अज़ीज़ नाज़रीन
एक और मुबारकबाद क़ुबूल कीजिये, एक के बाद एक क़िसास लिए जा रहें हैं। इस बार २०१६ में झारखंड के रांची में ३५ साला मोहम्मद मज़लूम और उनके नाबालिग़ भतीजे १५ साला आज़ाद ख़ान उर्फ़ इब्राहीम को बेदर्दी से पीट पीट कर फ़ासी पर लटका दिया था। दहशतगर्दों ने इतनी बेदर्दी से उनको शहीद किया था की जांच पर आये पुलिस वालों की भी रूह कांप गई थी। और तहक़ीक़ात करने वाले अफसर ने बोला था लगता है मक़तूलों को बेहद बेरहमी से मुँह के अंदर कपड़ा ठूस कर तमाम दांत तोड़ कर मारा है और क़ातिल के अंदाज़े क़त्ल से लग रहा है की वोह बेहद वेहशाना और दरिंदा सिफ़त और मक़तूलों से बेहद नफरत करने वाला होगा।
झारखंड तब भारतीय जनखा पार्टी के ज़ेरे मत्तेहत था, सो क़िसास भी ऐसे सूबे से लेना था
जो बेहद वेहशाना, दरिंदा सिफ़त, क़साई, जल्लाद और दहशतगर्द की ज़ेरे सरपरस्ती
में काम करता होगा उस क़िसास के लिए उत्तर
प्रदेश बिलकुल माक़ूल लगा। जहाँ आज सुब बरोज़ सनीचर को फरुखाबाद के अमृतपुर ज़ेरे निगरानी
थाना में दो चचेरे भाइयों की लाशें पेड़ पर मशकूक हालात में फ़ासी के फंदे से लटकी हुई
पाई गई। इब्तेदाई मरहले की तहक़ीक़ात में पुलिस
इस को खुदकशी मान कर ही चल रही है लेकिन मक़तूलों के अहले ख़ाना का कहना है की यह क़त्ल
की वारदात है।
फ़ासी देने की पहली खबर मिलते ही पुलिस मौक़ा ऐ फ़ासी पर पहुंची और लाशों को फ़ासी
के फंदे से उतार कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। जहाँ जर्राह ने लाशों का मोयना किया और दोनों के
मूर्दा होने की तस्दीक़ के साथ दोनों की मौत का एलान किया।
दरअसल ये मामला अमृतपुर थाना के ज़ेरे निगरानी पिथनापुर गांव का है. यहां १८ साला
विनय प्रताप अपने चचाज़ाद भाई १७ साला मंगली के साथ कटरी इलाक़े में वाक़े अपने खेतों
में फसलों की निगरानी करने गया था। खेतों में
ही उन दोनों को किसी ने दबोच कर फ़ासी से लटका दिया। दोनों की लाशें पेड़ पर धोती से लटकती हुई मिली।
गनीमत यह रहा की दोनों की लाशें सही सलामत थी और किसी क़िस्म की टूट फुट नहीं हुई
थी। उससे ज़ाहिर हो रहा है की दोनों के साथ
फ़ासी से पहले किसी क़िस्म की कोई हाथापाई नहीं हुई थी और ना ही किसी ने बेदर्दी से वेहशाना
तरीके से फ़ासी दी है। जिस तरह से हिन्दू दहशतगर्दों
ने रांची के मज़लूम और उनके भतीजे इब्राहिम को बेदर्दी से ज़ालिमाना तरीक़े से हाथ पैर
तोड़ कर मुँह में कपडा ठूस कर तामाम दांत तोड़ कर फ़ासी पर लटकाया था।
ख़ैर वजह जो कुछ भी हो अगरचे इनको फ़ासी दी गई है तो भी मौजूदा हुकूमत की तारीफ करना होगी की उसने फ़ासी से पहले झारखंड की कहानी नहीं दुहराई और बेदर्दी से फ़ासी पर नहीं लटकाया और अगर दोनों ने खुदकशी की है तो किस्सा ही खलास होता है। बरहाल अगर यह मौजूदा हुकूमत की कारगरदेगी है या खुदकशी, दोनों ही सूरतों में क़िसास तो पूरा ही हुआ है। जिस तरह मासूम नाबालिग़ १५ साला इब्राहीम को फ़ासी दी थी उसका क़िसास १७ साला से पूरा हुआ।
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