Sunday, 5 September 2021

अब जर्राहों को दहशतगर्दों के आक़ाओं को पढ़ना होगा।

हिन्द के सूबे दरमियान (मध्य प्रदेश) के तमाम तिब्बी कॉलेजेस (मेडिकल कॉलेजों) में MBBS के तुलबाओं को ज़ाफ़रानी दहशतगर्द RSS का बानी केशव हेडगेवार जो की एक क़साई फितरत दहशतगर्द था और जनसंघ का दहशतगर्द शिद्दतपसन्द दीनदयाल उपाध्याय के ख़्यालात और दहशतगर्दाना मश्क़ के सबक़ की तालीम लेनी होगी।   इन दहशतगर्दों की तालीम देने से ज़ाफ़रानी हुकूमत और दिमाग़ी मुफ़लिस समझ बैठे हैं तालिब और तुलबाओं की दानिश्वाराना सौच में तरक़्क़ी होगी। 

ज़ाफ़रानी शिद्दतपसन्द हुकूमत के मुताबिक़ यह दहशतगर्द हिन्द का मुफक्किर है।  इन दहशतगर्दों शिद्दतपसंदों के मज़मून वैल्यू बेस्ट मेडिकल एजुकेशन में शामिल किया जा रहा है। 

दिगर नामों को भी इन दहशतगर्दों के साथ शामिल किया गया है।   आयुर्वेद के महर्षि चरक, सर्जरी के दादाजान आचार्य सुश्रुत और डॉक्टर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम भी हैं।  लेकिन जिस हिसाब से इन दहशतगर्दों और शिद्दतपसंदों के नामों के साथ कुछ खुसूसी नाम जोड़े गए हैं जैसे की बाबा साहब का उसके चलते ज़ाफ़रानी हुकूमत की मंशा साफ़ ज़ाहिर हो रही है।  

यह ज़ाफ़रानी हुकूमत बाबा साहब को इन संघ के दहशतगर्दों से शबी देना चाहती है और अपनी तंज़ीम की तरह हर दहशतगर्द को बाबा साहब और आला तालीमी आफ़ता दानिश्वरों के साथ खड़ा कर दो क्योंकि उनके नाम की वाशिंग मशीन में हमारे दहशतगर्द जमा होंगे, तो साफ़ शफ़्फ़ाफ़ हो कर निकलेगें।फिर अपने आप हमारे माज़ी (कल) के दहशतगर्द आज के दानिश्वर साबित होंगे।  

इस ज़िम्न में सूबे दरमियान का ज़ाफ़रानी तिब्बी वज़ीरे तालीम विश्वास सारंग का कहना है की उसने विभाग को नोट भेजा था उसके बाद कोर्स में इन सभी  को शामिल किया गया है।  ज़ाफ़रानी वज़ीर ने कहा की तुलबा हिन्दू शिद्दत पसंद हेगडेवार और आतंकी दीन दयाल उपपाधया की दनिश्वरी की तालीम पढ़ेगें. लेकिन वज़ीरे तालीम को यह सहाफी बताना चाहता ही की हक़ीक़ी दानिश्वर बाबा साहब और सर्जरी के बाबा आचार्य के साथ दहशतगर्दों के नाम जोड़ने से उनका माज़ी नहीं बदल सकता।  जो शिद्दत उन दहशतगर्दों ने मचाई थी जो उसकी ज़ेहनियत थी जो उसकी मश्क़, फलसफे और तहरीर उसकी किताब में दर्ज हो गई है उसको किस वाशिंग मशीन में डाल कर शफ़्फ़ाफ़ करोगे।  

मज़ीद ज़ाफ़रानी वज़ीरे तालीम बोलता है अब यह सभी तिब्बी अख़लाफ़ियात दर्स (मेडिकल एथिक्स लेक्चर) का हिस्सा होंगे।   उसने मज़ीद कहा की मेडिकल कौंसिल ने एथिक्स का लेक्चर जोड़ने का फैसला किया था इसलिए वतन की अज़ीम हाथियों जिन्होंने इस वतन की सक़ाफ़त, तालीम और अवाम की ख़िदमत को अंजाम दिया उनके बारे में पढ़ाया जा रहा है। 

यह सहाफी इस दिमाग़ी मुफ़लिस वज़ीरे तालीम से दरयाफ्त करता है की दहशतगर्द हेगडेवार और उप्पध्या ने किस तालीम में किस अवाम और कौन से सक़ाफ़त में ख़िदमत दी है।   हाँ इन आतंकिओं ने खूब आतंक मचाया और अपनी ज़हरीली ज़ुबान, मुत्तासिब अदब और फिरकावाराना दीवानों के बीजों से आज के भारत में ज़हर की काश्त को खूब फ़रोग़ मिली है।  

इस सहाफी का तो साफ़ मानना है की दहशतगर्द को एक तालीम साज़ के साथ एक सर्जरी के आचर्य के नाम के साथ शामिल करना मतलब उस तालीम साज़ और अज़ीम नाम की बेइज़्ज़त्ती है।  मतलब मध्य प्रदेश की ज़ाफ़रानी हुकूमत यह दिखाना चाहती है की बाबा साहब जैसा अज़ीम तालीम साज़ एक दहशतगर्द थे।   

इस सहाफी का तो साफ़ तौर पर मानना है अगर एक अच्छे किरदार वाले इंसान के साथ कोई दूसरा आता है तो उसकी आदत अतवार और उसकी अच्छाइयों का असर भी दुसरे इंसान पर होना शुरू हो जाता है.   लेकिन अच्छा इंसान इतना पुख़्ता होना चाहिए की दुसरे की बुरी आदतें उसके ऊपर हावी ना हों, नहीं तो अच्छा इंसान भी बूरा हो जाता है.  उसी हिसाब से अगर तालीम साज़ दानिश्वर बाबा साहब के साथ इन दहशतगर्दों को शामिल किया है तो उससे बाबा साहब का किरदार धूमिल हो रहा है.

दूसरी बात आज वैसे ही हिन्द में ज़हरीले फ़िज़ा आम हो चुकी है हर एक इंसान फिरकावाराना ज़हर से मुत्तासिर है।  और वोह ज़हर आया इन्ही दहशतगर्दों के दीवानों, तालीम और फलसफों से है।  फिर अगर जर्राहों और डॉक्टरों को ऐसे दहशतगर्दों, फ़िरक़ावर क़साइयों, जल्लादों, ज़ालिमों के सबक़ का दर्स दिया जाएगा हेगडेवार और उपाधय जैसे उस दहशतगर्द के किस्से बताये जायेगें तो डॉक्टर्स भी दहशतगर्द ही बन कर निकलेगें।  फिर ऐसे डॉक्टर्स के हाथों में क़लम नहीं बल्कि बंदूक होना चाहिए।   और ऑपरेशन के तिब्बी साज सामन के बजाय हाथ में तलवार, त्रिशूल, भाला होना चाहिए।   फिर उन डॉक्टर्स की ज़ुबान भी तब्दील करना होगी। 

                          ए मामू तेरी तो वाट लग गई है।   ए मामू लेट जा

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