Tuesday, 19 January 2021

जासूसे आज़म और जनखा पार्टी के खिलाफ दर्ज करें "लव जिहाद"

अज़ीज़ नाज़रीन,

हुकूमते हिन्द का मौजूदा जासूसे आज़म और जनखा पार्टी के नुमाइंदों के खिलाफ "लव जिहाद" के मामले दर्ज होना चाहिए।   क्योंकि इन लोगों ने अपनी मोहब्बत में अवाम को गुमराह किया है और जालसाज़ी, धोखा धड़ी कर के, झूट बोल कर सच्चाई को छुपा कर वैक्सीन लेने पर मजबूर कर रहें हैं।   वेक्सीन के मुज़िर असरात अब अवाम पर नुमाया होने लगें हैं।   और तमाम जनखा पार्टी के नुमाइंदे और जासूसे आज़म अवाम के साथ लव जिहाद कर रहें हैं।  दूसरी बात जासूसे आज़म हिन्द की आबादी को मौत की आगोश में भेज कर कम करना और काबू में करना चाहता है।    

अदद शुमार इस बात की गवाही दे रहें हैं की वेक्सीन में कुछ तो गड बड़ है।  जासूसे आज़म वेक्सीन जिहाद कर रहा है।   क्योंकि अभी तक जितने भी अवाम को वैक्सीन दी उनमे से ८० फीसद ने उसके मुज़िर असरात को भोगा है और उनको वापिस से शिफा खाने में दाखिल करना पड़ा है।   कुछ अमवात की भी खबरे हैं।   ऐसी ही एक खबर सूबे उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के एक वार्ड बॉय की मौत पर मीडिया की सूर्खिया बनी हुई है।  मुरादाबाद के दीन दयाल उपाध्याय हुकूमत के ज़ेरे इंतज़ाम शिफा ख़ाने के जर्राही (सर्जिकल) वार्ड में काम करने वाले वार्ड बॉय महिपाल की बरोज़ इतवार रात को मौत हो गई.  ४६ साला करोना फौजी की कोरोना वायरस वैक्सीन का टीका लगवाने के एक दिन बाद मौत हो गई थी।

उसकी मौत पर वज़ीरे सेहत लीपा पोती में लगा हुआ है।  अब भले ही सेहत वज़ारत ख़ाने ने बरोज़ पीर इस खबर को 'झूठा' बताया हो।  भले ही मुरादाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट राकेश सिंह के हवाले से कहा गया हो कि मामले में आला सतह पर जांच का हुकुम नाफ़िज़ किया है।  इन्तेज़ामियाँ यह बोल कर उस वार्ड बॉय की मौत का वैक्सीन से कोई भी ताल्लुक़ नहीं है लाख लीपा पोती कर ले।  सेहत वाज़ारत ख़ाना मुरादाबाद में कोरोना वायरस वैक्सीन लगने के बाद वार्ड बॉय की मौत की खबर को झूठा बेबुनयाद बताते हुए लाख खारिज कर दे.  लेकिन इस बात से इंकार नहीं कर सकता की ४६ साला महिपाल हस्ता खेलता जिसको किसी क़िस्म की कोई बीमारी नहीं थी आनन फांनन में वेक्सीन की खुराक लेने के बाद कैसे एक ही दिन में चल बसा। 

