नज़रिने गिरामी,
हिंदी में एक कहावत कहते हैं "अध जल गगरी छलकत जाए" और इंग्लिश में “empty pots making much noise” भारत में दौरे हाजरा में शिद्दत पसंद काफिरों, संघी दहशतगर्दों और बरसरे इक़्तेदार तंज़ीम बीजेपी की वही हालत है। जैसा की बरहना (नंगी) नचौड़ी कैबरे डांसर (बार बाला) ने उधम मचाया था। "माफ़ी मांगों" ऐसा लग रहा था की अगर माफ़ी नहीं मांगी गई तो अभी यह कैबरे डांसर अपने कपडे उतार कर स्पीकर को ही बोल बैठेगी अब तो करो ना। अब तुम से कैसी शर्म हया। में ऐवान और तमाम हिन्दुस्तानी अवाम के सामने बोहोत पहले नंगी तो हो चुकी हूँ। जब ४१० का गैस सिलिंडर और ६३ रूपये पेट्रोल पर रोड पर तमाशा करती थी। और अब १२०० का सिलिंडर और ११५ का पेट्रोल होने पर भी माफ़ी मांगो चिल्ला रही हूँ। तो मुझ जैसी नंगी बदचलन कुलटा अपनी ही दोस्त के शोहर पर डाका डालने वाली चुड़ैल को तुम भी आज़मा लो।
नाज़रीन आज कल बीजेपी तिरंगे को अपनी ढाल बना कर जशने आज़ादी बनाने के लिए अवाम को उकसा रही है। ऐसा महसूस होता है की इनसे ज़्यदा वतन परास्त कोई अवाम और ना कोई तंज़ीम होगी। दरअसल तिरंगे की आड़ में अपनी बदकारिया हरामकारी गुनाहों को छुपाने की एक स्कीम हैं।
बीजेपी की इस तिरंगा मोहीम को मीडिया के ज़ाफ़रानी ग़ुलाम मक़बूल बनाने की हिकमत पर काम कर रहें हैं। इन ग़ुलामों को इतना भी इल्म नहीं की मोहब्बत और नफरत किसी भी इंसान के किरदार और अमल से होती है। ना ही किसी को जब्र कर के तलवार के ज़ोर पर दहशत फैला कर मोहब्बत के लिए क़ाइल किया जा सकता है और ना ही दिखावा, झूटी फरेबी बातें नफरत को मोहब्बत बदल सकती हैं। जिसको माशूक़ से मोहब्बत है उसको दिखावे की ज़रुरत ही नहीं होती है। उसका किरदार और अमल दिखा देता है की मोहब्बत है या नफरत।
मोहब्बत मालिके कायनात की एक अज़ीम नेमत होती है। जब दो फ़रीक़ ख़्वाहा वोह दो इंसानी जिस्म हो या इंसान किसी और जानदार शै से सच्ची और बेलौस मोहब्बत करता है तो उस मोहब्बत की गवाही कायनात का हर ज़र्रा देता है। और ऐसी मोहब्बत मक़बूल होती है। क्योंकि उस सच्ची मोहब्बत पर अल्लाह और उसके फरिश्तों की रहमतों का नुज़ूल होता है। लेकिन यह क्या यहाँ तो उल्टा हो रहा है, जब से मोदी, बीजेपी ने हूकूमते हिन्द की या जिस किसी भी सूबे की क़यादत संभाली है भारत रूसवा, ज़लील होता जा रहा है और अवाम ग़ुरबत और मुफलिसी में ज़िन्दगी गुज़ारने को मजबूर है। अमवातों की तादात बढ़ती ही जा रही है। क़ुदरती क़ेहर आसमान से ऐसे टूट रहा है जैसे आसमान से आतिश बरस रही हो। क्योंकि मोदी और बीजेपी संघ परिवार दोगली और झूटी फरेबी मोहब्बत करतें हैं। नाम भाई का और काम क़साई का। इनका भारत से मोहब्बत का पैमाना महज़ एक दहशतगर्द नारा है वन्दे.... या परचम की आग़ोश में कुछ भी गुनाह कर डालो सब माफ़। वतन के तमाम असासे फ़रोख़्त कर डाले, तमाम आईनी इदारों को ग़ुलाम बना कर उनको ग़ैर क़ानूनी और ख़िलाफ़े दस्तूर काम करने पर मजबूर कर दिया। यहाँ तक की अदलिया तक को ग़ुलाम बना लिया और आला अदालत (सुप्रीम कोर्ट) हाई कोर्ट के फैसले इन्साफ पर मब्नी नहीं बल्कि ज़ाफ़रानी और बीजेपी की तस्कीन वाले होने लगे।
