Sunday, 17 January 2021

मोदी बेरुन मुल्क कारिंदा, कारगुज़ार या एजेंट हैं। (जासूस)

 अज़ीज़ नाज़रीन,

मोदी बेरुन मुल्क कारिंदा, कारगुज़ार या एजेंट हैं।  २०१४ से ले कर तो अभी तक जितने भी अमल मोदी इन्तेज़ामियाँ ने किये उनका फायदा अवामे हिन्द को तो नहीं बरक्स पाकिस्तान को हुआ।   बल्कि भारत को तो सख़्त नुकसान ही हुआ है।   जिसका ज़िक्र यह सहाफी अपने मज़मूनों में पहले ही कर चूका है।  हिटलर की कारगरदेगी काम कर गई, भारत को बर्बाद करने आया था कर दिया।  मोदी  की  वजह  से भारत कश्मीर  और  करोना  की  जंग  हारा. आगे  भी  मोदी के फैसले पाकिस्तान  की  मदद  करेगें.   इस सहाफी के पास इस बात की तस्दीक़ अभी तक नहीं हो पाई है की मोदी किस मुल्क के लिए जासूसी कर रहा है लेकिन यह बात वाज़े हो गई की उसके फैसले से पाकिस्तान को ज़्यादा फायदा पंहुचा है।   उसके किये हुए फैसले उलटे कर दिए गए और बजाये पाकिस्तान को नुकसान के फायदा हो गया।   अब बस इस बात की तहक़ीक़ात और जानकारी निकालना है की मोदी किस मुल्क के इशारे पर काम कर रहा है और उसका मक़सद क्या था।  

जिस हिसाब से मोदी का हर अमल भारत को बर्बाद करने जैसा था उससे तो साफ़ ज़ाहिर हो रहा था की मोदी किसी और के इशारे पर काम कर रहें हैं।  भारत की इस बर्बादी की शुरूवात मोदी ने नोट बंदी से की थी जो जा कर ताला बंदी पर ख़तम हुई।   मतलब पहले तमाम मुल्क के ताजिरों को कंगाल कर दो उसके बाद तमाम अवाम को क़ैद कर दो। 

में यह बात समझने से क़ासिर हूँ की मोदी जैसा मजा हुआ सियासतदां और इतने अहमकों जैसे फैसले जिसको देख कर एक १० या १२ साल का तालिबे इल्म भी महसूस कर सकता है की ऐसी अहमक़ सोच जिसका सीधा नुकसान भारत की साख और इज़्ज़त से हो कोई वज़ीरे आज़म कैसे ले सकता है।   दूसरी बात जितने भी जासूसी से भरे अमल हुए वोह सभी २०१४ के बाद बीजेपी के मेम्बरान की जानिब से हुए।  क्या वजह है की तमाम जासूसी में मुलव्विस लोग मोदी के कारकून पाए जाते थे। 

तीसरी बात जितने भी क़ानून बनाये उनसे आलमी सतह पर भारत की इज़्ज़त और वक़ार को ज़बरदस्त ठेस लगी है।  फिर उनमे से किसी भी क़ानून को अमल में नहीं लाया जा सका।   ज़ाहिर है की यह बात मोदी जानता था की क़ानून अवाम की खिलाफवर्जी वाला होगा और जम्हूरियत का क़त्ल करने जैसा होगा तो उस पर एहतेजाज होगा और साख ख़तम होगी भारत की फिर हम उस क़ानून को आधा अधूरा छोड़ कर वैसा ही पड़ा रहने देंगे, मतलब साफ़ है मोदी को क़ानून बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी बरक्स भारत की बदनामी में ज़्यादा तवज्जो थी।  

ट्रिपल तलाक़ से ले कर तो शहरियत क़ानून उसके बाद किसान क़ानून यह सभी ऐसे काले कानून हैं जिसको पूरी तरह अमल में नहीं लाया जा सका लेकिन इन्होने भारत की सख़्त तरीन बदनामी की है।   कल ही शिमला में एक और ट्रिपल तलाक़ का मामला सामने आया, तो जिस चीज़ के लिए क़ानून अमल में लाया गया था वोह मक़सद तो पूरा नहीं हुआ ट्रिपल तलाक़ तो अभी भी हो रहें हैं।   यही बात में हमेशा बोलता था की किसी भी काम को करने के पीछे एक सोच होती है एक नियत होती है और जब इंसान अपने हदफ़ को हासिल नहीं कर पा रहा है मतलब उसका हदफ़ और कुछ था।  

मोदी का मिशन क्लीन भारत या स्वच्छ भारत भी इसी मुद्दे से जुड़ा हुआ है।   स्वच्छ मतलब पाक और मोदी तमाम भारत पर पाक की हुकुमरानी देखना चाहता था।   अगर यह बात साबित हो जाती है तो मोदी गोडसे के बाद सबसे बड़ा गद्दार माना जाएगा।  हालांकी चाहते तो हम भी वही थे जो मोदी चाहता था लेकिन हमारी और मोदी की चाहत में ज़मीन आस्मां का फ़र्क़ है।  हम तो खुल कर पाक की तरफदारी करते थे, लेकिन मोदी ने गले लगा कर गर्दन काट डाली, भारत का सर (कश्मीर) क़लम कर दिया।  दूसरी बात हम किसी हुकुमती ओहदे पर नहीं थे हम अवाम थे, लेकिन मोदी तो वज़ीरे आज़म था और उसने गद्दारी की भारत के दस्तूर के ख़िलाफ़ काम किया हर वोह अमल जो भारत को माशी, जज़बाती या सियासी नुकसान पहुंचाता था वही किया।  छुप के वार किया गले लग कर गर्दन काट डाली तो मोदी सबसे बड़ा देश के ग़द्दार साबित हुआ।  

