Thursday, 25 August 2022

पाकिस्तान में ७० साल की ख़ातून ने किया निकाह।

नाज़रीने गिरामी,     

पाकिस्तान में एक ७० साल की ख़ातून ने अपने से ३५ साल की कम उमर के मर्द से अग़द निकाह किया। यह ख़बर जैसे ही सोशल मीडिया पर वाइरल हुई संघियों, शिद्दत पसंद क़ाफ़िरों और बीजेपी वालों के जिगर और जिस्म पर अंगारे जलने लगे।  संघी समाज हर मुद्दे पर इस्लाम और पैग़म्बर की शाने रिसालत में गंदगी और ग़लाज़त जो अपने मुँह की राह ख़ारिज करते हैं उनको पाकिस्तानी अवाम का ज़ूता है।  ७० साला ज़ईफा  दुल्हन और ३५ साला शोहर।  इन संघियों, कट्टरपंथी हिन्दू और बीजेपी वालों को पाकिस्तानी ही सही और दुरुस्त पटकनी देते हैं।  ऐसे एक नहीं बल्कि कई मिसालें मौजूद हैं।  गुजिश्ता साल साल १८ साल की लड़की ने ६० साल के ज़ईफ़ से अपनी मर्ज़ी से निकाह किया और दोनों ही अपनी अज़वाजी ज़िन्दगी में खुश हैं।  क्योंकि इस्लाम में निकाह के लिए उमर की कोई क़ैद नहीं है।  अगर क़ैद है तो मज़हब की कोई भी लड़का या लड़की किसी गैर मज़हब से निकाह नहीं कर सकता या सकती।  दोनों फ़रीक़ों का मुस्लिम होना लाज़िम हैं।  नहीं तो वोह शादी नहीं बल्कि ज़िना होगा और पैदा होने वाली नस्ल हरामी।  अब पाकिस्तान और इस्लाम की ऐसी रवादारी देख कर संघीयों के दिलों पर सांप लौटते हैं। जब उनके पास कहने के लिए कुछ अलफ़ाज़ ही नहीं बचतें हैं तो अपने दिल का ग़ुबार और नफ़रत को वोह अपने मुँह से ख़ारिज करते हैं। 

दूसरी  संघी अवाम की मुसलमानों से हसद की वजह उनकी क़ुव्वत और ताक़त है।  मुस्लिम अवाम ६० साल में भी १८ साल की बच्ची से शादी कर के उसको मुतमईन कर रहा है और कोई तो बाल विवाह कर के भी भाग खड़ा हुआ।  तो यह बात साबित होती है जो ज़न्खे होतें हैं उस ख़ाविँद की लुगाई उसको छोड़ कर अपने आशिक़ के साथ भाग जाती है। या ख़ाविँद अपनी लुगाई को छोड़ भागता है।  हिंदुस्तान में दोनों ही मिसालें मौजूद हैं।    भागने वाली लुगाई भी और भागने वाला शोहर भी। 

जब शोहर ही ज़न्खा था तो लड़के किस के थे।  कई सालों तक शोहर से अलहदा रहने के बाद भी लड़के कैसे पैदा हुए।  अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए दूसरों पर ऊँगली उठाना बोहोत आसान हैं।  आलिशान महल में रहने के बाद  भी तुम्हारी इज़्ज़त मेहफ़ूज़ रही और बच्चे जाइज़ हैं।  और हम पर ऊँगली उठाते हो।  अगर सब कुछ दुरुस्त था तो घर निकाला काहे को दिया गया।  रखना था अपने पास।

यह तो अपने अपने लठ का कमाल है किसी से एक नहीं संभाली जाती कोई कोई ४ रख लेता है।  किसी से महज़ एक विकास पैदा नहीं किया जाता कोई कोई २५ पैदा कर देता है।कहने का मक़सद वही है लुगाई करना या विवाह करना आसान है पर लुगाई को मुतमईन करना बोहोत बड़ा इम्तेहान होता है।  यह क़ुव्वत के कंगलों का काम नहीं है।  ज़नखा योगी गाये की पूछ की तरह अपनी लुगाई की चोटी के नीचे तलाशता है।  वहीँ अब्दुल का फ़रज़न्द योगी (साधु) की लुगाई को अपनी मोहब्बत में दीवाना करता है। 

