Thursday, 4 March 2021

साजिशों का दौर हो रहा है ख़लास।

अज़ीज़ नाज़रीन

अगले ५०-५५ सालों में बार्रे सग़ीर का नक़्शा पूरी तरह तब्दील हो जाएगा, जिसकी शुरूवात तो हालांकी हो चुकी है अलबत्ता उसके मज़ीद ख़ैरख़्वाह नताइज अगले १५-२० सालों में मिलना शुरू हो जायेगे।  जिसकी वज़ाहत ख़ाकसार ने अपने मज़मूनों और नक़्श के ज़रिये कर दी है।  

इस ज़िम्न में भारत के लिए आगे के हालात सख़्त तशवीशनाक हैं।  जिस कश्मीर पर भारत अपनी हेकड़ी दिखाता रहता था वोह तो गया जिसकी वजह से भारत के हौसले पस्त हुए और वोह घुटनों के बल गिरा और पाकिस्तान से बात चीत करने को राज़ी हुआ।     

कश्मीर के अवाम पर भारत ने सख़्त तरीन ज़ुल्म और इंसानी हुक़ूक़ की खिलाफ़वर्ज़ी की थी यह उस ही ज़ुल्म, ना इंसाफ़ी, क़त्ले आम का नतीजा है की कश्मीर गया हाथ से।   कश्मीरी मासूमों और नाबालिग़ बच्चो के भेजे में गोलियां मारना और कहना दहशतगर्द थे।   दिसम्बर २०२० में ऐसे ही एक मामले में भारतीय फौज के अफसरों का कोर्ट मार्शल हुआ है।  जिन्होंने सोपोर में १६, १७,२१ साल के ३ मज़दूरों को गोली मार के हलाक कर दिया था और सहाफी इजलास में बोल दिया की दहशतगर्द थे भारत के ऊपर हमला करने के लिए पाकिस्तान से तरबियत ले कर आये थे।   लेकिन उस वक़्त तक कश्मीर में आलमी अमन फौज आ चुकी थी और उसने तमाम मामले के तहक़ीक़ात की तो नतीजे बेहद चौकाने वाले और संगीन मिले।  

मज़ीद भारत की तकलीफें बढ़ने वाली हैं, अभी तक चीन और पाकिस्तान ही भारत के लिए चूनौती थे, लेकिन अब इस जंग में तुर्की भी पाकिस्तान के साथ शामिल हो गया है।   अब चीन, पाकिस्तान और तुर्की की तिकड़ी भारत को अज़ीयत दे रही है। 

जिस अफ़ग़ानिस्तान को संघी दहशत और शिद्दत पसंद काफिर अपनी जागीर समझते थे और उस पर क़ब्ज़ा कर के क़ातिल, जल्लाद, दहशतगर्द रावण रुपी मोदी को इन्साफ पसंद, सूफी, वली कामिल आलमगीर औरंगज़ेब रेहमतुलहा अलैहे के मुक़ाबले में खड़ा करने की गलीज़ आरज़ू रखते थे अब वही मोदी खुद अपने गड गुजरात में रूसवा और ज़लील हो रहा है। #बड़ोदा मुफलिसी और ग़ुरबत के चलते एक ही घर के ६ अफ़राद ने ज़हर खा कर खुदकशी कर ली।   

अपने गलीज़ और गंदे मंसूबों को पूरा करने के लिए काफिर शिद्दत अफ़ग़ानिस्तान में साजिशें कर रहे थे, क़ौम में नाइत्तेफ़ाक़ी पैदा कर के इन्तेशार पैदा कर रहे थे।  पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म के हर अमन कारवां को भारत का सिफारातख़ाना उसको डिरेल कर देता था।   लेकिन अब अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के साथ तुर्की ने मिल कर काम करने के फैसले से भारत की तमाम तर साजिशें नाकाम होंगी।पाकिस्तान के साथ तुर्की के आने से भारत की मुश्किलों में मज़ीद इज़ाफ़ा होगा।  तुर्की का कहना है उसका हदफ़ ख़ानाजंगी की अज़ीयत झेल रहे अफ़ग़ानिस्तान को माशी तरक़्क़ी के लिए काम करना है।  इस सिलसिले में पाकिस्तान और तुर्की दोनों मिल कर ईरान होते हुए रेल तोसिह (विस्तार) कर रहें हैं।   

