी,
आज का मज़मून सियासत से अलहदा रूहानी शख़्सियत और अल्लाह के वालिओं की रूहानी करामात पर मुश्तमिल है। जैसा की आप हज़रात को मालूम है की जहाँ रेहमान है वहां शैतान है। और जिस मोमीन ने शैतान और उसकी क़ुव्वत से इंकार किया वोह काफिर है। और जिस मोमीन ने यह तस्सवुर किया की शैतान के पास ही तमाम क़ुव्वत है शैतान किसी भी मोमीन को तबाह कर सकता है बर्बाद कर सकता है वोह भी काफिर है। लेकिन जिस मोमीन ने यह तस्सवुर किया की शैतान के पास बेशक तमाम क़ुव्वत और ताक़त है लेकिन वोह अल्लाह की अताई है और शैतान उसी इंसान को परेशान कर सकता है जिसको परेशान करने की अल्लाह ने सोचा है। तो वही सच्चा मोमीन है।
और ऐसे मोमीनों में अल्लाह के वली शामिल हैं। जिनमे से एक हैं सय्यद अली मीरा दातार।
हज़रते मीरा दातार का दरबार अहमदाबाद से कुछ १०० किलोमीटर की दूरी पर उनवा तालुका में उंझा गांव में वाक़े है। यहाँ पर ऐसे तमाम मरीज़ों का ग़ैबी इलाज होता है जो खबीस जिन्नों, जादू टोना, टोटका, बदनज़र, जखिन या किसी और ग़लीज़ शे के ज़ेरे साये आ कर परेशान रहतें हैं।
इस दरबार में आने के बाद जिस शख्स को आसेब या जादू का असर होता है महज़ एक संदल की चुटकी या दरगाह के फूल की एक पखुडी खिलाने के बाद उसको हाज़री शुरू होती है। और उसकी ग़ैबी पेशी हज़रात मीरा अली दातार बापू की कुर्सी के सामने होती है। इस हाज़री में वोह मरीज़ उन तमाम बातों का ज़िक्र करता है जिसकी वजह से उसको परेशानी होती है। किस ने जादू किया किस ने कर के खिलाया किस ख़बीस का दिल किस खातून पर आया वग़ैरा।
पहली पेशी (हाज़री) में जब बीमारी ज़ाहिर हो जाती है तब शुरू होता है मरीज़ का इलाज। इस इलाज का तरीक़ा वहां के खुद्दाम हज़रात के हिसाब से होता है। जिसमे संदल पीना धूनी लेना और सवा लाख घोड़ों की छुट्टी सलामी देना। हर हाज़री में मरीज़ पहले से बेहतर होता जाता है।
यहाँ हर मज़हब हर तबक़े के मरीज़ आतें हैं जिनके ऊपर सेहर या ख़बीसों का साया होता है। मारवाड़ी, जैनी, गुजराती, हिन्दू मरीज़ों तादात बनिस्बत मुस्लिम अवाम के ज़्यादा होती है।
दरगाह के ख़ुद्दामों में अल्ताफ़ बापू, आफताब बापू, डी.एस.पी. साहब वग़ैरा इलाज बेहतर तरीक़े से करते हैं। हर साल मुहर्रम के महीने में दातार बापू का उर्स मुबाराक होता है। इस साल महीने की २५ तारीख से उर्स का आगाज़ होगा और २८ अगस्त को अल सुबह ४ बजे उर्स का इक़्तेदाम होगा। जिसमे संदल चढ़ाया जाएगा, गुलाब जल, लोबान की धूनी और अत्तर से आस्ताने को पाक किया जाता है। नज़र नियाज़ का एहतेमाम होता है, और तमाम पुराने छल्ले खुल जातें हैं नए छल्ले बांधे जाते हैं।
उंझा अहमदाबाद अजमेर हाईवे पर वाक़े है। और रेलवे स्टेशन भी जहाँ तक़रीबन बॉम्बे से अजमेर, अहमदाबाद से अजमेर, दिल्ली जयपुर जाने वाले तक़रीबन तमाम एक्सप्रेस गाड़ियां रुकती हैं।
Zuber
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