Monday, 13 September 2021

शैतानी इलाक़े में फ़रिश्ता आया।

अज़ीज़ नाज़रीन,

इस बात का आप तमामी हज़रात को बख़ूबी इल्म हो चूका होगा की जिओ बाइडेन एक फ़रिश्ता सिफ़त इंसान और हाकिमियत के आला मुक़ाम पर फ़ाइज़ एक ऐसे इंसान हैं जो किसी भी ज़मीन को तबाह और बर्बाद महज़ अपनी अना, गर्द, गुबार और गुस्से के चलते बर्बाद होते नहीं देख सकते।   जितना तबाह उस ख़बीस और उसकी औलाद बुश ने इराक़, लीबिया और अफ़ग़ानिस्तान को किया था उतना ही सरसब्ज़ अब बाइडेन उनको करेगें।  हालांकी ग़द्दाफ़ी को हटाने और लीबिया पर हमला ओबामा की सदारत में हुआ था लेकिन उसकी नीव उस ख़बीस और शैतान के नुत्फे ने पहले ही रख दी थी।   ओबामा ने तो महज़ जो काम माज़ी की हुकूमत ने पास कर दिया था उसके ऊपर अमल किया था। 

जिस हिसाब से जिओ बाइडन काम कर रहें हैं उससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है की उनकी तरजीह जंग के लिए नहीं बल्कि अमन के लिए है।  और वोह इंसानी हुक़ूक़ के पैकर के रूप में आये हैं।   नाज़रीन बाइडेन ने दौरान इंतेखाब ही इस बात को वाज़े कर दिया था की वोह अमन की राह खोलेगें।  इंतेखाब जीत कर आने के बाद अपने पहले सहाफी इजलास में पैग़म्बर मोहम्मद सल्लम की उस हदीस को बताया था जिसमे अमन की बात की गई है।  और उन्होंने इस बात को साफ़ ज़ाहिर कर दिया था की अब वोह मज़ीद खून खराबा जंग के माहौल से अलहदा अमन की सियसत करेंगें।   हालांकि दुश्मनाने हक़ और ज़ालिम बादशाहों को इस बात से अंगार ज़रूर लगी होगी, जो इजराइल के चमचे हैं और दहशत, खून खराबे को फ़रोग़ देंतें हैं।   चाहे वोह यहूद दहशत हो या ज़ाफ़रानी दहशत यह दोनों वालिद फ़रज़न्द ही अमन के दुश्मन हैं।    

ख़ैर बाइडेन ने जो जो इन्तेख़ाबी मरहले में वादे किये थे उसको मुकम्मल कर रहें हैं।   इजराइल से ज़ालिम तरीन दहशतगर्द बगदादी का खात्मा उसके बाद अफ़ग़ानिस्तान से बावजूद भारत की मुख़ालेफ़त के फौजों को निकालना।  अब जैसा की ज़ाफ़रानी मंडी के लंगूर और लँगूरनियाँ उछाल कूद कर रहे थे की अफ़ग़ानिस्तान को अमेरिकी इमदाद नहीं मिलेगी और पाकिस्तान की फजीती होगी इमरान खान की बेइज़्ज़ती होगी मोदी ने मंसूबा बनाया है वगेरा वगेरा।    

इन सभी शक और शुकूक के गुबार को साफ़ करते हुए बाइडेन इन्तेज़ामियाँ ने फैसला किया है की अफगानिस्तान में तालिबान की आरज़ी हुकूमत को माशी इमदाद देगी।  अब अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान को ६४ मिलियन डॉलर की माशी मदद फ़राहम करेगा।  बाइडेन इन्तिज़ामियाँ ने बरोज़ पीर यह अहम फैसला लिया है।   और अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान की अवाम के लिए मदद का एलान किया है।  

टोलो न्यूज़ ने इत्तेला दी है की अक़वामे मुताहिदा में अमेरिकी सफीर लिंडा थॉम्पसन ग्रीनफील्ड ने माशी इमदाद को इंसानी मदद के रूप में बताया।   उन्होंने यूं ऐन में मज़ीद कहा की अफ़ग़ानिस्तान में हालात साज़गार नहीं हैं, ऐसे में अमेरिका ने इंसानी हुक़ूक़ के लिए ६४ मिलियन डॉलर देने वादा किया है।   वोह यही पर नहीं रुके उन्होंने मज़ीद एलान किया की ज़मीनी हालात पर ग़ौर करने और हालात का जायज़ा लेने के बाद मुस्तक़बिल में और ज़्यादा रक़म दिए जाने पर फ़ैसला किया जाएगा।       

इससे क़ब्ल चीन भी अफ़ग़ानिस्तान हुकूमत को मदद का एलान कर चूका है।  चीन ने २०० मिलियन यूएन तक़रीबन ३१ मिलियन डॉलर के क़रीब की माशी इमदाद देने का एलान किया है।  नाज़रीन एक बात वाज़े है शैतानी ताक़तें भारत जैसे तबाही, दहशत मचाने वाले मुमालिक हमेशा अपने हमसायों (पाकिस्तान, कश्मीर) को जंग के ख़तरात दिखाने वाले अपने असलाह और फौज की धमकी देने वाले मुमालिकों को आलमी बरादरी ने अलग थलग कर दिया है।   हर महाज़ पर दहशत और खून ख़राबा करने वाले ज़ाफ़रानी और यहूद दहशत को सिफारती शाकिस्त हो रही है।  

नाज़रीन जैसा की इस सहाफी ने अपने तमाम हिंदी और अंग्रेज़ी मज़मूनों में २०१९ से ही पेशनगोई करना शुरू कर दिया था की २०२१ की सदी अमन के लिए तारीख़ में दर्ज होगी। इस्लाम सरबुलन्द होगा मुसलमानों को हर हलके में इज़्ज़तफजाई मिलेगी। और मुसलमान हर हलके में पहले नंबर पर होंगे।मुसलमान आसमान की बुलंदी पर पहुचेगें और सबसे आखिर हदफ़ को हासिल करेंगे फिर पहले नंबर पर कब तक रहेंगे यह तो मालिके कायनात जाने।  


Zuber

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