नाज़रीन अर्मेनिया और अज़रबाइजान जंग में यह तुर्की की अज़ीम कारगरदेगी और जदीद ड्रोन ही थे जिसकी वजह से अज़रबाइजान ने दुश्मन के दूर दराज़ फौजी हिकमत और रसद को देख लिया और तबाह कर डाला नेस्त नाबूत कर डाला और नतीजा अर्मेनिया फौजी खून से सुर्ख हुए  जंग में हार।  

जब इमरान ख़ान २०१८ में वज़ीरे आज़म मुंतखिब हुए थे तब उनकी पहली ख़्वाहिश भारत के साथ ताल्लुक़ात बहाल करने की थी और उन्होंने ३ दफा बात चीत की पेशकश रखी तीनों बार बात चीत भारत की जानिब से लायानी और बेहूदा झूटी बातों पर ख़तम कर दी गई।   उस वक़्त तो मोदी, काफिर शिद्दत पसंदों और संघी दहशतगर्दों को बेइंतेहा ग़ुरूर और तकब्बुर था।  अपनी फौज पर पुर एतेमाद थे, हमारे पास दुनियां की अज़ीम फौज है, हमारे पास पाकिस्तान से ज़्यादा फौजी ताक़त और क़ुव्वत है।  हम किसी भी हिमाक़त का माक़ूल जवाब देने को तैयार हैं।   उसके ऊपर लंगूर और लँगूरनियाँ ऐसा कहतें हैं ना, एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा।   ज़ाफ़रानी मीडया के लंगूर अपनी और पाकिस्तानी फौज के दरमियान ताक़त, टैंक, मिसाइल, फ़िज़ाई तय्यारे, बेहरी क़ुव्वत पर मूल्याकन करते नहीं थकते थे।  हमारे पास अज़ीम फौज है हम पाकिस्तान को ५ दिनों में धुल चटा देंगें।   संघी अपने मुल्क की आबादी पर बड़ी बड़ी बातें करते नहीं थकते थे, हम १३० करोड़ भारतीय अगर सरहद पर जा कर सू सू कर देंगें तो तमाम पाकिस्तानी बह जायेगें और हमारी फौज पाकिस्तान को दुनियां के नक़्शे से मिटा देंगी।   

ऐसा कहतें हैं की रावण को भी अपनी फौज और शैतानी ताक़त पर खूब घमंड था और राम को जंगल जंगल भटकने वाला वनवासी मेरा क्या बिगाड़ लेगा बोल कर अदना तास्सुर किया वही गलती जदीद रावण मोदी और उसके शैतानों संघी दहशतगर्दों ने की और जदीद राम इमरान ख़ान से ले लिया पन्गा।  बस फिर क्या था हो गया वाटोला।  अब रावण भागता फिर रहा है, कभी कमरे में फ़ारिग़ हो जाता है कभी बैतूल ख़ला तलाशता फिरता है।  और कुछ नहीं तो जब प्रेशर ज़्यादा हो जाता है तो जंगल में ही फ़ारिग़ होने बैठ जाता है।  

यही अगर मोदी लंगूर-लँगूरनियों, संघी गद्दारों और ला इल्म जाहिल चनकिया के बहकावे में नहीं आता और वक़्त पर पाकिस्तान की जानिब से बात चीत की पेशकश को क़ुबूल करता तो आज घुटनों के बल गिड़गिड़ाना नहीं पड़ता।   अब खुद भारत पाकिस्तान की जानिब बात चीत का हाथ बढ़ा रहा है। जंग बंदी, इत्तेहाद, अमन की बातें कर रहा है।   लेकिन अब पाकिस्तान का अपर हैंड है, पहले आमने सामने वाली बात होती, आँखों में आँखें डाल कर बात करने की हिकमते अमली होती।  अब तो जैसा सिफारती  दबाओ आलमी बारादरी से आएगा,  वैसा ही करना पडेगा। फिर इसको पकिस्तान की सिफारती जीत कैसे तसव्वुर ना किया जाए.  

नाज़रीन

मज़मून के इक़्तेदाम में सहाफी एक शेर ज़रूर कहेगा। 

मान ना मनवा खीर ना खाये

झूठी पत्तल चाटने आये

No comments:

अब्दुल कुर्सी का हक़दार है.

हर कोंग्रेसी की सोच मिल्लत से ग़द्दारी वाली है. भलें आज मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के लिए बड़े क़सीदे लिखे जातें हैं. उन्होंने तंज़ीम का भला किया ल...