बीजेपी और संघियों का हर अमल ग़द्दारी भरा होता है। ना ही वतने अज़ीज़ से मोहब्बत है और ना ही अवाम से। जब हिन्दुस्तान के हर असासे को मौजूदा ईस्ट इंडिया कंपनी के डाकूओं (ताजिरों) अडानी, अम्बानी को फ़रोख़्त कर दिया। फिर किस बुनयाद पर मोहब्बत का दम भरते हो। सिर्फ और सिर्फ दोग़ला और फरेबी चाल चलन ताके तिरंगे की आड़ में हमारी बदकारियाँ हरामख़ोरी छुपी रह जाएगी और हम सबसे बड़े ग़द्दार अंग्रेज़ों के दलाल हो कर भी वतन परास्त कहलायेगें।
बिहार में नितीश ने वही किया जो दूसरी तंज़ीमों के साथ ग़द्दार पार्टी बीजेपी ने किया था फिर इतना वबेला मचाने की कोई ज़रुरत ही नहीं है। हमारी कोई भी बात ग़लत साबित नहीं होती है। ९९% दुर्सुत और सही। जब नितीश के साथ बीजेपी ने साजिश के साथ हुकूमत क़ायम की थी तभी हमने हमारे ब्लॉग मज़मून पर सरकार का पूरा हाल बयान कर दिया था। और यही लिखा था यह सरकार ज़्यादा नहीं चलेगी हर रोज़ रस्सा खींची होगी। हर बार ज़हर का प्याला पीना होगा। और अगर ज़्यादा खींच तान हुई तो सरकार गिरेगी।
शिंदे ने बीजेपी के बहकावे और गिरफ्तारी के ख़ौफ़ में आ कर अपने ही मराठा भाई और महाराष्ट्र की अच्छी खासी चलती हुई सरकार के साथ ग़द्दारी की तो है लेकिन शिंदे को क्या पता की कब उसका सर तन से जुदा कर देगी यह माफ़ी पार्टी बीजीपी। शिंदे की ग़द्दारी के ऊपर भी मज़मून लिखा है और क्या होगा पहले ही बता दिया गया है।
बीजेपी इस जंग में अपने कारिदों के दिलो दिमाग़ में शक शूकूम क़ायम रखने के लिए हिंदुत्व की रक्षा की जंग बोल रही है। यह जंग उसूलों की है। सच्चाई बनाम फ़रेब की जंग, दोग़ले ग़द्दार और हक़ के दरमियान जंग है। जालसाज़ साजिशी कपटी बनाम सच्चों की जंग, नाइंसाफ बनाम इन्साफ के दरमियान जंग। जैसा की मेने मेरे मज़मून में लिखा है अगर शिंदे से ज़्यादा फायदा देने वाला कोई दूसरा ग़द्दार मिल गया तो होगी शिंदे की गर्दन क़लम। बीजेपी और संघी दहशतगर्दों का तो काम ही यही है। जो तंज़ीम अपने मफ़ात के लिए दो मराठा भाइयों में जंग करवा सकती है गद्दारी करवा सकती है उसकी क्या ज़ामिन है की कोई दूसरा फायदा देने वाला मिलेगा तो शिंदे का सर क़लम नहीं होगा।
मोदी डीपी तब्दील करने की बात करता है। यह तो वही है मुँह पर राम बगल में गाये को काटने के लिए शमशीर। क्योंकि इन ग़द्दारों के पास किरदार की कमी है। जहाँ एक जानिब सूबे शुमाल में गाये की गर्दन क़लम करने पर पाबन्दी है। वही नार्थ ईस्ट में इंतेखाब आने पर गाये का खुल कर सर तन से जुदा होता है। जहाँ सूबे दरमियान, गुजरात में गाये की गर्दन क़लम करने की पाबन्दी है वही गोआ में बीजेपी की हुकूमत होने पर गाये को ज़मीन पर पछाड़ कर गर्दन काट डाली जाती है। फिर तमाम हिन्द में गाये को काट कर उसका गोश्त बेरुन मुल्क भेजा जाता है। डीपी तब्दील करने से क्या होगा अगर दिल में हिंदुस्तान की नफरत और उसके अवाम के खिलाफ ज़हर भरा हुआ है। उससे तो बेहतर है पाकिस्तान का परचम लगा लिया जाए। बात वही है बीजेपी और हिन्दू दहशतगर्दों से गुज़ारिश यही है झूटी और दोगली वतन परस्ती की बातें करना बंद करें। तुम तरंगे की आड़ में अपने काले कारनामे नहीं छुपा सकते। मौत तो तुम शिद्दतपसंदों, संघी दहशतगर्दों और बीजेपी वालों को ऐसे तलाश करेगी जैसे की भूखा भेड़िया अपने शिकार को तलाश कर लेता है। तुम्हारे किरदार से ग़द्दारी और फ़रेब की बू आती है और तुम्हारा महज़ डीपी तब्दील करना, तिरंगा यात्रा निकालना, नारा लगाना यही वतन परस्ती का पैमाना है।
