Friday, 24 September 2021

एक और ज़ाफ़रानी दहशत का ख़ात्मा, इस बार रांची

अज़ीज़ नाज़रीन,

फ़रिश्ते की दुआ इस सहाफी को खूब लग रही है।   जैसा की ख़ुदा ऐ ज़ुल्जलाल से अपनी इंग्लिश नज़म में दरख्वास्त की गयी थी की फ़रिश्ते को भेज दे।   लगता है उसने वोह क़ुबूल कर ली है।  दीफ़ाई फौजियों को हर दुसरे रोज़ कामयाबी हाथ लग रही है।   और है, आगे और है। 

नाज़रीन जिस हिसाब से ज़ाफ़रानियों को गिरफ्तार कर के दीफ़ाई फौजी अपनी अदालत में उनके ऊपर मुक़दमा चला कर उनको फ़ासी पर टांग रहे हैं और किसी को एनकाउंटर में मौत की आगोश में भेज रहें हैं उससे बाईदुल वक़्त इन ज़ाफ़रानी कीड़ों का सफाया हो जाएगा और ज़रूर होगा।   

जिस हिसाब से इन ज़ाफ़रानियों ने मुस्लिम, अवाम को मौत की आगोश में भेजा था अब इनकी ही बारी है।इस ज़िम्न में एक और ज़ाफ़रानी भारतीय जनखा पार्टी के दहशतगर्द को दीफ़ाई फ़ौजिओं ने एक एनकाउंटर में ढेर कर मार गिराया है।

रांची के ओरमांझी में बीजेपी का एरिया कमेंडेन्ट (ज़िल्हा सदर) जीत राम मुंडा को दीफ़ाई फ़ौजिओं ने एक एनकाउंटर में जहन्नुम रसीद कर दिया है।   दीफ़ाई फ़ौजिओं के लिए यह किसी बड़ी कामयाबी से कम नहीं है।  नाज़रीन आपको इल्म है यह वही रांची और झारखंड है जहाँ पर सबसे ज़्यादा मुस्लिम अवाम की मोब लीचिंग हुई थी।         

अब बीजेपी वाले और ज़ाफ़रानी ज़हर इंतेख़ाब में किसी भी तंज़ीम के ऊपर नुक़्ता चीनी ना करें।  हमें (दीफ़ाई फ़ौजिओं) को किसी भी तंज़ीम का ताऊन नहीं है और ना हम किसी से मदद चाहतें हैं।   फिर शुमाली सूबे में जो ज़ाफ़रानी दहशतगर्द मारे गए वोह क्या है।   दरमियान सूबे (ऍम पी), बिहार, हरयाणा, उत्तराखंड, गुजरात में जो खाकी दहशतगर्द और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द मारे गए और आगे भी मारे जायेगें वोह क्या है।   यहाँ तक की साधू ज़हरीला नाग नरेंद्र गिरी को फांसी पर लटका दिया वोह क्या है।   फिर ९ अगस्त २०२१ को अपने एक हिंदी मज़मून  पंडित (साधु) और मुहाफ़िज़ की सच्ची मोहब्बत। साधू और कुछ मौत का ज़िक्र कर दिया था।   फिर भी हूकूमते हिन्द और शुमाली सूबे का वज़ीरे दरिंदा योगी भोगिनाथ गालिफ़ल रहा।   मारा गया नाग जो मुस्लिम अवाम से सख़्त नफरत करता था।   उसके बयानात ही उसकी नफरत का पैमाना छलका देते थे।  अभी तो और हैं।  

बरोज़ बुध दीफ़ाई फौजियों को उनके ख़ुफ़िया ज़ारायों से खबर मिली थी की ज़ाफ़रानी दहशतगर्द जीतराम मुंडा दहशत की मश्क़ को फ़रोग़ दे कर लौट रहा है, तभी फ़ौजिओं ने उसको घेर लिया और एनकाउंटर का आगाज़ हुआ, जिसमे ज़ाफ़रानी दहशतगर्द के जिस्म को दीफ़ाई फ़ौजिओं ने गोलिओं से पंचर कर दिया।  ज़ाफ़रानी दहशतगर्द, शिद्दतपसन्द हिन्दू और बीजेपी वाले अब कभी किसी को पंचर बाज़ ना बोलेगें और ना ही गोली मारो नारा देंगें।  

उस मरे हुए दहशतगर्द की लाश को आनन फानन में ओरमांझी के मेदांता शिफ़ाख़ाने ले जाय गया लेकिन जर्राहों ने उसको मुर्दा एलान किया।  उस दहशतगर्द के एनकाउंटर में ढेर होने की खबर से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।   फ़ौरन आला आफसारान मौक़ाए एन्काउंटर पर पहुंचे और उन्होंने तफ्तीश का आगाज़ किया।  इस एन्काउंटर में राहत की एक बात यह रही की किसी शहरी की जान माल का नुकसान नहीं हुआ।

दीफ़ाई सरबराह सहाफी जुबेर का नज़रिया

नाज़रीन अभी तो जंग बोहोत लम्बी चलेगी।   हमारी जंग फी सबिल्लीलाह है।  किसी इक़्तेदार, हाकिमियत,  ओहदे या रूपये के लिए नहीं है।  मुस्लिम अवाम में से जो भी अहल हो आला ओहदे पर फ़ाइज़ हो जाए।   हमें हमारी फ़क़ीरी में तस्कीन है।   एक एक शिद्दतपसन्द हिन्दू, एक एक ज़ाफ़रानी दहशतगर्द, एक एक बीजेपी वाले को मौत की आगोश में भेजेगें।  यह महज़ ज़ुबानी जमाखर्च नहीं है ज़रूर भेजेगें।   हमारी जंग किसी मज़हब या क़ौम के ख़िलाफ़ नहीं है। बल्कि दहशत के उस कीड़े को सफाये हस्ती से मिटाना है जिसने हिन्दुस्तान के शीरी खुश आब को अपने ज़हन की गंदगी से आलूदाफत और ज़हरीला किया।   वाज़े रहे की आला ज़ात ब्राह्मण शर्मा, तिवारी, मिश्रा हमारे हमख्याल सहाफ़ी जो हक़ की बात करते हैं या वोह हिन्दू जो ग़लत को कम से कम ग़लत कहने की हिम्मत रखते हैं उनसे हमारी कोई लड़ाई नहीं है।  लेकिन वोह मुस्लिम जो मुनाफ़िक़ है मक्कार, शाहनवाज़, मोहसिन, इस्लाम जैसे जो हक़ की बात पर बातिल ताक़तों की जी हूज़ूरी करतें हैं वोह भी हमारे दुश्मन हैं, और उनको भी ऐसी ही मौत नसीब होगी।   

नाज़रीन अभी गुजिश्ता हफ्ते सितम्बर २०२१ को एक हिंदी मज़मून अपने ख़ास अज़ीज़ों को भेजा था उसमे कुछ दर्द, और कुछ नसीहतें और कुछ पेशानगोई शामिल थी।  दो नागों का ज़िक्र था।  फिर फ़रिश्ते की दुआ ने कमाल कर दिया और अब हालात साज़गार हैं।  दर्द और तकलीफ में भी काफी राहत है।  अब सितम्बर को लिखा गया मज़मून कोई भी मेरा हमदर्द या अज़ीज़ों में से मन्ज़रे आम पर ला सकता है।  हमारे लिए अवाम की क़ैद थी, लेकिन जिनको भेजा है वोह ला महदूत हैं। 

Zuber

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