Tuesday, 2 March 2021

अड्डे का एक और दहशतगर्द एरिया कमेंडेन्ट हलाक

अज़ीज़ नाज़रीन,

बस अच्छी ख़बरों को सुनने के लिए तैयार रहियेएक के बाद एक अच्छी से बोहोत अच्छी खबरे सुनने को मिलेगी।   डाकूओं, दहशतगर्दों, क़ातिलों-क़साइयों, नाइंसाफों, ज़ानियों के अड्डे (संसद) का एक और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द एरिया कमेंडेन्ट को दीफाई फौजों ने मौत के घाट उतार दिया है।  मध्य प्रदेश के खंडवा से रकूने अड्डा (सांसद) नंद कुमार सिंह की गर्दन क़लम कर दी गई है।  मतलब उसकी मौत हो गई है।  ज़ाफ़रानी दहशतगर्द दीफाई फौजों से एक लम्बी जंग के बाद घुटनों के बल आ गया, मौत और ज़िन्दगी की जंग हार गया।  मतलब काफी तवील वक़्फ़े से अलील  चल रहा था और उनका इलाज दिल्ली के मेदांता अस्पताल में चल रहा था. उस ज़ाफ़रानी दहशतगर्द को दीफाई फौजों की कोरोना रेजिमेंट ने घेर का मौत के घाट उतारा।  वज़ीरे बग़दादी समेत तमाम ज़ाफ़रानी बड़े दहशतगर्दों ने उसकी हलाकत पर तशवीश ज़ाहिर की है और तमाम ज़ाफ़रानी बेहद ख़ौफ़ज़दा हैं, कहीं अगला नंबर उन्ही में से किसी का तो नहीं है।  कोई भी नहीं बचेगा ना साधू ना लम्बी दाढ़ी और ना कंस मामा।

वज़ीरे दरिंदा मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'खंडवा से लोकसभा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन से दुखी हूं. उन्हें संसदीय कार्यवाही में योगदान, मध्य प्रदेश में भाजपा को मजबूत करने के लिए संगठनात्मक कौशल और प्रयासों के लिए याद किया जाएगा. उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.'

नाज़रीन अभी हाल ही में जान २०२१ में एक मज़मून में लिखा है अमवात का सिलसिला ज़ोरों से चलेगा कोविद-१९ के अलावा कुदरती आफ़ात और हादसात में बड़े पैमाने में हलाकत होंगी।   उस सभी मौतों का हिसाब तमाम सूबे फर्दन फर्दन अपने पास रखें और मरकज़ अपने हिसाब से रखे।  साल के आखिर में यानी ३१ दिसम्बर २०२१ को पूरे साल कितनी अमवात हुई उसका हिसाब लिया जाएगा।  

अच्छा बच्चो बताओ आपको मौत, ख़ौफ़, ज़िना, फ़िरक़ापरस्ती, ग़द्दार, जुमलेबाज़ हुकूमत चाहिए या इन्साफपसंद, खुशहाल, पाक-साफ़ हुकूमत चाहिए।  तो देखिये रजत जी हुकूमत हम थोड़ी बनायेगे आप थोड़ी बनायेगे यह तो मालिके कायनात बनाएगा।  

चल बे काने दज्जाल अब बोल कैसा लग रहा हैतूने अफ़ज़ल भाई को झूट फरेब के नाम पर सज़ा देने की सिफारिश की थी।  जिस संसद में महज़ ५ पुलिस वाले मारे गए थे और कांग्रेस ने संघ, बीजेपी और शिद्दत पसंद हिन्दुओं के दबाओ में आ कर एक मज़लूम को फ़ासी पर टांग दिया था।   अब तो तमाम ज़ाफ़रानी और ज़्यादातर कांग्रेस के संसद मारे जा रहे हैं।  क्या संसद और क्या सूबे की असेंबली सब को फोड़ डाला मटिया मेल कर दिया तेहेस नहस कर दिया नेस्त नाबूत कर दिया, अब किस को सज़ा दिलवाएगा।  

सुशिल कुमार शिंदे, कांग्रेस और संघी चड्डी प्रणब तीनों का जनाज़ा निकल गया।  कांग्रेस आई.सी.यूं. में पड़े पड़े अपनी मौत का इंतज़ार कर रही है सुशिल कुमार शिंदे गुमनामी के अंधेरों में ग़र्क़ाब हो गया और संघी दहशतगर्द प्रणव मुखर्जी मौत की आगोश में चला गया।   और यह सब कारगरदेगी अफ़ज़ल भाई की शहादत से महज़ ७ सालों की है।  आगे और है, और है।

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