Wednesday, 17 March 2021

दीफाई फौजों की गिरफ्त मज़बूत, एक और दहशतगर्द को फ़ासी।

 अज़ीज़ दीफाई फ़ौजिओं,

आप मुबारकबाद के हक़दार हैं।   कल या परसों फेस बुक पर किसी साहब का एक मज़मून देखा जिसमें उन्होंने दिल्ली के बाटला हाऊस तनाज़िया पर मुस्लिम नवजवान को फ़ासी की सज़ा सुनाये जाने पर तनक़ीद कर रहे थे।

उनका कहना था, दिल्ली दंगों के मुजरिम खुले आम घूम रहें हैं, ज़ाफ़रानी दहशतगर्द खुले आम घूम रहें हैं और अदालतों को फ़ासी की सज़ा सुनाने के लिए मुस्लिम ही दिख रहें हैं।   उसके ऊपर इस सहाफी ने जवाब दिया था अगर अदालतें अपना काम ज़िम्मेदारी से नहीं कर रहीं हैं तो आप शिद्दत पसंदों और दहशतगर्दों को फ़ासी पर टांगना शुरू कर दो।  इनका खून आपके ऊपर हलाल है।  

ख़ैर हम तो अपना काम कर ही रहें हैं।  ताज़ा मामले में एक और ज़ाफ़रानी दहशतगर्द और एरिया कमेंडेन्ट को फ़ासी पर टांग दिया गया।   हिमाचल प्रदेश की मंडी लोक सभा सीट से रकूने पार्लियामान रामस्वरूप शर्मा को दीफाई फौजों ने गिरफ्तार कर के मुक़दमा चलाया था और उसको हमारी फौजी अदालत ने फ़ासी पर लटकाने का हुकुम सुनाया था।   इसको फांसी पर लटका दो, और तब तक लटका रहने दो जब तक इसकी मौत वाक़े ना हो जाए।  इस हुकुम की अमल बजावनी करते हुए सुब ४ बज कर १० मिनिट पर ज़ाफ़रानी दहशतगर्द राम को इस सहाफी की मौजूदगी में फ़ासी पर लटका दिया गया।  

क़ैद ख़ाने से उसको ३ बज कर ३५ मिनिट पर बहार लाया गया और उसको ग़ुस्ल वग़ैरा के लिए ताज़ा पानी दिया गया।    फिर उसको चाये और नाश्ते के लिए पुछा गया जिसका उसने इंकार कर दिया फिर भी फौजी अदालत के जेल मेनुअल के हिसाब से उसको हल्का नाश्ता ज़बरदस्ती खिलाया गया।   हमारी फौजी अदालत के मेनुअल के हिसाब से किसी भी फ़ासी पर लटकाने वाले क़ैदी को भूका नहीं मारा जाता है।  उसने २ बिस्किट और एक कैप चाये पी।  फिर उसको ३ पुलिस वाले पकड़ कर फ़ासी के फंदे तक ले गए।  जहाँ पर हज़रते इज़राईल उनकी मौत की रस्सी खींचने के लिए बेताब थे। 

फ़ासी का फंदा देख कर ज़ाफ़रानी दहशतगर्द ग़मगीन हो गया, जेल मेनुअल के हिसाब से उससे उसकी आखिर ख़्वाहिश पूछी गई जिसका उसने कोई जवाब नहीं दिया।   फिर जल्लादों ने उसके मुँह पर काला कपडा डाल कर उसको फांसी के तख़्ते पर खड़ा कर दिया और एक ही झटके में तख़्ते को खींच दिया गया और उसका जिस्म फंदे से झूल गया।   थोड़ी देर तड़पने और फड़फड़ाने के बाद उसका जिस्म ठंडा हो गया।  उसकी लाश फंदे तक सुब ७ बज कर २० मिनिट तक लटकी रही।  जर्राहों और तबीबों ने उसकी लाश का मुआएना किया और उसको मुर्दा एलान कर दिया। 

उसके बाद उसकी लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दी गई और १० बजे के आस पास उसकी लाश को भारतीय पुलिस अफसरों के हवाले कर दिया गया।   

अज़ीज़ नाज़रीन अब आपसे ख़िताब है, कपिल मिश्रा बोहोत बोहोत बोहोत अदना है जब चाहेगें उसको मौत का मज़ा चखा देंगे।  कुचल देंगें, रगड़ देंगें, मसल देंगें। आप लोग मुतमईन रहें, जब ज़ाफ़रानी मरकज़ी मौजूदा वज़ीर, मौजूदा वज़ीरे आला, मौजूदा रकूने पार्लियमान दीफाई फ़ौजिओं के हाथों से नहीं बच सके तो एक अदना से कीड़े के बारे में सोच कर अपना ज़हन और वक़त दोनों बर्बाद ना करें।  अभी तो और बड़े बड़े मगरमच्छों और बागड़ बिल्लों को मौत देनी है। 

गोली मारोगे सालों को अरे यह पहले किस ने बोला था ज़ारा याद रखो ठाकुर।

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