गंदगी की मशीन संघी, कट्टरपंथी हिन्दू और बीजेपी वाले सदा इस्लाम और मुसलमानों से हसद ही उनकी क़ुव्वत और ताक़त की वजह से रखतें हैं। और गलतबयानी ही अपनी कमी अपनी कमज़ोरी को छुपाने के लिए करतें हैं।   इस्लाम के निकाह के फलसफे पर सदा नुक़्ता चीनी करना और अपने किरदार को नहीं बताना।  मुस्लिम आपस के रिश्तों और क़राबत वाली लड़कियों और लड़कों से जो निकाह करतें हैं वोह डंके की चोट पर खुल्लम खुल्ला निकाह करतें हैं।  किसी माई के लाल या किसी दहशतगर्द, ज़ालिम दरिंदे किसी मोदी का हिंदुस्तानी क़ानून में वोह ताक़त नहीं के क़राबत वाली लड़के और लड़किओं से मुसलमानों को निकाह करने से रोक सके।  हमको यह हक़ हमारा शराई क़ानून, शराई अदालत देती है।

संघी, शिद्दत पसंद काफिर और बीजेपी वाले अपनी बदकारियाँ हरामकारी को छुपाने के लिए इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करतें हैं।  क्योंकि संघीयों का हर काम पीछे के दरवाज़े वाला चोरी छुपे वाला होता है। 

१.         जब किसी संघी को हिन्दू लड़की पर दिल आ गया और वाल्देन विवाह के लिए राज़ी नहीं हुए तो बाँध दी राखी।  अब लड़की के वाल्दैन मुतमईन हो जातें हैं की राखी बंद भाई है।  अब इस राखी की आड़ में दोनों वोह सब कुछ कर बैठते हैं जो एक शोहर बीवी को करना चाहिए।  फिर या तो घर से भाग जातें हैं या हामला लड़की भाई के बच्चे को पैदा करती है और होती है पुलिस रिपोर्ट।  ज़िना का केस दर्ज हार्माकारी का गुनाह। 

२.       फिर भाई की बीवी पर जब देवर की नज़रे खराब होती हैं और भाभी से वोह सब नहीं मिलता जो देवर चाहता है, तो शैतान इस क़दर हावी हो जाता है की भाई का क़तल तक कर दिया दिया जाता है।  फिर हिन्दू मज़हबी रिवायत को क़ायम करने के लिए बगैर शादी के देवर भाभी का इसतेसाल (शारीरिक शोषण) करता है।  अब मज़हबी बंदिशों के हिसाब से भाभी कुछ बोल भी नहीं पाती है।  क्योंकि नस्ल को बढ़ाना भी तो है।  और फलसफा ही यही है अगर शोहर अकाल मौत मारा जाए या ज़न्खा हो या औलाद पैदा करने की क़ुव्वत और ताक़त नहीं रखता हो तो देवर के साथ भाभी को सोना होगा और नस्ल को आगे बढ़ाना होगा।  

३.        लव रात्रि: लव रात्रि में शराब के नशे में चूर जवान बहने और भाई रक़्स करतें हैं और फिर रात को अँधेरे सूनसान हल्क़े में गुनाह कर बैठतें हैं।  या दो अनजान लड़का और लड़की लोव रात्रि में रक़्स करते हैं जिसको की गरबा बोला जाता है फिर होते हैं गुनाह।  ज़िना।  ऐसी बातें काहे को नहीं बताते हो। 

इन संघी दहशतगर्दों, शिद्दत पसंद क़ाफ़िरों और बीजेपी वालों को बताने का मक़सद वही है इस्लाम में निकाह के लिए उमर शर्त नहीं है।  एक ५४ साल का मर्द २३ साल की लड़की से निकाह कर सकता है।  और ना ही एक से ज़ाइद शादी करने पर कोई क़ैद है।  हाँ अगर क़ैद है तो मज़हब की, निकाह के वक़्त दोनों मुस्लिम होना चाहिए। 

अगली नशिस्त में एक से ज़ाइद निकाह करने वालों और औरत के हुक़ूक़ के ऊपर बयान करूंगा। 

जुबेर

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