Saturday, 13 March 2021

गोली मारो के बाद चाकू, तलवार मारो सालों को।

अज़ीज़ नाज़रीन,

एक और भारतीय जनखा पार्टी का आला ओहदेदार जहन्नुम रसीद।   आसाम के तिनसुकिया में असेंबली इंतेखाबात से क़ब्ल बरसरे इक़्तेदार भारतीय जनखा पार्टी (बीजेपी) के एक सदरे आरज़ी दूकान (बूथ अध्यक्ष) को क़त्ल कर दिया गया है।  पुलिस ने उसी गांव के एक शख़्स जयचंद्र गोगोई को हिरासत में लिया है।   

ज़ाराये इत्तेला मालूमात के हिसाब से क़त्ल की वारदात बरोज़ जुमे की है।   जहाँ मार्गरिटा असेंबली इलाक़े के बोहिडिहिंग गांव की पंचायत रिहायशी देबानंद गोगोई बूथ सदर पर डम डम इलाक़े में किसी नावाक़िफ़ अनासिर ने चाक़ू से धावा बोल दिया और उसको चाकूओं से गोद गोद कर ज़ख़्मी कर दिया, गोगोई ज़ख्मों की ताप बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने दम तोड़ दिय।  

हर रोज़ की संघी दहशतगर्दों की इस तरह की हलाकत बीजेपी के नुमाइंदों की हर दुसरे रोज़ की मौतों से ज़ाफ़रानी तंज़ीम सख़्त ग़मगीन और ख़ौफ़ में है।  ज़ाफ़रानी तंज़ीम के आसाम बूथ सदर की हलाकत के बाद तश्वीश और ताज़ियाती पैग़ामात की आंधी आ गई।   वज़ीरे आला से ले कर तमाम सड़क छाप और गली, चौराहों नुक्कड़ों पर बैठी बीजेपी की मस्तूरातों के पैग़ामात आने शुरू हो गए।   

वज़ीरे आला के ट्वीट के बाद डीजीपी जी पी सिंह ने मुल्ज़िम जयचंद्र गोगोई को गिरफ्तार कर लिया है।  मज़ीद सिंह ने बताया की क़तल में इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार बरामद करने की कोशिश की जा रही है।  

संघी दहशतगर्द और भारतीय जनखा पार्टी के नुमाइंदों ने नारा दिया था गोली मारो उसके बाद तो जैसे गोली बारी की बाढ़ ही आ गई थी हर दुसरे रोज़ भारतीय जनखा पार्टी के नुमाइंदे, शिद्दत पसंद काफिर या संघी दहशतगर्द गोली मार के जहन्नुम रसीद किये जाने लगे।   गुजिश्ता कुछ महीनों से गुमान यह है की दीफाई फौजों ने अपनी हिकमते अमली तब्दील की है और उस ग़द्दार गुस्ताख़ की गर्दन क़लम करने के लिए तलवार हाथों में ले लिए हैं। जिसने हाल ही में आला अदालत के साथ ज़िनाकारी कर के गंदगी की है.  अब जब जसे दीफाई फौजों के हाथों में शमशीर आई है तब से संघी दहशतगर्द, भारतीय जनखा पार्टी के नुमाइंदे और शिद्दत पसंद काफिर तलवार से काटे जा रहें हैं या चाकूओं से गोद गोद कर हलाक किये जा रहें हैं।  

में तो तमाम वतन परास्त अवाम से इतना ही कहना चाहूंगा जहाँ देखो कोई भी संघी, शिद्दत पसंद काफिर या बीजेपी का कोई भी नुमाइंदा फ़ौरन काट डालो।   इनका खून तुम्हारे ऊपर हलाल है।   इन्होने किसी दुसरे पर गद्दारी का इलज़ाम लगाया था अब साबित हो चूका है की असली ग़द्दार यह ही हैं।  वतन की आबरू, मार्श, जायदात को फ़रोख़्त करने वाले ऐसे पैरासाइट हैं जो उस हरे भरे `दरख़्त को ही तहस नहस कर डालतें हैं जिसके ऊपर वह पलते हैं।  और तब तक उस दरख़्त पर मौजूद रहतें हैं जब तक तमाम दरख़्त सूख कर मर नहीं जाता है।   और अगर उस दरख़्त को ज़िंदा रखना है तो उसके ऊपर कीटनाशक डाल कर दरख़्त पर मौजूद तमाम पैरासाइट को ख़लास किया जाता है।  और यह फलसफा महज़ दरख़्त तक महदूत नहीं है बरक़्स हर जानदार चीज़ पर जब दूसरी ऐसी पैरासाइट क़ब्ज़ा कर लेती है जो ख़ुद तो कुछ मेहनत मशक़्क़त नहीं करती बल्कि जिस पर मुक़ीम है उसका खून चूसती रहती है तो इससे पेश्तर की वोह पैरासाइट बड़े हिस्से को ख़तम कर दे उसको ख़तम किया जाता है। 

और एक बात यह पैरासाइट एक जानदार चीज़ से या जगह से हटाए गए तो दूसरी जगह अपना मुक़ाम बना लेते हैं।   इसका बेतरीन इलाज़ है इनको जड़ से ही ख़तम कर डालो।  नहीं तो २०२४ में बेहद तकलीफ देने वाले हैं।   २०१९ के लिए इस सहाफी ने जो जो पेशनगोई की थी वोह सब अब सही और दुरुस्त साबित हो रही है।  भारत ख़ाना जंगी की अज़ीयत झेल रहा है।  और बर्बाद भी हो चूका है।  तो २०२४ से पहले इस बीजेपी और संघी दहशत नाम के फ़ितने को पूरी तरह ख़तम करना होगा।   नहीं तो फ़रवरी या मार्च २०२१ को लिखे एक मज़मून में यह सहाफी ख़्वाहिश ज़ाहिर कर चूका है हम तो चाहेगें की फिर से २०२४ में बीजेपी ही आये।

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