Thursday, 4 August 2022

दो मज़हबी ब्रादरान के पैदलों का वाज़े पैग़ाम।

English version 

AUTONOMOUS JOURNALIST

Clear message of two community walkers.

https://autojourna.wordpress.com/2022/08/04/clear-message-of-two-community-walkers/


नाज़रीने गिरामी

एक अर्से तवील से कावड़िया राहे   हक़ को हासिल करने के लिए पैदल चलते हैं।  और हर साल कावड़िये दहशत, गुंडागर्दी, क़त्ल, छेड़छाड़, अवामी और ज़ाती जायदाद को तोड़ना जैसे अमल में मुलव्विस रहतें हैं।  ऐसे आमाल से यह अपनी दहशतगर्दाना रवैये का साफ़ पैग़ाम दे रहे हैं।

इस साल दो मुस्लिम नौजवानों ने पैदल चलकर हज बैतुल्लाह के सफर का आग़ाज़ किया।  एक केरल का है दूसरा महाराष्ट्र का है। इन दोनों पाकीज़ा हज्जाज की ज़ियारत करने के लिए उनके आसपास भारी हुजूम जमा होने लगे। लेकिन किसी भी जगह से कोई नाज़ेबा वाक़ियात या किसी तरह की तशददुत, आतिश या छेड़छाड़ की कोई इत्तेला नहीं मिली। हज्जाज बग़ैर किसी तशददुत, दहशत, नफरत या तशददुत का पैग़ाम दिए बिना पुर अमन तरीकेकार हिकमत से अपनी मंज़िले मक़सूद यानी मक्का और मदीना की जानिब बढ़ रहे हैं। इस मज़मून के बाद अगरचे बदअमन, नफरत फैलाने वाले, कावड़ियों के पैरोकार हज्जाज और उनकी मज़हबी अक़ीदतमंदी को बदनाम करने के लिए मसला पैदा करेंगे तो यह अलग बात होगी।  लेकिन जानबूझकर हज मुसाफिरों की जानिब से अभी तक कोई तशददुत नहीं हुई है। भारत में पुलिस और मुताल्लिक़ा इंतेज़ामिया को इन हज मुसाफिरों के दौरान पैदल सफर मोहताद रहना चाहिए। बेरुन मुल्क मुताल्लिक़ा मुमालिकों की इंतेज़ामिया को इन हज्जाजे किराम की जानिब तवज्जो रखना चाहिए। क्योंकि २०१४ के बाद शैतान और शिद्दतपसंदों ने तमाम आलम के हर ख़ित्ते में अपने दहशत के कारख़ाने क़ायम कर लिए हैं और वे इस्लाम की पाकीज़ा ख़ुश्बू, पैगंबर सल्लम की तालीम को तोड़फोड़ करने के मिशन पर हैं। भारत में वे खुले तौर पर इस्लाम पर मज़ाक कर रहे हैं और इस्लामोफोबिक सरगर्मियों में शामिल हैं, जबकि भारत से बाहर वे इस तरह की सरगर्मियों को अपने स्लीपर सेल और एजेंटों के ज़ारिये पूरी कर रहे हैं।

हर साल की तरह इस साल भी कावड़ियों ने बेपनाह उधम मचाया है और बेहयाई का मुज़ाहेरा किया है. ये नफरत फैलाने वाले, शरंगेज़ मुजरिमाना आमाल में शामिल थे।  जिसमें फौज के अफसर का क़तल और दोराने महादेव को पाकीज़ा पानी ले जाने के लिए पुलिस अफसरों के साथ मारपीट करना शामिल था। उनकी दहशत अंगेज़ और मुजरिमाना कामों में पुलिस थाने के साथ-साथ पुलिस के हूकूमती दस्तावेज़ को आतिशे नार करना भी शामिल था। कारों और इमारतों समेत अवामी और ज़ाती जायदात को तबाह करना। शराब के नशे में मस्तूरातों और बच्चिओं के साथ छेड़खानी करना शामिल है।

दर हक़ीक़त में इन कावड़ियाओं ने अपना रास्ता तब्दील कर लिया और ममनूअ हल्क़े में घूस गए।  जिन सड़कों पर उनको चलने की इजाज़त थी और जो पहले से ते कर्दा थी वोह सड़क को छोड़ अवामी हल्क़े में घूस गए, जहाँ इनको जाने की कोई हाजत नहीं थी। फिर जो कोई भी इन कावड़ियों के रस्ते में आया है, उन्होंने उसको क़तल कर दिया तबाह कर दिया या उसे आतिशे नार कर दिया।

उसके ऊपर सितम देखिये सूबे शूमल का चीफ जस्टिस ज़ाफ़रानी साधू योगी आदिनाथ ने पूरी तरह ख़ामोशी इख़्तेयार कर रखी है और कावड़ियों की दहशत के खिलाफ कोई बुलडोजर काम नहीं किया। इतना ही काफी नहीं है यहाँ तक कि आला पुलिस के ख़ाकी बहुत ही अदना दर्जे का बरहना रक़्स करते हुए हावभाव दिखाते हैं जब आला रैंक के आईपीएस ३ सितारे, २ सितारों के पुलिस अफसरों ने इन कावड़ियों के पैरों की मालिश शुरू कर दी। सूबे के सीनियर पुलिस के अफसरों ने लेडी कांस्टेबलों से कावड़ियों को इंतेहाही इत्मीनान और पुर सुकून देने के अमल करने के लिए कहा।

सूबे शुमाल का चीफ जस्टिस योगी अगिदित्नाथ के हमराह पुलिस डायरेक्टर जनरल ने कावड़ियों पर अर्क़ गुलाब और गुलाब की पंखुड़ियों की बौछार की, जो दहशतगर्दना और मुजरिमाना अमल में शामिल थे। दहशत पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाना, क्या यह दहशत को फ़रोग़ देना और इश्तेयाल अंगेज़ी को बढ़ावा देने जैसा नहीं है।

दूसरी जानिब अगर कोई मुसलमान बिना किसी नुकसान के सुनसान जगह पर अमन पसंद तरीक़ेकार हिकमत से नमाज़ अदा करता है तो उसे फ़ौरन गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है।

फिर भी हिंदू ज़ाफ़रानी अनासिर कावड़ियों के देहशती अमलों को भी तस्क़ीनी वजह से तारीफ़ करते हैं और दिगर मज़ाहिब जैसे इस्लाम, ईसाई, दलितों को अदना तरीन जुबांन के साथ रूसवा और ज़लील करतें हैं।

मैं भारत के अवाम और आलमी बरादरी पर इस मुद्दे को छोड़ता हूँ, की इस बात की तस्दीक़ करें कौन अमन पसंद है, और कौन पुरतशददुत है और देहशती अमलों में शामिल है।

Zuber

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