कितना ही तुम जैसे गुनाहगार अपने आपको तरंगे की ढाल में छुपाने की कोशिश करें लेकिन बच नहीं पायेगें। जब गोली चलेगी तब तुम्हारे बदन को छलनी कर देगी तरंगे के साथ। तिरंगा ढाल उसका बंगेगा जो असली वतन परास्त होगा। जो देश को, तरंगे को दस्तूर को अपने मफ़ात के लिए इस्तेमाल और इन पर सियासत नहीं करता होगा। जो क़ानून, दस्तूर की ख़िलाफ़वर्ज़ी नहीं करता होगा। तुम लोग तो इतने बड़े पाकिस्तान भक्त हो की जहाँ सियासी नफ़ा दिखा पाकिस्तान की तरफ चले जाते हो। जब पाकिस्तान का मसला हल हुआ की भारत की अस्मिता तिरंगे के लिए जान देगें ऐसी बातें करने लगते हो। तो ठीक है जान दो तरंगे के लिए। कभी मुसलमानों पर आ जातें हैं फिर कश्मीर चले जातें हैं। तुम जैसे माफ़ी वीरों से गद्दारों से तरंगे की अज़मत और भारत की अस्मिता की बातें अच्छी नहीं लगती। वही बात करो जो तुम्हारे मुँह से हगते हुए अच्छी लगती है।
हिन्दू अक्सरियत जमात तमाम तंज़ीमों को मिला कर आज कल बोहोत कूद रहें हैं पाकिस्तान के खिलाफ जंग का बिगुल फूंक दो और आज़ाद कश्मीर को भारत का हिस्सा बना लो तभी मसलाये कश्मीर हल होगा। इससे क़ब्ल कई दफ़ा २०१९ के बाद ऐसे जंगी मरीज़ों को इस मसले पर जवाब दे चूका हूँ। ताहम यह मेरी ज़िम्मेदारी है की फिर से इन जैसे जंगी मरीज़ों को ललकार दी जाए। करो जंग अगर जंग हुई तो उसके बाद ते होगी हिंदुस्तान की तक़दीर और मुस्तक़बिल। जैसा की कई दफ़ा मेने कहा है, २०१४ से क़ब्ल शिद्दत पसंद, बीजेपी वाले और संघी अनासिर बोलते नहीं थकते थे मोदी आएगा तभी मसलाये कश्मीर हल होगा। हमने कहा ठीक है ले आओ, फिर बोले जब तक बीजेपी कश्मीर में हुकूमत नहीं बनाएगी तब तक मसलाये कश्मीर हल नहीं होगा, हमने कहा ठीक है बना लो, फिर जब तक ३७० नहीं हटेगी मसलाये कश्मीर हल नहीं होगा हमने कहा ठीक है हटा लो। लेकिन मसलाये कश्मीर जैसा हम कहतें हैं हल तभी होगा जब या तो कश्मीर को आज़ादी दी जाएगी या उसको पाकिस्तान के साथ ज़म किया जाएगा। ३७० हटने का बाद तो जैसे भारतीय फौजियों की मौतों की फेहरिस्त में इज़ाफ़ा ही हो गया है। वज़ीरे दाख़ला ने रिपोर्ट दी है गुजिश्ता एक साल में भारत के १५५ जवान कश्मीरी मुजाहिदों और हुर्रियत के दीवानों के हाथों ढेर हुए। यह अदद महज़ एक साल की है और आज ४ साल का वक़्फ़ा हो गया है ३७० मंसूख करने के बाद कितने जवान ढेर हुए और कितने अवाम।
फिर यह जंगी मरीज़ पाकिस्तान जैसी अज़ीम इस्लामिक सल्तनत से जंग की आरज़ू रखतें हैं चलो जैसा हर बार बोला है कर लो दिल इस बार फिर चुनौती है करो जंग। हम तैयार हैं।
Zuber
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