४६ साला नौजवान महिपाल की मौत पर अब तमाम ज़ाफ़रानी महकमा लीपा पोती में लगा है और अवाम कहीं इश्तेआल में ना आ जाए इसलिए झूटी सच्ची कहानी बना रहा है और यही है "लव जिहाद"  जो झूट को सच साबित करने में लगा हुआ है।  मुरादाबाद का चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मिलिंद चंद्र गर्ग बोलता है की वार्ड बॉय की मौत की वजह दिल का दौरा पड़ने से हुई है.  ऐसे ज़ाफ़रानी मुहाफिजों की जब तक भरमार है वोह अपने किसी भी साथी को जेल नहीं होने देंगे।   बस झूटी सच्ची कहानियों पर अवाम को मौत की आगोश में भेजते रहेंगे।  कुल मिला कर यह बात वाज़े हो गई है की वैक्सीन में कुछ तो ज़हरीले आशियात मौजूद हैं।   जो अवाम की ज़िन्दगी पर बेहद मुज़िर असरात डाल रहें हैं। जैसे उनकी मर्दानगी पर असर हो रहा है मस्तूराते बच्चे पैदा करने के लायक नहीं रह रही हैं, बिल आखिर वेक्सीन लेने के बाद मौत तक वाक़े हो रही है।   यह सब कारगरदेगी जासूसे आज़म और ज़ाफ़रानी तंज़ीम के नुमाइंदों ने आबादी को कम करने की हिकमत के लिए इख़्तेयार की है। 

जो अवाम जासूसे आज़म (मोदी) और ज़ाफ़रानी तंज़ीम की मोहब्बत में आ कर वेक्सीन ले रहें हैं वोह सब लव जिहाद के दल दल में फंस रहें हैं क्योंकि उनसे हक़ीक़त को छुपा कर झूट बोल कर जालसाज़ी कर के मौत की वेक्सीन को झूठा नाम रख कर की इसमें तुम्हारी बक़ा और शिफा है अवाम को दिया जा रहा है, और उनकी मौत हो रही है।  

वेक्सीन के मुज़िर असरात और लेने के बाद मौत वाक़े होने का ख़ौफ़ अब तमाम हिन्द के अवाम में सर चढ़ कर बोलने लगा है।   और अब अवामे हिन्द जासूसे अज़ाम की मोहब्बत से जुदा हो कर उसके लव जिहाद के फलसफे को खूब समझ गए हैं।   मुल्क भर में कोरोना वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे अवाम के ज़हन में एक ख़ौफ़ या शक शुकूक के हालात पैदा हो गए हैं।हूकूमती नुमाइंदे और दलाल अवाम को मोदी मोहब्बत में वेक्सीन ले कर लव जिहाद के लिए उकसा रहें हैं।   एम्स का डायरेक्टर और कोविड एक्सपर्ट डॉक्टर रणदीप गुलेरिया बोलता है कि वैक्सीन में ऐसा कोई मुज़िर असरात नहीं है, जिससे मौत हो जाए।  उसने कहा कि मैंने वैक्सीन ली है और मैं लगातार काम कर रहा हूं। बैठकें कर रहा हूं। मुझे कोई मुज़िर असरात का सामना नहीं करना पड़ा।  ये वही लोग हैं जो दलाल किस्म के होतें हैं, और लोव जिहाद के फायदे बताते हैं।   पहले इन जैसे लोगों को गिरफ्तार करना होगा और इनकी साजिश को तार तार करना होगा ताके जासूसे अज़ाम की साजिश का पता चल पायेगा। 

कुल मिला कर करोना वैक्सीन कुछ नहीं बल्कि ज़हरीली आशियात से तैयार की गई एक ख़ुराक़ है, जिसके मुज़िर असरात होतें हैं।   दूसरी बात कोई भी तिब्बी माहिर इस बात को इंकार नहीं कर सकता की एलोपेथी की किसी भी दवाई के कोई भी मुज़िर असरात नुमाया नहीं होतें हैं।  हर दवा या ख़ुराक़ के कुछ ना कुछ मुज़िर असरात होतें हैं।  हाँ अगर मुज़िर असरात नहीं होतें तो वोह हकीमी नुस्के के या कुदरती आशियात से तैयार की गई ख़ुराक़ के नहीं होते।   

यह बात वाज़े है, जासूसे आज़म और ज़ाफ़रानी तंज़ीम हिन्द में बढ़ती हुई आबादी को कम करना चाहतें हैं तो वोह इस तरह से कम करेंगें।  सिर्फ इनके अपने मुवाफ़िक़ ही नहीं ले रहें हैं करोना वेक्सीन की ख़ुराक़ बाक़ी तमाम अवाम को ठूसाई जा रही हैं। 

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