"इन देश के गद्दारों को गोली मारो बीजेपी वालों को"

पठान कोट, ऊरी और पुलवामा में भी मोदी, बीजेपी और संघ की कारगरदेगी शामिल थी पठानकोट और पुलवामा के बाद इस सहाफी ने अपनी तहक़ीक़ात में जो पाया वोह बेहद डरवाना और चौकाने वाला था जिसका ज़िक्र अंग्रेज़ी मज़मून में किया हुआ है।  इस सहफ़ी की पठानकोट रिपोर्टिंग के बाद  अमेरिका ने भी भारत को लताड़ लगाई थी और उसको दहशतगर्द हमला मानने से इंकार कर दिया था। 

ख़ैर गले लग कर इन लोगों की गर्दन क़लम करने की पुरानी आदत है।   या यह ग़द्दार गले लगने या अपने दुश्मन से दोस्ती का नाटक करतें हैं और गले लगते ही उसकी पीठ में खंजर उतार देतें हैं।   दोस्ती तो एक बहाना होती है असल मक़सद तो दुश्मन को इज़ा पहुँचाना होता है।  और मोदी, बीजेपी के आने के बाद भारत को कितनी इज़ा पहुंची है कहाँ कहाँ पहुंची है यह अवाम खुद ही फैसला करे।   अब यह शख्स और तंज़ीम भारत के दोस्त तो हो नहीं सकतें इन्होने जितने भी दोस्ती के काम किये और भारत......... की जय जो वन्दे............. नहीं बोलेगा वोह ग़द्दार है.  ऐसे बेफ़ुज़ूल मामलों पर बवाल मचाया, ऐसे लोग ही भारत के दुश्मन थे बस दोस्ती का नाटक कर रहे थे सही मौक़ा मिलते ही भारत की पीठ में उतार दिया खंजर।

नाज़रीन यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं हो सकता मोदी, बीजेपी ने जिस जिस काम को किया उसके मुज़िर असरात भारत के अवाम पर बेतहाशा पड़े।  फिर जिस चीज़ के लिए मोदी या बीजेपी वाले बवाल करते थे वही चीज़ खुद क्यों करते रहे।   गौ कुशी या गौ हत्या पर बवाल मचाया लेकिन भारत गौ मॉस का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर कैसे बन गया।   गौ तस्करी पर बवाल मचाया और उत्तर प्रदेश, हरयाणा, राजिस्थान, मध्य प्रदेश में पुलिस और बजरंगदल, गौ सेवक खुद ही गौ तस्करी में मुलव्विस पाए गए।   नवंबर २०२० में उत्तर प्रदेश में तो एक दरोगा २ सितारा पुलिस अफसर मुअत्तिल हुआ है।  वोह दरोगा उत्तर प्रदेश से बिहार तक अपनी हिफाज़त में गायों को पहुंचाने के फ़र्ज़ को अंजाम देता था।  आगे बिहार से बंगलदेश में गायों को फ़ौज के आला ओहदेदार स्मगलिंग करते थे।  फौज के जवानों पर कोर्ट मार्शल चालू है जो बंगलादेश में गायों की स्मगलिंग करवा रहे थे।   

साक्षी बोलता है की ओवेसी की वजह से बीजेपी को फायदा हुआ बिहार के बाद वेस्ट बंगाल और उत्तर प्रदेश में भी ओवेसी हमको फायदा पहुचायेगे।   में उससे कहना चाहता हूँ पहले तुम अपनी बक़ा के बारे में सोचो की तुम्हारे वज़ीरे आज़म की वजह से पाकिस्तान को कितना फायदा हुआ है और इंशा अल्ल्हा २०२३ के इंतेखाब से पहले हर सबूत के साथ इस मुनाफ़िक़ का दोगला चेहरा अवाम के सामने कर दूंगा की यह शख्स किस मुल्क के लिए काम करता था और उसका असली मक़सद किया था।   फिर जीतना भारत के इंतेखाब को।  

अगर तमाम तहक़ीक़ात दूध का दूध और पानी का पानी की तरह शफ़्फ़ाफ़ हो गई तो साक्षी जैसे दोगले और दो मूही साँपों को भारत में छुपने के लिए ज़मीन तंग हो जाएगी।   भारत का अवाम चुन चुन के इन जैसे गद्दारों को मौत के घाट उतारेगा।

नाज़रीन यह बात भी तहक़ीक़ात में सामने आई है जब जब मोदी, बीजेपी और संघ पर कोई भी तहक़ीक़ अपने हतमी मरहले को पहुँचती थी तो यह लोग वतन परस्ती, हिन्दू मुस्लिम, ट्रिपल तलाक़, बाबरी, गौ हत्या, जैसे लायानी मामलों में अवाम को उलझा देते थे और तहक़ीक़ात को पटरी से उतार देते थे।  

जैसा की में मेरे हर मज़मून या आज तक, नव भारत के तब्सिरों में २०१८ के बाद से बोलता आया था एक एक बीजपी वाला मारा जाएगा एक एक शिद्दत पसंद मारा जाएगा एक एक संघी मारा जाएगा हर एक मुनाफ़िक़ मारा जाएगा सबसे आखिर में मीडिया के लंगूर और लँगूरनियों का नंबर लगेगा।  क्योंकी मेरी तहक़ीक़ में कुछ ऐसे सबूत हाथ लगे हैं जिनको अगर मीडिया में शाया कर दिया तो पब्लिक इन सबको चुन चुन के हलाक कर देगी। 

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