Wednesday, 24 August 2022

सब कुछ तबाह और बर्बाद हो गया।

ख़ंजरे ज़ालिम से ज़ख़्मी हुआ जिगर

वक़्त के फ़िरौन ने मचाया है ग़दर

क़ाज़ी तेरी अदालत में, है फ़ैसला हक़

तेरा फ़ैसला होगा हाकिमे वक़्त पर ज़र्ब

 

सहाफ़ी ज़ुबेर


नाज़रीने गिरामी, 

जिस हिसाब से मालिके मुतलक़ का क़ेहरे आसमानी उन तमाम हल्क़ों पर बरस रहा है जो शैतानों के हामी रहे थे या शैतान, दरिंदे, ज़ालिम, दहशतगर्द से ख़ौफ़ज़दा हो कर उसकी कही हुई बातों पर अमल पेरा हो गए थे।  हाल ही में तमाम हिन्द (ख़ास शुमाल और दरमियान) ज़ेरे आब है।  सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) में बारिश आफत बनी हुई है।  सब कुछ तबाह और बर्बाद हो चूका है।  यह उन नाज़ेबा हरकतों का जवाब है जो सूबे के दरिंदा सिफ़त, ज़ालिम तरीन हाकिम ने अपने इक़्तेदार के नशे में चूर हो कर इंसानियत ख़ास मुस्लिम अवाम पर माहे रमज़ान में ज़ुल्म और तशद्दुत की थी।  

जब हर मस्जिद, ख़ानक़ाह और हर मुस्लिम इदारों में इन शिद्दत पसंदों को लंगूर मंदिर या शिव का लिंग निकलता हुआ दिख रहा था।  क्या बोलते थे शिद्दत पसंद काफ़िर, बीजेपी वाले संघी दहशतगर्द लंगूर चालीसा।  उस वक़्त मई-जून में खबरनामों की हर खबर पर बोला था मानसून आने दो सब कुछ बहा कर ले जायेगें।  तबहा कर देंगे  बर्बाद कर देंगें।  

नाज़रीन इस क़ेहरे इलाही में सिर्फ शैतानी उलूम का माहिर और दरिंदे का देश हिन्द ही नहीं आया बल्कि उसके एहबाब जिन्होंने कभी तो शैतान की पैरोकारी की थी वोह इस अज़ाबे इलाहे में आ गए।  

यहाँ में ख़ास यूं.ऐ.ई. और दुबाई का नाम वाज़े करना चाहता हूँ जो इस क़ेहरे इलाही से मुत्तासिर हुआ।  इस तरह का क़ेहरे इलाही दुबाई और यूं.ऐ.ई. की तारिख में कभी नहीं देखा गया।  रेगिस्तान में इस क़दर बारिश उसकी क्या वजह है।  पानी में कारे ऐसे तेर रही थी जैसे बच्चों के खिलोने।  नाज़रीन आपने सोचा है।  उसकी सिर्फ तीन वुजूहात हैं। 

१.         अबू धाबी में कुफ्र का मरकज़ और सबसे क़वी मंदिर का इफ्तेताह:  उस मंदिर के तामीर में वक़्त का हाकिम यज़ीद की नस्ल ना सिर्फ शरीक हुआ था बल्कि अपने सर के ऊपर मुजस्समे को रख कर थाल में सजा कर लाया था। 

२.     नूपुर शर्मा की नबी सल्लम की बेहुरमती के बाद हिन्द के हाकिम जल्लाद, ज़ालिम दरिंदे को अपनी ज़मीन में उतरने देना और उसका खैरमकदम करना।

३.   हिन्द के उस जल्लाद और शैतानी उलूम के माहिर की पैरोकारी करना और उससे मोहब्बत शफ़क़्क़त दिखाना।  

नाज़रीन किसी भी मज़हब की इबादतगाह पर कोई एतेराज़ नहीं है और ना ही उसको किसी क़िस्म की रोक है।  बल्कि मेरा कहना यही है की मंदिर के तामीर की इजाज़त किस के कहने पर दी गई।  एक शैतान, जल्लाद, ज़ालिम तरीन हाकिम के कहने पर मंदिर तामीर की गई।  जबकी उसके मुल्क में मस्जिदों के ऊपर डाका डाला जा रहा था।  बाबरी मस्जिद को झूट फ़रेब दग़ाबाज़ी से गसप कर लिया और तुम उस जल्लाद के कहने पर एक इस्लामिक मुल्क में मंदिर तामीर करवा रहे हो।  फिर उसके मुल्क में नबी की बेहुरमती की गई और तुम उसके लिए रेड कारपेट बिछा रहे हो।  उसको अपने मुल्क का वीज़ा दे रहे हो।  तो तैयार रहो रब्बे कायनात के अज़ाब के लिए।  क्या तुम नूह अलैहे सलाम की औलाद का हशर भूल गए।  और वोह कुत्ता जिसका ज़िक्र क़ुरान करता है।  सिर्फ अस्हाबे कहफ़ की हिफाज़त में रहा तो उसका ज़िक्र क़ुरान में आया है। 

नाज़रीन हिन्द में और बेरुन मुल्क अगर इस ज़ाफ़रानी दहशत, ज़ुल्म, तशद्दुत, जब्र से निजात चाहिए तो ऐसे तमाम अनासिरों की फेहरिस्त तैयार करो और इनको क़तल करते चलो।  हर हूकूमती इदारों में यह कीड़े दाखिल हो चुके हैं।  अब इनके ख़िलाफ़ एलान जंग का वक़्त आ गया है।    जब तक इस दरसख्त की जड़ों में घूस कर इन ज़ाफ़रानी कीड़ों को ख़तम नहीं किया गया यह कीड़े ऐसे ही ज़हर फैलाते रहेगें। 

हिन्दुस्तान में हर हूकूमती इदारों में, सहाफत में, अदालिया में, इन्तेज़ामियाँ में, फौज में, बैंकों में अलग़रज़ हर उस जगह इनको तलाशो जहाँ यह ज़ाफ़रानी ज़हरीले कीड़े दाखिल हो चुके है इनको तलाशो और क़तल कर दो।  बेरुन मुल्क हिन्द के सफारत खानों में इनको क़तल कर दो।  तभी इंसानियत और हिन्द बच सकता है नहीं तो हर उस ज़मीन को हर उस खित्ते को यह कीड़े बर्बाद कर देंगें तबाह कर देंगे जहां यह ज़ाफ़रानी कीड़े दाखिल हो चुके हैं। 

ज़ुबेर

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