Tuesday, 7 September 2021

ज़ाफ़रानी दहशत की हर तदबीर नाकाम। तालिबान हुकूमत का आग़ाज़।

 


अफ़ग़ानिस्तान में नई हुकूमत का आगाज़ हो गया है।   मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद अफ़ग़ानिस्तान के नए वज़ीरे आज़म होंगे।  आरज़ी हुकूमत में सिराज हक़्क़ानी वज़ीरे दाख़ला बनाया गया है जबकी मुल्ला याक़ूब को वज़ीरे दिफ़ा के ओहदे से सरफ़रोज़ किया गया है। 

मुल्ला हसन आख़ून्द केबिनेट के सर्वे सर्वा होंगे यानी वज़ीरे आज़म का ताज उनके सर पर होगा।   अब्दुल गनी ब्रदर नायब वज़ीरे आज़ाम होंगे।  खैरूल्लाह खैरख्वाह को इत्तेला वाज़ारतख़ाना दिया है।  अब्दुल हाकिम को क़ानून का वज़ीर बनाया है।  वहीँ तालिबान तर्जुमान जबीउल्लाह मुजाहिद को वज़ीरे इत्तेला का नायाब वज़ीर बनाया गया है।     

जिस तालिबान से भारत के ज़ाफ़रानी दहशत और ज़ाफ़रानी मीडिया के लंगूर-लँगूरनियों को अंगार लगती थी अब उस तालिबान हुकूमत के क़रार और क़ानूनों को मानना अफ़ग़ानिस्तान में रह रहे शिद्दत पसंद काफिर जो गुजिश्ता २० सालों में दरअंदाज़ी (घुसपैठ) कर इस्लामिक मुल्क में घूस गए थे और ज़ाफ़रानी ग़ुलामों को मानना पड़ेगा।  तालिबान हुकूमत को पूरा इख़्तेयार है की वोह अफ़ग़ानिस्तान में भारत के क़ब्ज़े वाले कश्मीर से गए मुहाजिरिनों को शहरियत दे लेकिन भारत के एक एक काफिर, बोध, जैन दरअंदाज़ (घुसपैठियों) को चुन चुन के इस्लामिक ज़मीन से बहार निकालेगें।  कोई भी ऐसा बाशिंदा जो की मुनाफ़िक़ाना किरदार रखता है या ज़ाफ़रानी दहशत का ग़ुलाम है ऐसे एक एक घोसस्पेठिये को चुन चुन के बहार निकालेगें।

तालिबान ने पहले ही वाज़े कर दिया है की अफ़ग़ानिस्तान की सरज़मीन अब और शरपसंदी, शिद्दत पसंद और दहशत का बोझ नहीं ढो सकती।  अफ़ग़ानिस्तान से किसी भी क़िस्म की दहशत को फ़रोग़ नहीं दी जाएग।   ख़िलाफ़े इस्लाम और ब्रदर वतनों के खिलाफ की गई साजिश का मुँह तोड़ जवाब दिया जाएगा।अब देखना यही होगा जितने भी दरअंदाज़ (घुस्पेठिये) अफ़ग़ानिस्तान में बैठे हैं उनके साथ नई हुकूमत का क्या रद्दो अमल होता है।  

भारत का ज़ाफ़रानी ज़हर और कीड़ा अमित तो बोहोत बोलता था एक एक घुसपैठिये को चुन चुन के बहार करेगें।   वोह तो अपना वादा पूरा नहीं कर सका लेकिन तालिबान ज़रूर करेगें।   क्योंकि जितने भी मुनाफ़िक़ सोच और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द भारत ने घुसाएँ हैं वोह सब अफ़ग़ानिस्तान, इस्लाम और पाकिस्तान के दुश्मन हैं।   इनको चुन चुन के इनके अंजाम तक भेजना ही नई सरकार की ज़िम्मेदारी होना चाहिए।  और यह एक बेनक़वामी क़ानून भी है।  दहशतगर्दी पर अफ़ग़ान हुकूमत को सिफर रवादारी इख़्तेयार करना होगी।  

Zuber 


 


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